रूस पर अमेरिका का शक, तीसरे विश्व युद्ध होने का बड़ा संकेत…

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रूस पर अमेरिका का शक, तीसरे विश्व युद्ध होने का बड़ा संकेत…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध को सात दिन पूरे हो गए हैं। सात दिन का मतलब एक सप्ताह और इसका मतलब अब साफ है कि दो-तीन दिनों में युद्ध के खत्म होने की संभावना जताने वाले लोगों को निराशा ही हाथ लगी है। अब यह युद्ध सप्ताहों में बदलने जा रहा है। यह सप्ताह सालों में भी बदल सकते हैं। और फिलहाल तीन देशों का यह युद्ध तीसरे विश्वयुद्ध में भी तब्दील हो सकता है। इसका बड़ा संकेत अमेरिका ने ही दिया है। अमेरिका ने रूस पर ईरान को खुफिया इनपुट देने का शक जाहिर किया है। और इससे साफ जाहिर हो रहा है कि निकट भविष्य में रूस अगर ईरान की खुलेआम मदद करता है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। और एक बार रूस खुलकर सामने आया तो तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो जाएगा। अमेरिका ने अगर एक बार शक जाहिर कर दिया है, तो अब गेंद रूस के पाले में ही है। और जिस तरह रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका की बड़ी भूमिका रही है, उसके बाद रूस के फैसले को लेकर कुछ भी संशय करने का सवाल नहीं बचता है। ट्रंप ने भी राष्ट्रपति बनने के बाद रूस के खिलाफ दादागिरी करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। ऐसे में ईरान के बहाने महाशक्तियाँ सिर्फ और सिर्फ सही अवसर की तलाश में ही शांत नजर आ रही हैं। क्योंकि यह बात सभी को मालूम है कि ट्रंप के पागलपन से कोई नहीं बच सकता है। ऐसे में ज्यादा आशंका यही है कि युद्ध की विभीषिका पूरी दुनिया को अपने आगोश में लेने को तैयार है।

अमेरिका का बड़ा दावा यही है कि ईरान को यूएस आर्मी और फाइटर जेट्स की खुफिया इनपुट रूस दे रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ईरान को अमेरिकी सेना से जुड़ी अहम टारगेटिंग इंटेलिजेंस मुहैया करा रहा है। इसमें अमेरिकी वॉरशिप और एयरक्राफ्ट की लोकेशन तक शामिल बताई जा रही है। और अमेरिका की बात पर भरोसा किया जाए तो बड़ा संकेत यही है कि ईरान के जरिए रूस अब निर्णायक भूमिका निभाने को पूरी तरह से तैयार है। और रूस ने कदम आगे बढ़ाये तो चीन भी ईरान की आड़ में अमेरिका से बदला लेने के लिए रूस का साथ देने से पीछे हटने वाला नहीं है।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक अमेरिकी रिपोर्ट ने यह दावा कर सनसनी फैला दी है कि रूस ईरान को खुफिया इनपुट दे रहा है। इससे ईरान अमेरिकी सेना को आसानी से निशाना बनाने में सफल हो रहा है। इसमें अमेरिकी वॉरशिप और सैन्य एयरक्राफ्ट की लोकेशन जैसी अहम डिटेल्स भी शामिल हैं। इससे ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने और हमलों की योजना बनाने में मदद मिल रही है। ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने ईरान को अमेरिकी सैन्य संसाधनों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी देना शुरू कर दिया है। रूस की ओर से की जा रही मदद काफी बड़े स्तर पर होती हुई दिखाई दे रही है, जो चिंता का विषय है। हालिया हमलों में कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और रडार जैसे अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया है, इससे रूस पर अमेरिका का शक गहरा रहा है।

रूस की सैन्य क्षमता पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास सीमित सैन्य उपग्रह हैं। उसका अपना बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क नहीं है। ऐसे में रूस की उन्नत स्पेस और निगरानी तकनीक से मिलने वाली जानकारी ईरान के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहयोग जारी रहा तो मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष खतरनाक रूप ले सकता है। और इस खतरनाक शब्द का मतलब तीसरे युद्ध की आशंका से ही है।

तो अमेरिका और इजरायल के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव सातवें दिन भी जारी है। 28 फरवरी 2026, शनिवार को ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में हमले किए। इस हमले के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। जिसके बाद ईरान ने इजरायल समेत एक साथ कई खाड़ी देशों में मिसाइलों की बौछारें करनी शुरू कर दी, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान में किए हमले का शुक्रवार यानी 6 मार्च 2026 को सातवां दिन था। सातवें दिन भी मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता ही जा रहा है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकार का सवाल बना हुआ है। क्योंकि खामनेई के बेटे मोजतबा के पद संभालने वाली बात अमेरिका को रास नहीं आ रही है। ट्रंप ने कहा, “हम ऐसा व्यक्ति चाहते हैं जो ईरान में सद्भाव और शांति लाए।” ट्रंप ने स्पष्ट रूप से मोजतबा को एक अस्वीकार्य विकल्प बताया। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने हजारों अमेरिकी सैनिकों को मारने और बंदी बनाने की धमकी देते हुए कहा कि ईरानी सेना संभावित अमेरिकी जमीनी आक्रमण की प्रतीक्षा कर रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत करने का कोई कारण नहीं है, और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

तो यही भरोसा ट्रंप ने तोड़ा है। ट्रंप ने ईरान ही नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर देशों का भरोसा तोड़ा है। और जब अमेरिका, रूस पर शक कर रहा है, तो अब सुलह की गुंजाइश खत्म हो चुकी है और बदले की आग में पूरी दुनिया के देश तीसरे विश्व की विभीषिका में झुलसते, जलते और खाक होते नजर आएँ तो कोई बड़ी आश्चर्य की बात नहीं है। हम बहुत पहले से ट्रंप के पागलपन की बात कर रहे हैं और तीसरे विश्व युद्ध की आशंका भी जता रहे हैं। और ट्रंप के इसी पागलपन ने अब पूरी दुनिया को मुसीबत में डाल दिया है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।