यह नीतीश कुमार का सोचा-समझा फैसला है…

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यह नीतीश कुमार का सोचा-समझा फैसला है…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

बिहार की राजनीति में करवट ले रही है। लम्बे अरसे बाद बिहार के लोगों को

नया चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाला है। इस बीच यह चर्चा बहुत जोरों से चल रही है कि नीतीश कुमार पर यह फैसला थोपा गया है। हालांकि दूसरे नजरिए से देखा जाए तो राजनीति के धुरंधर नीतीश कुमार ने शायद जीवन में हर फैसला बहुत ही सोच समझकर किया है और उनका यह फैसला भी पूरी तरह से सोच समझकर लिया गया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। उनकी पार्टी के कई लोग चाहते थे कि मुख्यमंत्री राज्यसभा नहीं जाएं, लेकिन नीतीश कुमार ने स्वयं ट्वीट कर यह निर्णय लिया। नीतीश कुमार तीनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं और अब उन्होंने राज्यसभा के सदस्य बनने के लिए नामांकन दाखिल किया है। करीब 21 साल बिहार की सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तैयारी के बाद जेडीयू में सियासी उथल-पुथल तेज हो गया है। नीतीश कुमार के बाद जनता दल यूनाइटेड की बागडोर कौन संभालेगा इसको लेकर राजनीति तेज है और सब की निगाहें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की पॉलीटिकल एंट्री पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली होते ही पार्टी नए नेतृत्व को लेकर असमंजस में है, और इसी असमंजस ने पार्टी के अंदर अविश्वास और टूट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। ऐसे में निशांत के उत्तराधिकारी बनने की संभावनाएँ उतनी ही ज्यादा बढ़ गईं हैं। जेडीयू की दूसरी कतार के जिन नेताओं के नाम चर्चा में है उसमें पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह, नीतीश कुमार के करीबी और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी और विजय चौधरी शामिल हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि इन चारों चेहरों में से कोई भी अगर पार्टी का नेतृत्व करेगा तो इससे पार्टी के अंदर गुटबाजी बढ़ेगी और पार्टी में टूट का खतरा है क्योंकि इस बात की आशंका है कि जनता दल यूनाइटेड के ग्राउंड पर काम करने वाले नेता और कार्यकर्ता इन चार चेहरों में से किसी को भी नेता मानने से इनकार कर दें और पार्टी टूट की कगार पर पहुंच सकती है। ऐसे में अब नया दृश्य जो दिखने वाला है उसमें पिता नीतीश कुमार केन्द्र में सत्ता की सवारी करेंगे और पुत्र निशांत बिहार को संभालने की तरफ आगे बढ़ेंगे।

बिहार की राजनीति में जहां लालू यादव का परिवार बिखरा बिखरा नजर आ रहा है। वहाँ पर नीतीश कुमार अपनी सफल पारी के बाद यदि बेटे को उत्तराधिकारी बनाने में सफल हो रहे हैं, तो यह उनकी सोची समझी रणनीति का ही परिणाम है। विधानसभा चुनाव के पहले अगर वह यही फैसला लेना चाहते तो शायद किसी को मंजूर नहीं होता। लेकिन नितिन नवीन के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नीतीश कुमार द्वारा लिया गया यह फैसला दोनों ही दलों के लिए जीत की नई इबारत लिख रहा है। नीतीश कुमार का केंद्र में जाना यह बता रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका तय कर ली गई है। वहीं, बिहार की राजनीति में उनके बेटे निशांत की धमाकेदार पारी शुरू होना तय है। नीतीश कुमार की बराबरी पर शायद ही कोई राजनेता पहुँच पाएगा, जो लंबे समय तक मुख्यमंत्री भी रहे, केंद्रीय मंत्री भी रहे और अपने मन के मुताबिक, फैसला लेते हुए राजनीति के शिखर पर लगातार रह पाए… ऐसे में पुत्र को बिहार में उत्तराधिकारी बनाते हुए केंद्र में कमान संभालने का नीतीश कुमार का फैसला सोचा समझा और बुद्धिमत्ता से भरा नजर आ रहा है।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।