फाल्गुन की आहट

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फाल्गुन की आहट 

वंदिता श्रीवास्तव

है सेमल की

कलियां

गदराई हैं

टेसू की कलियां

श्यामल घूंघट से

झांक रही

आम्र बौरे

मुस्कायी हैॅ

गेहूं की बाले

गुनगुनाई है

हां

फाल्गुन की

आहट

आयी है।।

 

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पीत बासंती

खेतो

आंगन मे

सूरज ने

सिंदूरी छटा

फैलायी है

फाल्गुन की

आहट

आयी है।।

 

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कान्हा की

बांसुरी सुन

राधा रानी

यमुना तट

वंशी वट

आयीं हैं

फाल्गुन की

आहट

आयी है

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सांझ ढले

महुआ वृक्ष के

नीचे

ढोल की थाप

से

तन बौराया

है

मन

हर्षाया है

फाल्गुन की

आहट

आयी है।।

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