कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP-11 की इलाज के दौरान मौत

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कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP-11 की इलाज के दौरान मौत

भोपाल। कूनो नेशनल पार्क में भारत में जन्मी 27 महीने की मादा चीता KGP-11 की इलाज के दौरान मौत हो गई है। वह 1 जून को मुरैना जिले के पहाड़गढ़ इलाके के जंगलों में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली थी, जिसके बाद उसे पालपुर स्थित पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया था।

कूनो प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मादा चीता केजीपी-11 एक जून 2026 को मुरैना के पहाड़गढ़ इलाके में घायल अवस्था में मिली थी। जिसे तुरंत रेस्क्यू कर कूनो नेशनल पार्क की पालपुर वेटनरी ट्रीटमेंट सेंटर में इलाज के लिए लाया गया था। लगातार मॉनिटरिंग और इलाज के दौरान भी मादा चीता केजीपी-11 की हालत नाज़ुक बनी हुई थी। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद वेटनरी विशेषज्ञ उसे बचाने में सफल नहीं हो पाए और आखिरकार शनिवार रात को इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई।

केजीपी – 11 गामिनी की शावक की शावक थी। पिछले 1 जून से कूनो नेशनल पार्क के विशेषज्ञों की टीम और फील्ड टीम द्वारा लगातार उपचार किया जा रहा था। मादा चीता के पैर, पीठ, और पेट में आई गंभीर चोट के कारण उसकी मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक चीता का पोस्टमार्टम 7 जून को किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

*महीने भर पहले 4 शावक भी बने थे शिकार*

2026 में चीता की यह पहली मौत नहीं है। इससे पहले 12 मई को भी मादा चीता केजीपी-12 के 1 महीने पहले जन्मे 4 चीता शावकों की मौत हो गई थी। मॉनिटरिंग अमले को इन शावकों के शव विक्षिप्त हालत में मिले थे. आशंका जाहिर की गई थी कि किसी जानवर द्वारा उनका शिकार किया गया था। अब मादा चीता केजीपी-11 के मामले में भी वह किसी जानवर से संघर्ष के चलते घायल हुई थी और आखिर में जिंदगी की जंग हार गई।

*चीता की मृत्यु से जुड़ी मुख्य बातें*

1 जून को रेस्क्यू किए जाने के बाद से ही उसकी हालत नाजुक थी क्योंकि उसके पैर, पीठ और पेट पर गंभीर चोटें आई थीं। कारण: डॉक्टरों का मानना है कि उसे चोटें किसी अन्य जंगली जानवर के हमले या किसी दुर्घटना के कारण लगी थीं। आंकड़े: इस घटना के बाद, कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या घटकर 49 रह गई है।