Tuesday, August 20, 2019
छोटा पोस्टर बड़ा धमाका उर्फ कौन बनेगा कांग्रेस अध्यक्ष...

छोटा पोस्टर बड़ा धमाका उर्फ कौन बनेगा कांग्रेस अध्यक्ष...

mediawala.in

 कौन बनेगा करोडपति.. की तर्ज पर हमने कौन बनेगा मुख्यमंत्री... और फिर कौन बनेगा प्रधानमंत्री... जैसे शो पिछले कुछ दिनों में चैनलों पर देखे। अमिताभ बच्चन जी के करोडपति की तलाश कई दफा पूरी हुयी। हमारे मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गये और देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बन गये। मगर ये नहीं मालुम था कि मुख्यमंत्री ओर प्रधानमंत्री की तलाश के बाद कांग्रेस में भी तो पिछले दो महीने से कौन बनेगा कांग्रेस का अध्यक्ष की तलाश चल रही है। नये नये नाम उभर रहे हैं। बहुत सारे नेता उम्मीद से हैं। इसी उम्मीद में एक नाम ब्रेक हुआ हमारे भोपाल से। अचानक सुबह आठ बजे दफतर से फोन आया। यार आपके भोपाल से  कांग्रेस  अध्यक्ष पद के लिये किसी नेता के नाम की लाबिंग की जा रही है। कुछ खबर है आपको। हमने भी सुबह की खुमारी में ही जबाव दिया कि जब पद खाली हो ओर कांग्रेस जैसी लोकतांत्रिक पार्टी हो तो हमारे भोपाल के हाकी खिलाडी ओर कांग्रेस के कई बार अंदर बाहर हो चुके असलम शेर खां से लेकर हमारे वार्ड का सक्रिय पार्षद गुडडू चौहान तक कांग्रेस अध्यक्ष बनने के सपने देख सकता है। गलत क्या है इसमें और फिर जो लाबिंग करने वाला नेता होगा वो बतायेगा थोडे कि भाई हम भी इस पद के लिये लगे हैं जरा टेका लगा देना। हां चला रहे होंगे नाम भोपाल में  कांग्रेस के बहुत सारे काबिल नेता है मगर हुआ क्या है पहले ये तो बताओ।

ज्योतिरादित्य सिंधिया  पोस्टर के लिए इमेज परिणाम

 

भाई खबर ये आ रही है कि कांग्रेस के किसी नेता को कांग्रेस का राष्टीय अध्यक्ष बनाने के लिये पोस्टर वगैरह लग गये हैं। आपके शहर के कांग्रेस दफतर के सामने। उधर हम भी इस खबर में बहुत उत्सुकता नहीं दिखा रहे थे, जबाव में हमने कहा कि हां कांग्रेस दफतर के बाहर एक बडा सा पेड है उस पर बहुत सारे पोस्टर वगैरह लोग टांग जाते हैं या वहां जगह ना मिले तो दफतर की जालियां में पोस्टर फंसा जाते हैं, होगा उनमें किसी ने नेता के नाम का पोस्टर टांग दिया होगा। एक आध दिन पोस्टर टंगा रहता है फिर  कांग्रेस के बहुत सारे गुटों में से कोई दूसरे गुट का कार्यकर्ता उसे रेजर मार कर फाड जायेगा या फिर वो पोस्टर बारिश पानी में भीग कर फट जाता है। बहुत गंभीर मामला नहीं है बाकी मैं देखता हूं। क्या और किसका पोस्टर है ? ये सारी बातें कहकर मैंने सुबह सुबह के दफतरी फरमान से पीछा छुडाया। मगर थोडी देर बाद ही फिर फोन आया कि यार कुछ पता चला कि किसका पोस्टर है और क्या कहा है। अब अपनी समझ में आ गया था कि अब खैर नहीं। इस मामले को जल्दी ही निपटाना पडेगा। थोडी देर बाद ही अपनी यूनिट तैयार कर जब कांग्रेस दफतर पर पहुंचे तो यहां नजारा ही दूसरा था। खोदा पहाड निकली चुहिया की कहावत का अहसास हो रहा था। कांग्रेस   दफतर की लोहे की रेलिंग पर एक छोटा सा दो फुट वाय तीन फुट का छोटा सा पोस्टर  लटका हुआ था। जिसमें राहुल गांधी से अपील की गयी थी कि हमारे देश के गौरव एवं मप्र के वरिश्ट नेता श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को उनके कार्यशैली के अनुरूप राष्टीय नेतृत्व देने की अपील समस्त कार्यकर्ता मप्र  कांग्रेस  कमेटी। हम भी देख कर हैरान थे कि इस छोटे से पोस्टर ने भोपाल से लेकर दिल्ली तक हल्ला मचाया हुआ है। क्योंकि उस पोस्टर के सामने क्षेत्रीय चैनलों के कुछ संवाददाता बंधू भगिनी लगातार वाक थ्रू कर रहे थे और देश और मध्यप्रदेश की राजनीति में उस छोटे से पोस्टर का बडा महत्व समझा रहे थे। समझ में आ गया कि इस पोस्टर केा लगाने वाले ने अपना नाम भले ही नहीं लिखा हो मगर वो अपने मकसद में कामयाब हो गया था।

 

ज्योतिरादित्य सिंधिया  पोस्टर के लिए इमेज परिणाम

ये नन्हा पोस्टर आज की चैनलों की सनसनी थी। आज दिन भर यही पोस्टर लोकल क्षेत्रीय और राष्टीय चैनलों की सुर्खियों और हेडलाइंस में चलना था। वजह थी इसकी टाइमिंग जो इतनी जबरदस्त थी कि राहुल के इस्तीफे के बाद कौन बनेगा कांग्रेस   अध्यक्ष का खुमार गर्माया हुआ है। किसी नेता ने स्वयं आगे आकर अध्यक्ष बनने की मंशा नहीं जतायी है। ऐसे माहौल में सिंधिया के नाम का ये पोस्टर आग में घी का काम कर गया है। हांलाकि पोस्टर को देखकर ये दुख भी हो रहा था कि इस चिंदी से पोस्टर के पीछे कितनी रिपोर्टिंग की प्रतिभाएं परेशान हो रहीं हैं। मगर यही आज की टेलीविजन पत्रकारिता है। उसी वक्त कांग्रेस  दफतर के पोर्च में दफतर इंचार्ज वरिष्ट नेता चंद्रप्रभाष शेखर की गाडी रूकती है। कुछ रिपोर्टर उनके पास पहुंचते हैं मगर ये क्या कांग्रेस  दफतर के बाहर ऐसे पोस्टरों की भीड का हमेशा विरोध करने वाले शेखर इस पोस्टर के पास आकर इसे देखकर नाराजगी जताने की जगह प्रसन्न होकर कहते हैं कि ये कांग्रेस कार्यकर्ताओं का दफतर है और फिर सबको अपनी बात यहाँ  रखने की आजादी है और सिंधिया जी तो हमारे बडे नेता है उनके पोस्टर लगाना कोई अनुशासनहीनता नहीं है। और सुबह का ये पोस्टर दोपहर होते होते बडी खबर बन गया था। विधानसभा में टीवी रिपोर्टर हर बडे  कांग्रेस के नेता विधायक और मंत्री से इस पोस्टर के बारें में पूछ रहे थे। कैमरे के सामने भला किसी को क्यों आपत्ति हो सकती थी, सिंधिया को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने में। बस फिर क्या था रात होते होते क्षेत्रीय चैनलोें में इस छोटे से पोस्टर पर बडी गर्मागर्म बहस हो रहीं थीं। ऐसा लग रहा था कि पूरे मध्यप्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही कांग्रेस का राष्टीय अध्यक्ष बनाने की मांग उठ रही हो और इस पोस्टर के साथ ही कौन बनेगा कांग्रेस   अध्यक्ष की खोज पूरी हो गयी हो। तो ये था छोटे पोस्टर की बड़ी ताकत...मगर हाँ आप इसे न्यूज का दीवालियापन नहीं कहिये .. 

 

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ब्रजेश राजपूत

तकरीबन पच्चीस साल के पत्रकारिता करियर में अधिकतर वक्त टीवी चैनल की रिपोर्टिंग करते हुये गुजारा। सहारा टीवी से होते हुये स्टार न्यूज में जो अब एबीपी न्यूज के नाम से चल रहा है। इसी एबीपी न्यूज चैनल के लिये पंद्रह साल से भोपाल में विशेष संवाददाता। इस दौरान रोजमर्रा की खबरों के अलावा एमपी यूपी उत्तराखंड गुजरात और महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों की रिपार्टिंग कर इन प्रदेशों के चुनावी रंग देखे और जाना कि चुनावी रिपोर्टिग नहीं आसान एक आग का दरिया सा है जिसमें डूब के जाना है। चुनावी रिपोर्टिंग में डूबते उतराने के दौरान मिले अनुभवों के आधार पर अखबारों में लिखे गये लेख, आंकडों और किस्सों के आधार पर किताब चुनाव राजनीति और रिपोर्टिंग मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव २०१३ लिखी है जिसमें देश के पहले आम चुनाव की रोचक जानकारियां भी है।

लेखक टीवी में प्रवेश के पहले दिल्ली और भोपाल के अखबारों में उप संपादक और रिपोर्टर रहे। जैसा कि होता है इस लंबे अंतराल में कुछ इनाम इकराम भी हिस्से आये जिनमें मुंबई प्रेस क्लब का रेड इंक अवार्ड, दिल्ली का मीडिया एक्सीलेंस अवार्ड, देहरादून का यूथ आइकान अवार्ड, मध्यप्रदेश राष्टभाषा प्रचार समिति भोपाल का पत्रकारिता सम्मान, माधवराव सप्रे संग्रहालय का झाबरमल्ल शर्मा अवार्ड और शिवना सम्मान।

पढाई लिखाई एमपी के नरसिंहपुर जिले के करेली कस्बे के सरकारी स्कूल से करने के बाद सागर की डॉ हरिसिंह गौर विश्वविदयालय से बीएससी, एम ए, पत्रकारिता स्नातक और स्नातकोत्तर करने के बाद भोपाल की माखनलाल चतुर्वेदी राष्टीय पत्रकारिता विश्वविघालय से पीएचडी भी कर रखी है।