भागीरथपुरा त्रासदी के बाद वाकई यह इंदौर के इतिहास का स्वर्णिम दिन था…

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भागीरथपुरा त्रासदी के बाद वाकई यह इंदौर के इतिहास का स्वर्णिम दिन था…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मार्च 2026 का अंतिम रविवार इंदौर के इतिहास में स्वर्णिम दिन के रूप में दर्ज हो गया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण का भूमि-पूजन किया। भागीरथपुरा त्रासदी के बाद इंदौर में जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस भूमि-पूजन में साथ-साथ दिखाई दिए, तब निश्चित तौर से विजयवर्गीय समर्थकों की आंखें खुशी से नम हो गई होंगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की उपस्थिति में मोदी की मन की बात सुनने के बाद

मोहन-कैलाश का लगातार साथ साथ रहना शायद इतिहास ही बना रहा था। ऐसा लगा मानो पिछले दिनों मेयर को हेलीकॉप्टर में इंदौर से भोपाल तक साथ लाए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डैमेज कंट्रोल कर एक बार फिर कैलाश के साथ संबंधों को नई ऊर्जा दे दी है। बाकी मोहन के मन की बात तो सिर्फ वही समझ सकते हैं। पर मुद्दे की बात यही है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर शहर को पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिये मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के तहत अमृत 2.0 योजना में 1356 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमि-पूजन कर इंदौर को स्वर्णिम सौगात दी है। जिसे शब्दों में अभिव्यक्ति देते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज का दिन इंदौर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। यह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वर्णिम भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि विजयवर्गीय ने यहाँ भी मन मैं डॉ. मोहन यादव के नाम को लेकर कंजूसी ही बरती। तो शायद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मन भी पूरी तरह से कैलाशमय नहीं हो पाया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा है और उनके आशीर्वाद से मध्यप्रदेश में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भी होलकर साम्राज्य ने मां नर्मदा के आशीर्वाद से कठिन परिस्थितियों में सनातन संस्कृति को सशक्त बनाए रखा और देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर घाट, धर्मशालाएं एवं अन्नक्षेत्र विकसित किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा परियोजनाओं को नई गति मिली है। सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से गुजरात, राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र सहित व्यापक भू-भाग में जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे कृषि, उद्योग एवं पेयजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे इंदौर शहर के लिए आगामी 25 वर्षों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समग्र योजना बनाई गई है, जिससे क्षेत्र में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि शहर के विकास के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2040 तक इंदौर की अनुमानित 65 लाख जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की अग्रिम तैयारी करना नगर निगम की दूरदर्शिता का प्रतीक है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि नर्मदा परियोजना का इतिहास संघर्ष और संकल्प से भरा हुआ है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के उस ऐतिहासिक क्षण को याद किया जब नर्मदा परियोजना के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था। उस समय वैज्ञानिकों ने इंदौर तक नर्मदा जल लाने की चुनौती को असंभव बताया था, लेकिन इंजीनियर्स और विशेषज्ञों के प्रयासों से यह संभव हो सका। यह देश की एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नर्मदा जल अत्यंत मूल्यवान है और इसे व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। जल संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है और इसका सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इंदौर के सतत विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नर्मदा के चतुर्थ चरण के भूमिपूजन कार्यक्रम को इंदौर के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल वर्तमान, बल्कि भविष्य के इंदौर की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। और इस योजना के माध्यम से वर्ष 2045 तक इंदौर की जल आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चौथे चरण के पूर्ण होने पर वर्ष 2029 तक 900 एमएलडी पानी इंदौर पहुंचेगा, जिससे लगभग 65 लाख नागरिकों को जलापूर्ति सुनिश्चित होगी। यह योजना शहर के औद्योगिक विकास और “हरित इंदौर” के विजन को भी सशक्त बनाएगी।

तो बाकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन इंदौर इसी तरह विकास करता रहे और यहां के नागरिकों को पेयजल सहित सभी मूलभूत जरूरतों की समुचित आपूर्ति होती रहे, यही कामना है। भागीरथपुरा त्रासदी के बाद वाकई मां नर्मदा जल के चतुर्थ चरण के तहत अमृत 2.0 योजना का भूमिपूजन इंदौर के इतिहास का स्वर्णिम दिन था…।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।