
अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच का एक अभिनव आयोजन, कहानी संवाद “दो कहानी- दो समीक्षक”
“जीवन मूल्यों को रेखांकित करने वाली कहानी लम्बे समय तक पाठकों को याद रहती है।”
– संतोष श्रीवास्तव
भोपाल ;09 जून, गूगल मीट पर आयोजित किया गया।इस अवसर अध्यक्षता कर रही अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहानी संवाद में पढ़ी गई दोनों कहानियों पर अपनी समीक्षात्मक टिप्पणी देते हुए कहा कि –
“मुझे इस बात का हर्ष है कि कहानी संवाद की यह 51वीं शृंखला है। इस कार्यक्रम में पढ़ी जाने वाली कहानियाँ और कहानियों के बहाने मनुष्य के जीवन मूल्यों पर की जाने वाली चर्चा कहानी संवाद को गंभीर बनाती है। ये सच है कि जीवन मूल्यों को रेखांकित करने वाली कहानी लम्बे समय तक पाठकों को याद रहती है। हम कहानीकारों को चाहिए कि हम अपनी कहानी के स्वयं ही आलोचक बनें। हमें अपनी कहानियां स्वयं दस बार पढ़नी चाहिए। उन शब्दों और उन वाक्यों को हटा देना चाहिए जो बोझिल लगते हों। रचनाकार की अनुभूति और दृष्टिकोण ही कहानी में जान डालता है। आज के दौर में हमें सचेत रहने की आवश्यकता है कि कहानीकार मूल कथा से कहीं भटक न जाय। युवाओं के भटकाव को भी इसे ध्यान में रखना है।”
मुख्य अतिथि डॉ ज्योति गजभिये ने डॉ नीरज कुमार वर्मा की कहानी ‘मुट्ठी भर मिट्टी’ की समीक्षा करते हुए कहा कि –
“‘मुट्ठी भर मिट्टी’, अति आधुनिक युग की कहानी है। इसमें कोई दो राय नहीं की आधुनिक व्यवस्था में मनुष्य की भावनाएं मरती जा रही हैं। महानगरों में जीवन सिमट गया है। आधुनिक समाज व्यवस्था में यदि आपके पास पैसे नहीं हैं तो पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। इस कहानी में प्रकृति का सुन्दर चित्रण है। कहानी की भाषा शैली सटीक है। जो कहानी के परिवेश के अनुकूल है। कहानी की बुनाई बहुत बारीकी से की गई है। कहानी का अंत मन को दुखी करता है। कहानी का पात्र आहान एक बारह साल के बच्चे मिक्की को बचा न सका। ये कहानी बताती है कि आधुनिक समाज में इतने साधन पाकर भी हम कितने खोखले हैं।”
विशिष्ट अतिथि अनामिका सिंह ने कर्नल डॉ गिरजेश सक्सेना की कहानी ‘त्रिशंका’ की विवेचना कथा तत्वों के आधार पर करते हुए कहा कि –
“‘त्रिशंका’ कहानी का कथानक बाल मनोविज्ञान पर आधारित है। यह केवल पति-पत्नी की तलाक की कहानी नहीं है बल्कि तलाक के उपरांत परिवार में उपजी समस्याओं को रेखंकित करती है। यदि पति-पत्नी आपसी अनबन के कारण तलाक लेते भी हैं तो उन्हें बच्चों की परवरिश का संयुक्त दायित्व उठाना चाहिए। क्या कारण है कि पीढ़ियाँ बदल जाती हैं लेकिन बच्चों की समस्याएं ज्यों की त्यों बनी रहती हैं। आज के दौर में ये ज़रूर है कि आधुनिक समाज का निर्माण ऐसा हो कि वह समाज को व्यवस्थित भी रखे। केवल प्रेम ही वैवाहिक जीवन की सफलता की गारंटी नहीं हो सकता। गिरजेश जी की कहानी, कथा के तत्वों पर खरी उतरती है।”
दोनों कहानियों में कहीं न कहीं मनुष्य के जीवन के दर्शन होते हैं। इन्हीं जीवन मूल्यों पर कुछ श्रोताओं ने भी अपने विचार रखे। इनमें वरिष्ठ उपन्यासकार राज बोहरे, कहानीकार मीनाक्षी दुबे, वरिष्ठ कहानीकार रानी मोटवानी, अक्षरा पत्रिका की संपादक जया केतकी शर्मा, वरिष्ठ कहानीकार डॉ प्रमिला वर्मा भी शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की मुम्बई इकाई की निदेशक सत्यवती मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया तो महाराष्ट्र मंच की अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार मृदुला मिश्रा ने सभी का आत्मीय आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश इकाई के महासचिव मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी ने किया।
कहानी संवाद के इस कार्यक्रम में देश-विदेश से अनेक साहित्यकार, पत्रकार एवं कथाकार अंत तक मौजूद रहे।
प्रस्तुति – मुज़फ्फर सिद्दीकी





