विजयपुर के रण में सभी घायल हैं…

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विजयपुर के रण में सभी घायल हैं…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट ने इन दिनों विधायक मुकेश मल्होत्रा को भले ही राहत की सांस लेने का अवसर दे दिया हो, लेकिन हालात वही हैं कि वह अब सिर्फ नाम के विधायक रह गए हैं। वह राज्यसभा के चुनाव में मतदान भी नहीं कर सकेंगे और वेतन भत्तों से भी दूर रहेंगे। यानी कि विधान सभा में बैठने का उनका अधिकार कायम है जब तक सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला नहीं सुनाता। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की फिलहाल सारी खुशियां छीन ली हैं। रामनिवास रावत ने तो मन बना ही लिया था कि अब वह जल्दी ही विधानसभा में प्रवेश कर

फिर से मंत्री पद हासिल कर लेंगे। पर शायद हिंदू नववर्ष रामनिवास रावत के लिए फलदायी साबित नहीं हुआ है। हिंदू नववर्ष के पहले दिन ही राम निवास की खुशियों को लगी ठोकर

ने उनका दिल तो तोड़ ही दिया होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर हाई कोर्ट का फैसला पलटकर फिलहाल मुकेश मल्होत्रा को विधायक बने रहने का अधिकार लौटा दिया है। विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर 19 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर हाई कोर्ट का फैसला पलटा। कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद बड़ा फैसला दिया। शीर्ष कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से मुकेश मल्होत्रा की विधायकी बरकरार रखने का आदेश सुनाया। इस फैसले से बीजेपी के रामनिवास रावत को करारा झटका लगा है। क्योंकि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में मुकेश मल्होत्रा से विधायकी छीनकर रामनिवास रावत के पक्ष में फैसला दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर की हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था। हाई कोर्ट ने क्रिमिनल केस छिपाने के चलते मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा को राहत दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के बारे में कुछ पाबंदियां रखने के भी आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मुकेश मल्होत्रा विधायक तो रहेंगे लेकिन सदन की किसी प्रक्रिया में मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देगा, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ता नहीं मिलेगा। विजयपुर विधानसभा सीट के चुनाव के परिणाम को लेकर पूर्व वन मंत्री एवं पूर्व विधायक रामनिवास रावत ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

तो हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विजयपुर विधायक की याचिका पर 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी।

अगली सुनवाई जुलाई में होगी। मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास ने अपनी पार्टी बदल ली थी। मुकेश मल्होत्रा ने कांग्रेस का दामन थामा था। मुकेश पहले में बीजेपी में थे। बीजेपी ने उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाया था। वहीं, रामनिवास रावत भी एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। 2024 लोकसभा चुनाव में रामनिवास रावत ने भाजपा ज्वाइन की थी। इसके बाद उन्हें वन विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मल्होत्रा ने वीडियो जारी कर कहा कि वे कोर्ट के सम्मानजनक फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्हें क्षेत्र की जनता का लगातार प्यार और आशीर्वाद मिलता रहा है।

उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूर्व विधायक राम निवास रावत द्वारा लगाए गए केस छुपाने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। मल्होत्रा ने साफ कहा कि उन्होंने कोई भी मामला नहीं छुपाया है और इसके प्रमाण भी पेश कर सकते हैं।

मल्होत्रा ने आगे कहा कि भले ही उन्हें विधायक निधि नहीं मिलेगी, लेकिन वे क्षेत्र के विकास के लिए लगातार संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि जनता की सेवा और विकास उनका पहला लक्ष्य है और वे हर परिस्थिति में अपने क्षेत्र के साथ खड़े रहेंगे।

फिलहाल, यही माना जा सकता है कि विजयपुर के रण में निर्णायक जीत किसी की भी नहीं हुई है। मुकेश मल्होत्रा को हाईकोर्ट ने विधायकी से दूर कर दिया था तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब वह आधे अधूरे विधायक रह गए हैं। और यह भी किसी को नहीं पता कि कल के दिन सुप्रीम कोर्ट अंतिम रूप से क्या फैसला देने वाला है? कुल मिलाकर विजयपुर के रण में सभी घायल हैं… राम निवास रावत को विधायकी मिल पाएगी…यह तय नहीं है, तो मुकेश मल्होत्रा की विधायकी बच पाएगी…यह भी फिलहाल तय नहीं है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।