
संख्या बल के सामने खारिज होना अविश्वास प्रस्ताव की नियति ही है…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को ध्वनिमत से गिर गया। हालांकि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान काफी हंगामा भी देखने को मिला। पर अंततः जो तय था वह होना ही था और संख्या बल के सामने अविश्वास का प्रस्ताव नतमस्तक होकर गिर गया। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का यह चौथा मामला था। पहले लोकसभा अध्यक्ष से लेकर अठारहवें लोकसभा अध्यक्ष तक अविश्वास प्रस्ताव की यही नियति रही है कि मैं आऊंगा पर संख्या बल के सामने गिरकर लौट जाऊँगा। पर यह भी जताकर जाऊंगा कि संख्या बल के चलते भले ही आप कुर्सी पर बैठे रहें, लेकिन आपकी निष्पक्षता पर संदेह के बादल हमेशा मंडराते रहेंगे। और इतिहास गवाही देगा कि विपक्ष की भावनाओं को समुचित सम्मान को स्थान नहीं दिया गया। हो सकता है कि अटल बिहारी वाजपेयी अगर स्पीकर की कुर्सी पर बैठे होते और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता तो वह यही कहते कि अविश्वास के ऐसे माहौल में मैं कुर्सी पर कतई नहीं बैठ सकता। और वह उसी तरह कुर्सी से दूर हो जाते जिस तरह संख्याबल न होने से उन्होंने प्रधानमंत्री पद को त्यागने में एक पल का भी समय नहीं लिया था। खैर, राजनीति में अटल जैसे आदर्श की बातें अब इतिहास बन गई हैं।
प्रथम लोकसभा स्पीकर जी. वी. मावलंकर (गणेश वासुदेव मावलंकर) के खिलाफ दिसंबर 1954 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। यह प्रस्ताव उन पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए सोशलिस्ट पार्टी और अन्य विपक्ष द्वारा पेश किया गया था, जो अंततः विफल रहा। यह प्रस्ताव दिसंबर 1954 को मावलंकर के खिलाफ समाजवादी नेता विग्नेश्वर मिश्रा द्वारा लाया गया था।
लोकसभा अध्यक्ष सरदार हुकुम सिंह के खिलाफ नवंबर 1966 को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। यह प्रस्ताव बिहार से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सांसद मधु लिमये द्वारा पेश किया गया था, लेकिन आवश्यक 50 सदस्यों के समर्थन की कमी के कारण यह प्रस्ताव पेश ही नहीं हो सका।
तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ अप्रैल 1987 को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। यह प्रस्ताव सीपीएम सांसद सोमनाथ चटर्जी द्वारा पेश किया गया था, लेकिन संख्या बल की कमी के कारण यह पारित नहीं हो सका और खारिज कर दिया गया।
और अब इसी कड़ी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का नाम शामिल हो गया है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही बहस के दौरान बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से इस सदन में 27 अविश्वास प्रस्ताव और 11 विश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं। यह अविश्वास प्रस्ताव ऐसा है कि न तो जनता ने और न ही सदन ने प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास व्यक्त किया है। यह अविश्वास प्रस्ताव केवल जनता में भ्रम पैदा करने के लिए लाया गया है और यह जनता की भावनाओं को भी प्रतिबिंबित नहीं करता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता है। यह सदन भारत के लोगों की अभिव्यक्ति है। यह सदन किसी एक पार्टी का नहीं है, यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है। जब भी हम बोलने के लिए उठते हैं, हमें बोलने से रोक दिया जाता है। पिछली बार जब मैंने बात की थी, तब मैंने हमारे प्रधानमंत्री के किए गए समझौतों के बारे में एक बुनियादी सवाल उठाया था। कई बार मुझे बोलने से रोका गया है। पहली बार लोकसभा के इतिहास में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया है।
तो सच बात यह है कि स्पीकर का झुकाव सत्ताधारी दल की तरफ होना स्वाभाविक है, लेकिन विपक्ष भी यह चाहता है कि नेता प्रतिपक्ष की उपेक्षा न की जाए। मान-अपमान के दो पाटों के बीच से अविश्वास रूपी जो परिणाम सामने आता है, संख्या बल के सामने खारिज होना अविश्वास प्रस्ताव की नियति ही है…, लेकिन उसे सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





