ट्रकों की जांच में पकड़ाई 106 करोड़ की अवैध बिलिंग, इस्पात कंपनी के संचालक समेत 4 गिरफ्तार

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ट्रकों की जांच में पकड़ाई 106 करोड़ की अवैध बिलिंग, इस्पात कंपनी के संचालक समेत 4 गिरफ्तार

महासमुंद। जिले की पुलिस ने दो ट्रकों की जांच में 106 करोड़ रुपए से अधिक के एक संगठित आर्थिक अपराध का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक यह मामला सिर्फ खनिज चोरी का नहीं, बल्कि फर्जी शेल कंपनियों, जाली इनवॉयसिंग और करोड़ों के हवाला लेन-देन का है, जो छग और ओडिशा के बीच फैला हुआ था। पुलिस ने रायगढ़ इस्पात कंपनी के संचालक समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि 25 फरवरी को पुलिस को इनपुट मिला था कि ट्रक सीजी 04 जेसी 4585 और सीजी 07 एवी 5290 में अवैध रूप से स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। नाकाबंदी कर जब ट्रकों को रोका गया तो ड्राइवर सोनूलाल और रामेश्वर कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके। गिरफ्तार आरोपीरंजीत सिंह, निवासी बरगढ़ से पूछताछ में पता चला कि यह पूरा गिरोह एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहा थापूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा शेल कंपनियों को लेकर हुआ है। पुलिस को पता चला है कि तारक घोष और रंजीत ने अपने यहां काम करने वाले 3 कर्मचारियों के नाम पर फर्जी कंपनियां खोल रखी थीं। इन्हें पता भी नहीं था कि उनके नाम करोड़ों का टर्नओवर दिखाया जा रहा है। डिजिटल साक्ष्यों से स्पष्ट है कि यह नेटवर्क छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमाओं के पार फैला हुआ है।फर्जी कंपनियों की लंबी है फेहरिस्त
पुलिस के मुताबिक आने वाले दिनों में कई नई कंपनियों और रसूखदार आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना है। इस सिंडिकेट में कई नामी-गिरामी इस्पात कंपनियां और बिचौलिए रडार पर हैं। फर्जी बिलिंग के जरिए सरकार को करोड़ों के राजस्व की हेराफेरी की गई है। जिसकी जांच की जा रही है।

*विशेष जांच दल का किया गठन*
इस मामले की गंभीरता और करोड़ों के वित्तीय घोटाले को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस ने अब तक मुख्य आरोपी तारक घोष निवासी शांति विद्या कालोनी माझापारा रैताराई रायगढ़, रंजीत सिंह ओडिशा और दोनों ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके खिलाफ बसना थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं 318-4, 316-4, 317-2, 336-2, 338, 340, 3-5 के तहत जुर्म दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी चोरी के माल को ओडिशा के लोहराचट्टी (सोहेला) में बने गुप्त गोदामों में भंडारण करते थे। रायगढ़ की एक बड़ी इस्पात कंपनी का संचालक तारक घोष इस काले कारोबार का मुख्य सूत्रधार निकला। वह बिना किसी वास्तविक खनिज की खरीद-बिक्री के फर्म के नाम पर फर्जी बिल जारी करता था। इन फर्जी बिलों के दम पर चोरी के स्पंज आयरन को वैध माल बताकर रायगढ़ से रायपुर की बड़ी कंपनियों को सप्लाई किया जाता था। कागजों पर सब कुछ कानूनी दिखता था, जबकि ट्रक असल में ओडिशा के अवैध ठिकानों से माल लोड कर रहे थे।पुलिस की मानें तो अब तक की जांच में 106 करोड़ रुपए से अधिक के फर्जी ट्रांजैक्शन के सबूत मिले हैं। इसके अलावा पुलिस को भारी-को व्यापार का काला पैसा गुप्त रास्तों से सफेद किया जा रहा था। एडिशनल एसपी प्रतिभा पांडेय ने बताया कि मामले में अन्य पहलुओं की जांच के लिए 5 सदस्यीय एक विशेष टीम गठित की गई है। इनमें 3 टीआई एक एसआई और एक सब इंस्पेक्टर शामिल हैं।