Vallabh Bhawan Corridors To Central Vista:बैंस के बाद मुख्य सचिव की दौड़ में फिर सुलेमान सबसे आगे

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Vallabh Bhawan Corridors To Central Vista:बैंस के बाद मुख्य सचिव की दौड़ में फिर सुलेमान सबसे आगे

इन दिनों अपर मुख्य सचिव वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोहम्मद सुलेमान मुख्यमंत्री के काफी नजदीक बताए जा रहे हैं। वे चीफ सेक्रेटरी तो नहीं बन सके, पर इन दिनों मुख्यमंत्री के साथ कदमताल जरूर कर रहे हैं। इंदौर में हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन के वे प्रभारी हैं और कोऑर्डिनेशन और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके पास है। मोहम्मद सुलेमान की सक्रियता इस बात का संकेत भी है कि 31 मई के बाद जब चीफ सेक्रेटरी इक़बाल सिंह बैस का कार्यकाल पूरा होगा तो वे अगले चीफ सेक्रेटरी बनने की कतार में सबसे आगे खड़े होंगे।

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अगर इकबाल सिंह बैंस का एक्सटेंशन नहीं होता तो उस समय भी मोहम्मद सुलेमान के चांस चीफ सेक्रेटरी बनने के सबसे ज्यादा थे। लेकिन, इकबाल सिंह बैस को एक्सटेंशन मिलने के बाद उनका नंबर 6 महीने पीछे खिसक गया, ऐसा माना जा सकता है। यह देखना अब दिलचस्प होगा कि यदि कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ, तो मोहम्मद सुलेमान 1 जून 2023 को मध्य प्रदेश के प्रशासनिक प्रमुख यानी चीफ सेक्रेटरी के कुर्सी पर विराजमान होंगे।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान की सक्रियता और सफलता का एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि उनकी विदेश मंत्रालय के सचिव (प्रवासी भारतीय) डॉ औसाफ सैयद से भी अच्छी ट्यूनिंग है। मोहम्मद सुलेमान और डॉ औसाफ़ सैयद दोनों 1989 बैच के अधिकारी हैं। औसाफ़ भारतीय विदेश सेवा और सुलेमान भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं।

चुनाव में क्या होगा सिंधिया समर्थकों का! 

अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव में सिंधिया समर्थकों को टिकट देने में भाजपा संगठन गंभीर नहीं रहेगा। ऐसी कोई बाध्यता भी नहीं रहेगी कि अक्षम या कोई कारण होते हुए भी उन्हें टिकट दिए जाएं। शायद यही वजह है कि इन दिनों सिंधिया समर्थकों के कई तरह के कारनामे सामने आने लगे हैं। ये वही नेता हैं, जो कांग्रेस छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए थे। इन 22 विधायकों में 7 उपचुनाव हार गए थे और करीब एक दर्जन फिलहाल मंत्री हैं। लेकिन सबसे ज्यादा संकट इन जीते हुए मंत्रियों पर ही है।

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इन मंत्रियों के कई ऐसे कारनामे अब सामने आने लगे हैं, जो भाजपा संगठन के लिए टिकट काटने का सबसे आसान तरीका होगा। परिवहन और राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत एक जमीन के मामले में बुरी तरह फंस गए। उनके खिलाफ कई प्रमाण भी सामने आने की बातें सामने आई हैं। उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव भी पिछले दिनों एक अलग तरह के कांड में फंस गए। एक कथित महिला पत्रकार ने उनके ही क्षेत्र में जाकर उन पर गंभीर चारित्रिक आरोप लगाए। कांग्रेस ने भी इसे खूब भुनाया। खुद वह महिला भी वायरल हुए वीडियो में यह बोलती नजर आई थी कि राजवर्धन सिंह दत्तीगांव को अगले चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा। हालांकि बाद में इस महिला ने राजवर्धन सिंह को सम्मानित नेता बताते हुए अपने बयान को वापस लिया।

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इन मंत्रियों में एक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्नसिंह तोमर भी हैं, जिनकी हरकतें हमेशा मीडिया में छाई रहती है। कभी वे क्षेत्र में सड़क की मांग पर चप्पल उतार कर घूमने लगते हैं, कभी सड़क चलते किसी से खाना मांग कर खाने लगते हैं, ऊर्जा मंत्री हैं इसलिए रास्ते चलते ट्रांसफार्मर के आस-पास लगी झाड़ियां तोड़ने लगते हैं। उनकी यह हरकतें भी भाजपा हाई कमान को अंदर ही अंदर रास नहीं आ रही है। एक और मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया भी मुख्य सचिव को लेकर दिए अपने बयान के लिए पहले ही निशाने पर आ चुके हैं हालांकि इन दिनों में एकदम चुप हैं।

पीएचई राज्य मंत्री बृजेंद्र यादव को लगा कि वे कुछ कर सकते तो खुद ही अपनी तरफ से यह ऐलान करना शुरू कर दिया कि कांग्रेस उन्हें वापस बुला रही है। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कांग्रेस के किस नेता ने उन्हें ऑफर दिया और कब! दरअसल, ऐसा करके वे भाजपा संगठन पर यह दबाव डालना चाहते हैं कि उन्हें टिकट से वंचित न किया जाए।
अभी ऐसे और भी मंत्री हैं, जिनके नाम अगले 3 महीने में सामने आएंगे। ये सब और कोई नहीं करा रहा, बल्कि माना जा रहा है और बताया जा रहा है कि इसके पीछे कहीं न कहीं उन भाजपा नेताओं का ही हाथ है, जिनके टिकट इन आसमान से उतरे नेताओं की वजह से प्रभावित होंगे। इसलिए उनकी पूरी कोशिश है कि इनके कारनामे सामने लाकर इनके रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार तो इनके लिए दबाव बनाकर इनको मंत्री बनवा दिया। जो दिला सकते थे, वह सब दिला भी दिया अब वे दूसरी बार फिर इनके लिए लड़ेंगे और कोई दबाव बनाएंगे इस बात के आसार कम ही हैं।

मनोहर अगनानी का अगला कदम क्या होगा!

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दिल्ली में अपर सचिव के पद पर पदस्थ मध्यप्रदेश कॉडर के 1993 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ मनोहर अगनानी 6 जनवरी 2023 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त हो गए। उनके वीआरएस के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए निर्धारित तीन माह के पूर्व नोटिस की शर्त को शिथिल करते हुए 6 जनवरी से उनका स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन स्वीकार किया था।

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ये सवाल हवा में है कि वे अब क्या करेंगे! मनोहर अगनानी के बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हुआ कि उनका अगला कदम क्या होगा! उड़ती हुई खबर है कि मनोहर अगनानी देश के सुप्रसिद्ध उद्योगपति अजीम प्रेमजी के एनजीओ में किसी बड़े पद पर आसीन होंगे! लेकिन, अभी यह सिर्फ कयास है, सच्चाई जानने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में साइड लाइन!

  इंदौर में हो रहे प्रवासी भारतीय सम्मेलन सिर्फ विदेशों में बसे प्रवासियों को इंदौर आमंत्रित कर उनका स्वागत सत्कार तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक मकसद वहां बसे भारतीयों को निवेश के लिए भी आकर्षित करना है। जानकारी के मुताबिक इस सम्मेलन में कई एमओयू भी होंगे। कुछ चुनिंदा प्रवासियों ने इसमें रूचि भी दिखाई है। उन्हें पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया भी दिखाए जाने की जानकारी है।

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प्रवासी सम्मेलन के बाद ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भी होगी, जिसमें देश और दुनिया के उद्योगपति भी आएंगे। लेकिन, ध्यान देने वाली बात ये कि प्रवासी सम्मेलन में भी उद्योग से जुडी गतिविधियों का दखल है, फिर भी प्रदेश के उद्योग मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव पूरी तरह साइड लाइन हैं। वे सम्मेलन की किसी हलचल में दिखाई नहीं दे रहे। वैसे तो पूरे आयोजन में शिवराज सरकार के किसी मंत्री का ज्यादा दखल नहीं है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी इंदौर के प्रभारी होने के नाते जरूर कहीं-कहीं दिख रहे हैं!

सूचना के बावजूद नहीं पहुंचे दूरदर्शन केंद्र अनुराग ठाकुर !

हिमाचल प्रदेश के चुनाव के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर की पार्टी में तो इमेज ठंडी पड़ गई, पर वे खुद ज्यादा गरम होने लगे। बात-बात पर गुस्सा होना उनकी पुरानी आदत बताई जाती है। वे प्रवासी भारतीय सम्मेलन के लिए दो दिन के लिए इंदौर आए। इसके साथ ही इंदौर के दूरदर्शन केंद्र के निरीक्षण का फरमान जारी हुआ। छुट्टी के बावजूद शनिवार और रविवार को दूरदर्शन केंद्र खोला गया, सारी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई, पर वे नहीं आए।

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स्टाफ को दफ्तर में मौजूद रहने का बकायदा सूचना पत्र जारी किया गया। इस पत्र की खास बात ये है कि स्टाफ से गरिमा के अनुकूल अनुशासन बनाए रखने और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी न करने की अपील की गई। अमूमन ऐसा होता नहीं है कि सूचना पत्र में ऐसी कोई हिदायत दी जाए, पर ऐसा किया गया।

दरअसल, इसके पीछे एक घटना बताई जाती है, जिस वजह से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी न करने की सख्त हिदायत दी गई। यहां तक कि निरीक्षण के दौरान अनावश्यक घूमने या फोटोग्राफी करने पर अनुशासत्मक कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गई।

दरअसल, भोपाल दूरदर्शन केंद्र में ऐसे ही एक निरीक्षण के दौरान अनुराग ठाकुर एक कर्मचारी से गलत ढंग से बात कर रहे थे, जिसका एक कर्मचारी ने वीडियो बना लिया था। बाद में मंत्री जी के गुस्से को देखते हुए वीडियो तो डिलीट करवा दिया गया, पर सभी केंद्रों पर वीडियोग्राफी भी बंद कर दी गई।

मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार की चर्चा
दिल्ली और आस पास इन दिनों कड़ाके की ठंड पड रही है और जोरदार ठंड के बीच सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री उत्तरायण यानी मकर संक्रांति के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार कर सकते हैं। बताया जाता है कि इस उन राज्यों के नेताओं को लिया जा सकता है जहां इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से मनाया जाता है।

PM ने मुख्य सचिवों से लिया फीडबैक
दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों का दो दिवसीय सम्मेलन कयी नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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बताया जाता है कि प्रधानमंत्री ने केंद्र की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में मुख्य सचिवों का फीडबैक लिया और समीक्षा भी की। इस बैठक में केंद्रीय गृह सचिव के अलावा कयी मंत्रालयों के सचिव भी शामिल हुए।

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Suresh Tiwari
सुरेश तिवारी

MEDIAWALA न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक सुरेश तिवारी मीडिया के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है। वे मध्यप्रदेश् शासन के पूर्व जनसंपर्क संचालक और मध्यप्रदेश माध्यम के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहने के साथ ही एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी और प्रखर मीडिया पर्सन हैं। जनसंपर्क विभाग के कार्यकाल के दौरान श्री तिवारी ने जहां समकालीन पत्रकारों से प्रगाढ़ आत्मीय रिश्ते बनाकर सकारात्मक पत्रकारिता के क्षेत्र में महती भूमिका निभाई, वहीं नए पत्रकारों को तैयार कर उन्हें तराशने का काम भी किया। mediawala.in वैसे तो प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खबरों को तेज गति से प्रस्तुत करती है लेकिन मुख्य फोकस पॉलिटिक्स और ब्यूरोक्रेसी की खबरों पर होता है। मीडियावाला पोर्टल पिछले सालों में सोशल मीडिया के क्षेत्र में न सिर्फ मध्यप्रदेश वरन देश में अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब रहा है।