गड्ढों में ‘लकड़ी का अलर्ट:प्रधानमंत्री सड़क बदहाल, 4 फीट गहरे गड्ढे… हादसों से बचाने ग्रामीणों ने लगाया देसी संकेतक

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गड्ढों में ‘लकड़ी का अलर्ट:प्रधानमंत्री सड़क बदहाल, 4 फीट गहरे गड्ढे… हादसों से बचाने ग्रामीणों ने लगाया देसी संकेतक

अमझेरा से गोपाल खंडेलवाल की विशेष रिपोर्ट 

“यह सड़क है या खतरे का रास्ता?” — अमझेरा से मागोद (फतेपुरा) तक बनी प्रधानमंत्री सड़क की हालत आज यही सवाल खड़ा कर रही है। करोड़ों की लागत से बनी यह सड़क अब जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक गहरी नींद में है। हालात इतने बिगड़ गए कि ग्रामीणों को खुद गड्ढों में लकड़ी गढ़ गाड़ कर संकेतक बनाना पड़ा, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो।

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करीब 2 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से वर्ष 2018 में बनी इस सड़क का मेंटेनेंस 5 साल तक ठेकेदार के पास था। अवधि खत्म होने के बाद इसकी जिम्मेदारी विभाग पर आई, लेकिन पिछले दो वर्षों से सड़क की हालत लगातार बिगड़ती गई। अब स्थिति यह है कि कई जगह 3 से 4 फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं और सड़क की गिट्टी उखड़कर बिखर गई है।

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“देसी जुगाड़ से बचाई जा रही जान”

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने अनोखा तरीका अपनाया—गहरे गड्ढों में लकड़ी लगाकर ‘अलर्ट सिग्नल’ बना दिया। यह संकेतक वाहन चालकों को दूर से ही खतरे का अंदाजा दे रहा है। सवाल यह है कि क्या सड़क सुरक्षा अब ग्रामीणों की जिम्मेदारी रह गई है?

“शिकायतें सैकड़ों, कार्रवाई शून्य “

स्थानीय किसान कृष्ण शैलेंद्र सिंह कछावा के अनुसार, सड़क की जर्जर हालत और गड्ढों को लेकर विभाग के एसडीओ को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। न तो मरम्मत हुई और न ही अस्थायी सुधार।

“अधूरा निर्माण, और बढ़ा खतरा”

विभाग ने नाली निर्माण के लिए सड़क को एक साल पहले खोदा था, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया। अब वहां मिट्टी का ढेर पड़ा है, जो दुर्घटना को न्योता दे रहा है। बरसात में यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है।

कनेक्टिविटी पर असर, 5 किमी का अतिरिक्त चक्कर

यह सड़क अमझेरा के रत्नेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर फतेपुरा हनुमान मंदिर होते हुए मागोद तक जाती है और आगे मनावर स्टेट हाईवे व इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे (NH-47) से जुड़ती है। सड़क खराब होने से अब लोगों को 5 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आना-जाना पड़ रहा है।

“किसानों में आक्रोश”

ग्रामीण और किसान अब खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह सड़क उनके रोजमर्रा के आवागमन और खेती-किसानी का मुख्य मार्ग है। खराब सड़क के कारण समय, ईंधन और सुरक्षा—तीनों पर असर पड़ रहा है।

बड़ा सवाल:

जब करोड़ों की सड़क दो साल में दम तोड़ दे और शिकायतों के बाद भी सुधार न हो, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा?

मामले को लेकर एस डी ओ डी एस कोहली से फोन संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं किया