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दिग्विजय पर टिप्पणी पड़ी भारी: सोशल मीडिया पर पार्टी नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियां करने पर दो महिलाओं को कारण बताओ नोटिस

दिग्विजय पर टिप्पणी पड़ी भारी: सोशल मीडिया पर पार्टी नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियां करने पर दो महिलाओं को कारण बताओ नोटिस

मध्यप्रदेश कांग्रेस में सोशल मीडिया पर पार्टी नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर संगठन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी करने वाली प्रदेश महासचिव और पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी तथा महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका किरार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों को सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

सोशल मीडिया पोस्ट बनी कार्रवाई की वजह
प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कामले की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां की हैं, जो पार्टी की रीति-नीति और संगठनात्मक अनुशासन के अनुरूप नहीं हैं। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दिग्विजय सिंह पर पोस्ट के बाद निधि को नोटिस
3 जुलाई को जारी नोटिस में कहा गया है कि निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी की, पोस्ट में लगाए थे गंभीर आरोप
निधि चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में कहा था कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से कोई असहमति थी तो उसे सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के भीतर उठाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी नेतृत्व कमजोर हुआ और भाजपा को राजनीतिक लाभ मिला।जिससे पार्टी की छवि प्रभावित हुई। संगठन ने इसे अनुशासन के विपरीत मानते हुए सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।
जयवर्धन सिंह को लेकर भी साधा था निशाना
निधि ने यह भी आरोप लगाया था कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहते हैं और इसी वजह से संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से दिग्विजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी।
प्रियंका किरार को भी नोटिस
महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका किरार को भी 2 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आरोप है कि उन्होंने अपने जिला कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जो पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना गया। उनसे भी सात दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। प्रदेश कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों नेताओं का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संगठनात्मक अनुशासन के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।