गोल्डन आवर के 2 ‘राहवीर’: घायल की जान बचाने वाले दोनों युवकों को मिलेगा साझा पुरस्कार  

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गोल्डन आवर के 2 ‘राहवीर’: घायल की जान बचाने वाले दोनों युवकों को मिलेगा साझा पुरस्कार

बड़वानी :मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ पुरस्कार विवाद आखिरकार पुलिस जांच के बाद सुलझ गया। अब घायल युवक की मदद करने वाले दोनों युवकों को “राहवीर योजना” के तहत साझा पुरस्कार दिए जाने की अनुशंसा की गई है।

घटना 6 मई की है, जब मेहगांव डेब गांव के पास एक लोडिंग वाहन ने दवाना निवासी सुनील की बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन बाद में यह विवाद खड़ा हो गया कि घायल को सबसे पहले किसने मदद पहुंचाई और राहवीर योजना का हकदार कौन है।

पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ला ने बताया कि सेमलदा निवासी विकास कुशवाहा ने दावा किया था कि वह घायल सुनील की बाइक के पीछे चल रहा था। हादसे के तुरंत बाद उसने ही घायल को संभाला, वाहन रुकवाया और अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

वहीं वाहन मालिक विकास पटेल का कहना था कि रास्ते से गुजरते समय उसने भीड़ देखी और अपनी गाड़ी रोककर घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि विकास कुशवाहा भी घायल के साथ अस्पताल तक गया था।

मामले में दोनों युवकों के दावे सामने आने के बाद अंजड़ थाना प्रभारी आर.आर. चौहान के माध्यम से जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि “गोल्डन आवर” के दौरान घायल को अस्पताल पहुंचाने में दोनों युवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों को संयुक्त रूप से पुरस्कार दिए जाने की अनुशंसा परिवहन आयुक्त, ग्वालियर को भेजने का निर्णय लिया है।

खास बात यह है कि विकास पटेल पहले भी राहवीर योजना के तहत नामित किए जा चुके हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क हादसों में घायल लोगों की समय पर मदद करने वाले ऐसे नागरिक समाज के लिए प्रेरणा हैं।

राह-वीर (Rah-Veer) योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में घायलों की जान बचाने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

*इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:*

प्रोत्साहन राशि: यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल किसी व्यक्ति को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के 1 घंटे के भीतर) अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाकर उसकी जान बचाता है, तो उसे राज्य सरकार द्वारा ₹25,000 का नकद इनाम दिया जाता है।

प्रशस्ति-पत्र: नकद इनाम के साथ-साथ मददगार को सरकार द्वारा एक सम्मान पत्र भी दिया जाता है।

गोल्डन ऑवर का महत्व: इसका मुख्य उद्देश्य गंभीर रूप से घायल लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा दिलाना है ताकि बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकें।