IAS अफसरों का भी हो फॉलोअप- क्या थे और अब क्या हो गए!

28

IAS अफसरों का भी हो फॉलोअप- क्या थे और अब क्या हो गए!

   उमेश चतुर्वेदी  की ख़ास रिपोर्ट 

627692858 4248637842052260 372757956134129667 n 1

• यूपी के एक अफसर थे..आईएएस अफसर..उनके पिता हल चलाते थे..सवर्णों का हल चलाना सही नहीं माना जाता था..उस दौर में भी हल जोतते रहे..अपने बेटे को पढ़ाया..गर्व का उन्हें बोध हुआ..होना भी चाहिए..पिता का जब देहांत हुआ..बेटे अपने राज्य के एक निगम के सीएमडी थे..अफसर बेटे ने पिता का बहुत ही दमदार श्राद्ध किया..बेटे जिस निगम के सीएमडी थे, वह कपड़े बनाता था..श्राद्ध के दिन दान देने के लिए ट्रकों में भरकर उस निगम के कपड़े आए और बांटे गए..
• एक मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के बारे में कहा जाता है कि कम से कम वे दस हजार करोड़ के आदमी हैं..
• हर राज्य के कुछ बेहतर शहर हैं..उस शहर की सबसे पॉश कॉलोनी में सबसे ज्यादा घर उस राज्य के अधिकारियों के ही हैं, विशेषकर आईएएस अफसरों के..
Untitled ff6353
एक बार सिविल सेवा के अफसर बन गए..समझो आपका परिभ्रमण पथ बदल गया..पूरा आभामंडल ही बदल जाता है..यही वजह है कि अफसर बनने के पीछे नई पीढ़ी भाग रही है..विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे उत्तरभारतीय हिंदी भाषी राज्यों की..
अफसरों को लेकर इस लेख के पहले भाग में जो उदाहरण दिए गए हैं, उनसे उनकी ताकत और ऐश्वर्य का आभास खूब होता है..दुनिया इसी पर लहालोट होती है। लेकिन यह तय है कि उनके इस ऐश्वर्य के पीछे उनकी तनख्वाह से मिली रकम नहीं, बल्कि उपरी कमाई है। उपरी कमाई यानी भ्रष्टाचार..आईएएस अधिकारियों को देना होगा अचल संपत्ति का ब्यौरा - ias officers will have to give details of immovable property - Navbharat Times
समाज और राजनीति को देखिए, वे भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं, उसे मुद्दा बनाते हैं..लेकिन भ्रष्टाचार का महिमामंडन भी करने से नहीं हिचकते..अफसरों के पीछे समाज और राजनीति का दौड़ना भ्रष्टाचार के महिमामंडन का ही उदाहरण है..
राजनीति चाहे राज्यों की हो या फिर देश की..रिटायरमेंट के बाद भी अफसरों के पुनर्वास का पूरा इंतजाम है..निगम, आयोग, राज्य सभा, राज्यपाल, जैसे उनके लिए ही बने हैं..पेंशन के साथ ये सहूलियतें भी उन्हें मिलती हैं..पद भी मिलते हैं और सेवा विस्तार भी..हासिल करने वालों की लिस्ट में भी अग्रणी नामों में ज्यादातर वे हैं, जिन्होंने अपने वेतन के अलावा अकूत माल बनाया है..उनका माल बनाना ही उनकी सबसे बड़ी योग्यता है..
आज मीडिया भी अफसरशाही पर ही लहालोट है..हर साल आने वाले यूपीएससी के नतीजों के बाद मेरिट में आगे रहने वाले लोगों, आईएएस बनने वाले छात्रों के गुणगान में मीडिया रस्मी तौर पर जुट जाता है..उन्हें महान प्रतिभाएँ साबित करने लगता है..करना भी चाहिए..लेकिन ध्यान रहे, सिर्फ आईएएस ही समाज की प्रतिभा नहीं होते.
आईआईएमसी में हमें खबरों के फॉलोअप के बारे में बताया गया था..फॉलोअप इन अफसरों का भी होना चाहिए…फॉलोअप यह कि उन्होंने यूपीएससी में इंटरव्यू के दौरान भावी नौकरी के दौरान किस तरह के आदर्श फॉलो करने के दावे किए थे, और पांच या दस साल बाद वे क्या कर रहे हैं..
फॉलोअप यह भी होना चाहिए कि अफसर बनने से पहले उनकी पारिवारिक और माली हालत कैसी थी और सर्विस में विशेषकर अहम पद पर पांच-दस साल गुजारने के बाद उनका रहन-सहन, उनका बैंक बैलेंस, उनकी संपत्ति कितनी है..यह जानकारी स्वतंत्र एजेंसी के जरिए हासिल की जानी चाहिए..
तब पता चलेगा कि ये अफसर हमारे समाज के कैसे नायक हैं..कितने भले हैं और उनके पीछे की अपनी दुनिया कैसी है..
सवाल यह है कि टीवी एंकरों और आईएएस को ही नायक मानने वाले दौर में इस तरह कितने लोग सोचते हैं भला.
उमेश चतुर्वेदी  वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।उन्होंने दो दशकों से अधिक समय से विभिन्न मीडिया संस्थानों में अपनी सेवा दी है. संप्रति, आकाशवाणी में कार्यरत हैं और विभिन्न अखबारों में संपादकीय टिप्पणी लिखते हैं.