
हुड़दंग न हो सके, इसलिए होली से पहले ही बजट सत्र स्थगित…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मध्य प्रदेश विधान सभा का बजट सत्र 27 फरवरी 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बजट सत्र के अंतिम दिन विपक्ष के विधायक का शीर्षासन देखने को मिला। इससे यह सामने आ गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा रामदेव के साथ शीर्षासन कर सुर्खियां बटोरी थीं तो विपक्ष के विधायक बाबू जंडेल ने सरकारी भेदभाव से त्रस्त होकर विधानसभा परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने शीर्षासन कर न केवल सुर्खियाँ बटोरी बल्कि यह बता दिया है कि सोलहवीं विधानसभा में पक्ष विपक्ष में शीर्षासन करने वाले सदस्यों की कमी नहीं है। हो सकता है कि शीर्षासन करने वाले और भी विधायक धीरे-धीरे सामने आ जाएँ और विधानसभा सत्र पूर्ण होने से पहले पक्ष-विपक्ष के बीच कोई शीर्षासन प्रतियोगिता ही आयोजित हो जाए। क्योंकि हर विधानसभा चुनाव के पहले तो नेता मतदाताओं के सामने साम,दाम,दंड,भेद सभी तरह से शीर्षासन करते ही हैं लेकिन इस बार
असली शीर्षासन करने पर ही जनता वोट देने को राजी हो। माना यह भी जा रहा है कि वैसे तो 12 में से 10 बैठकें होने के बाद ही विधानसभा के बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया है, लेकिन इन दो दिनों में विपक्ष ज्यादा हुड़दंग करने की तैयारी में था इसलिए भी सदन को दो बैठकें पहले ही होली के नाम पर स्थगित कर हुड़दंग से बचना ही उचित समझा गया। हालांकि, फिर भी तारीफ की बात है कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के नेतृत्व में विधानसभा सत्र ज्यादा व्यवस्थित, अनुशासित और समय का बेहतर उपयोग करता नजर आ रहा है।
इस विधान सभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात शब्द ने कुछ ज्यादा ही घायल कर दिया है।मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की समाप्ति पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का दर्द सामने आ ही गया। सिंघार ने सदन समाप्ति पर यह बयान जारी किया कि विधान सभा बजट सत्र 2026 भाजपा द्वारा जनता को “औकात” दिखाने के लिए याद रखा जाएगा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा जब हमने इंदौर में जहरीले पानी से 35 लोगों की मौत पर सवाल किया तो, जवाबदेही के बजाए, औकात याद दिलाई गई। जब हमने स्वच्छ जल जैसे विषय पर चर्चा के लिए अनुरोध किया तो सरकार ने विपक्ष के नेताओं को जनता से जुड़े मुद्दे पर सवाल करने पर औकात याद दिलाई। जब हमने कैग रिपोर्ट में उजागर हुए भारी भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग की तो सरकार ने विपक्ष और जनता को औकात दिखाई। चाहे सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, सरकार और उससे जुड़े लोग हर रोज आम प्रदेशवासी को उसकी औकात याद दिला रहे हैं। यही कहा जा सकता है कि भगोरिया के रंग में नेता प्रतिपक्ष उमंग के साथ इस औकात शब्द को अपने दिल और दिमाग से बाहर कर सकें, यही कामना है। सदन के रिकॉर्ड से विलोपित किए गए इस शब्द के लिए भी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से हुई चूक के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माफी माँगने में कोई संकोच नहीं किया था। खुद कैलाश विजयवर्गीय ने भी इसे भूल स्वीकार किया था। ऐसे में उमंग सिंघार को भी बड़ा दिल रखते हुए ऐसा कोई वाकया अपने मन से निकाल बाहर फेंक देना ही चाहिए।
खैर मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र खत्म हो गया, जिसमें 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक है। सत्र में स्वास्थ्य, किसानों, महिलाओं और शहरी विकास से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बजट में गरीबों, महिलाओं, युवाओं, किसानों, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया।समापन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 16 वीं विधानसभा के इस नवें सत्र में कुल 10 बैठकें आयोजित हुईं, जिनमें विधायी और वित्तीय कार्यों के साथ जनहित से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। साथ ही सदन की कार्यवाही के दौरान इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पिलाने से हुई मौतों, सिंगरौली में आदिवासियों के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। अंतिम दिन कांग्रेस विधायक ने शीर्षासन कर अनोखे तरीके से विरोध जता कर सबका ध्यान खींचा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पर नौ घंटे से अधिक चर्चा हुई, जबकि बजट पर सामान्य चर्चा लगभग दो घंटे चली। सदन की कार्यवाही लगभग 62 घंटे तक चली। अध्यक्ष तोमर ने बताया कि सत्र के दौरान वर्ष 2026-27 आय-व्ययक, साथ ही वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक मांगों को भी सदन की स्वीकृति मिली। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण बताते हुए कहा कि इससे सरकार की योजनाओं और नीतियों को संवैधानिक आधार प्राप्त हुआ है। इस दौरान कई जनहित से जुड़ी योजनाओं की घोषणा और नई पहल की शुरुआत भी हुई।
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विस के बजट सत्र की समाप्ति पर कहा कि कार्यमंत्रणा समिति में जो कार्यसूची तय की गई थी, उसे पूरी तरह सदन में संपन्न किया गया। निर्धारित एजेंडे के लगभग 100 प्रतिशत विषयों पर चर्चा की गई, जो अपने आप में महत्वपूर्ण है। मंत्री के अनुसार, सत्र के दौरान 7 हजार से अधिक प्रश्न पूछे गए, जिनमें बड़ी संख्या में विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाए। यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों ने जनता की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अंत में उन्होंने बजट सत्र को बहुत ही फलदायी बताया।
सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले विपक्ष ने अध्यक्ष से चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि विभागों की अनुदान मांगों पर अभी चर्चा बाकी है। सदस्य संबंधित विभागों की तैयारी करके आए है। उन्होंने सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाने और चर्चा कराने की मांग की। 16 फरवरी से शुरू हुए विधानसभा के बजट सत्र में 12 बैठकें प्रस्तावित थीं। इसमें 5 और 6 मार्च को भी बैठक होना थी, लेकिन 27 फरवरी को ही सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्र के समय से पहले खत्म होने पर कड़ा एतराज जताया। विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों, खासकर कानून-व्यवस्था और किसानों की समस्याओं पर चर्चा से बचना चाहती थी और इसलिए सत्र को जल्दबाजी में खत्म किया गया।
विपक्ष के आरोप बता रहे हैं कि अगर दो बैठक पहले ही सदन स्थगित न किया जाता तो हो सकता है सदन में ही शीर्षासन देखने को मिल सकता था। कौन करता और क्यों करता यह फिलहाल काल्पनिक है। पर हुड़दंग न हो इसलिए होली के पहले ही मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र
अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





