
उनकी आँखों में आँखें डालकर देखो
डाॅ. मुरलीधर चाँदनीवाला

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उनकी आँखों में आँखें डालकर देखो,
देखो कि तुमने भविष्य उजाड़ कर रख दिया है।
देखो कि तुमने उस चिरागदान को बुझा दिया,
जिसके चारों तरफ खड़ी बेटियाँ
आँचल में उजाला भर रही थीं तुम्हारे लिये।
देखो उनकी आँखों में आँखें डालकर,
देखो कि तुम अपने ही खिलाफ खड़े हो।
देखो कि इतने सारे क्रूर अभिशाप
अब तुम्हारी ओर ही कूच कर रहे हैं।
तुम कंस दिखाई दे रहे हो उनकी आँखों में,
तुम सींग हिलाते हिंसक पशु की तरह
उतरे हुए हो उनकी पत्थर हो चुकी आँखों में।
देखो उनकी आँखों में आँखें डालकर,
ममताएँ बिलख-बिलख रो रही हैं।
देखो, कितना सारा मोम पिघल रहा है,
देखो, दहाड़ मार कर रो रहा आसमान।
तुम्हें अपना ही खूँखार चेहरा दिखाई देगा वहाँ,
तुम ही दिखाई दोगे
अंधेरे से बनाये गये उस पुतले की तरह,
जिसके दम्भ से भरे अट्टहास को सुनकर
धरती के रोयें-रोयें उठे हुए हैं।
देखो कि तुम उनके हाथों से
किताबें लेकर भागते चले जा रहे हो,
और उनकी शुद्ध आत्माएँ पीछे पड़ गई हैं
तुम्हारे अहंकार को कुचलने के लिये।
देखो उनकी आँखों में आँखें डालकर,
कोई अज्ञात देवपुरुष लेटा हुआ देख रहा है तुम्हें।
अभी वह मुस्कुरा रहा है जरूर,
किन्तु वह बेटियों के ध्वंस का बदला लेने के लिये।
देखना, उन आँखों में देखना,
उसका चक्र तुम्हारी ओर बढ़ रहा है शनै:शनै:।
भविष्य के खिलाफ साजिश से बड़ा
और कौन सा महापातक है इस धरा पर?
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