EOW Trap: 15 हजार की रिश्वत लेते सरपंच रंगे हाथों गिरफ्तार

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EOW Trap: 15 हजार की रिश्वत लेते सरपंच रंगे हाथों गिरफ्तार

सिवनी : आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) जबलपुर की टीम ने सिवनी जिले में एक सरपंच को ₹15000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

EOW से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में आवेदक शिवचरण नागवंशी पिता नंदकुमार नागवंशी उम्र 40 साल निवासी, जान्हवी नगर, चुनाभट्टी के पास, ग्राम पलारी, सिवनी, जिला सिवनी है और आरोपी रामगोपाल डेहरिया पिता स्व.बसोड़ीलाल डेहरिया उम्र 32 वर्ष सरपंच, ग्राम पंचायत पलारी सिवनी, जिला सिवनी है।

घटना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रार्थी शिवचरण नागवंशी जान्हवी नगर चुनाभट्टी के पास ग्राम पलारी सिवनी द्वारा दिनांक 02-03.2026 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ जबलपुर में शिकायत आवेदन दिया कि प्रार्थी की ग्राम पलारी में पिछले 4-5 साल से टपरिया बनाकर रह रहा है, इसके अलावा रहने की कोई जगह नही है। अपनी टपरिया में कुछ सुधार कार्य कराने के लिये गांव के सरपंच राम गोपाल डेहरिया ने 15000/-रुपये की मांग की थी। शिकायत का सत्यापन किये जाने पर आरोपी द्वारा 15000/-रुपये की रिश्वत की मांग सही पायी गयी।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर की टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए सिवनी जिले के ग्राम पंचायत पलारी के सरपंच रामगोपाल डेहरिया को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी सरपंच ने गांव के ही एक गरीब ग्रामीण से उसकी टपरिया (झोपड़ी) सुधारने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

मामला इस प्रकार है कि ग्राम पलारी निवासी शिवचरण नागवंशी (40 वर्ष) पिछले कई वर्षों से टपरिया बनाकर रह रहे हैं। उनके पास रहने के लिए इसके अलावा कोई अन्य स्थान नहीं है। जब शिवचरण ने अपनी जर्जर टपरिया में सुधार कार्य शुरू करना चाहा, तो सरपंच रामगोपाल डेहरिया ने काम न रोकने के बदले 15,000 रुपये की मांग की। सरपंच की प्रताड़ना से तंग आकर प्रार्थी ने 23 फरवरी 2026 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी।

EOW द्वारा शिकायत का सत्यापन करने पर रिश्वत की मांग सही पाई गई । सोमवार, 9 मार्च 2026 को ट्रैप दल ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए सरपंच को सिवनी बस स्टैण्ड पर रंगे हाथों दबोच लिया । टीम ने सरपंच के पास से रिश्वत की राशि बरामद कर ली है।

आरोपी सरपंच के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।