Uniform Civil Code पर झाबुआ में जनपरामर्श, सभी वर्गों की सहभागिता से बनेगा यूसी का प्रारूप- डॉ. शोभा पैठणकर!

जनजातियों को दायरे से बाहर रखने और महिला अधिकारों पर समानता का सुझाव प्रमुख!

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Uniform Civil Code पर झाबुआ में जनपरामर्श, सभी वर्गों की सहभागिता से बनेगा यूसी का प्रारूप- डॉ. शोभा पैठणकर!

राजेश सोनी की रिपोर्ट!

झाबुआ : मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर रविवार को झाबुआ में जनपरामर्श बैठक हुई। कृषक सभागृह, कृषि विज्ञान केंद्र, राजगढ़ नाका में आयोजित बैठक में उच्च स्तरीय समिति की सदस्य एवं शिक्षाविद् डॉ. शोभा पैठणकर ने जिले के विभिन्न वर्गों से सीधे सुझाव लिए।

*संविधान के अनुच्छेद-44 का सपना!*  

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. पैठणकर ने कहा कि UCC का प्रावधान संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद-44 में है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी संविधान निर्माण के समय इसे लागू करने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण जैसे विषय अभी अलग-अलग पर्सनल लॉ से चल रहे हैं। UCC का मकसद सभी नागरिकों के लिए इन पर एक समान कानूनी व्यवस्था बनाना है, ताकि महिला-पुरुष को बराबर अधिकार मिलें।

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आदिवासी समाज UCC से बाहर?

डॉ. पैठणकर ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित UCC में अनुसूचित जनजातियों को शामिल न करने का प्रावधान विचाराधीन है। बैठक में जनजातीय समाज की विशिष्ट संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं को देखते हुए उन्हें UCC के दायरे से पृथक रखने और उनके लिए अलग कोड बनाने का सुझाव भी प्रमुखता से उठा। प्रतिभागियों ने कहा कि विकास की मुख्यधारा में आदिवासी वर्ग के हित प्रभावित नहीं हों।

कलेक्टर और SP भी हुए शामिल! 

कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि शासन की मंशा सभी वर्गों, समुदायों की राय लेकर नीति बनाना है। उन्होंने जिले के लोगों से अपील की कि जो बैठक में नहीं आ सके, वे http://ucc.mp.gov.in वेबसाइट पर ऑनलाइन सुझाव दें। जनभागीदारी से ही समावेशी कानून बनेगा।

SP देवेन्द्र पाटीदार ने कहा कि समाज में न्याय और समानता के लिए UCC जरूरी है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार में अभी जो असमानताएं हैं, उन्हें दूर कर एकरूप व्यवस्था लाने का प्रयास है।

बैठक में मिले 5 प्रमुख सुझाव! 

विवाह और तलाक के लिए सभी के लिए एक ही कानून, महिला-पुरुष की शादी की उम्र समान हो, महिलाओं को पुरुषों के बराबर संपत्ति का अधिकार मिले, आदिवासी संस्कृति को बचाते हुए उन्हें UCC से बाहर रखा जाए, ऐसे बच्चों के उत्तराधिकार को स्पष्ट और न्यायसंगत बनाया जाए, UCC को समझाने के लिए हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

डॉ. पैठणकर ने कहा कि सभी सुझावों को मिलाकर UCC का प्रारूप तैयार होगा। विधि विभाग की सहमति के बाद इसे विधानसभा में रखा जाएगा। उन्होंने राज्यों में लागू UCC के अनुभवों का अध्ययन करने का भी सुझाव दिया!