High Court Verdict: भोजशाला-मां वाग्देवी का मंदिर – मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ अदा करने का अधिकार समाप्त, जानिए आदेश की बड़ी बातें

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High Court Verdict: भोजशाला- मां वाग्देवी का मंदिर – मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ अदा करने का अधिकार समाप्त, जानिए आदेश की बड़ी बातें

जानिये हाईकोर्ट में प्रस्तुत ASI रिपोर्ट के प्रमुख  बिंदु

इंदौर: धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला मामले में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते कहा कि यह मां वाग्देवी का मंदिर हैं। इसी के साथ हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूरे परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया। मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ अदा करने का अधिकार समाप्त किया गया।

कोर्ट के आदेश के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं

भोजशाला को संरक्षित स्मारक (Protected Monument) घोषित किया गया।
कोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना।
हिंदू पक्ष को पूरे परिसर में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया।
मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ अदा करने का अधिकार समाप्त किया गया।
परिसर का प्रबंधन और नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन रहेगा।
भारत सरकार को यूके के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने संबंधी आवेदन पर विचार करने के निर्देश दिए गए।
मुस्लिम समुदाय को सरकार के समक्ष अन्य उपयुक्त भूमि आवंटन के लिए आवेदन देने की अनुमति दी गई।

फैसले के बाद धार और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि 2022 में हिंदू फ्रंट फार जस्टिस और भोज उत्सव समिति से जुड़े पक्षकारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर परिसर के मूल स्वरूप की वैज्ञानिक जांच की मांग की। याचिका में एएसआई सर्वे, खुदाई और धार्मिक अधिकार तय करने की मांग शामिल थी।हाई कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया। इसमें पुरातत्वविद, तकनीकी विशेषज्ञ और संरचना विश्लेषक शामिल रहे।

सर्वे टीम का नेतृत्व एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने किया। रिपोर्ट 10 वाल्यूम में अदालत में पेश की गई।एएसआई रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत अभिलेखों का जिक्र किया गया है। इनमें कई अभिलेख नागरी लिपि में बताए गए हैं और उनका संबंध परमार शासकों से जोड़ा गया। रिपोर्ट के अनुसार ये अभिलेख अरबी-फारसी लेखों से पुराने हैं।

एएसआई की 2000 से अधिक पेज की रिपोर्ट में परिसर में मंदिर शैली के अवशेष, मूर्तियां, स्तंभ, शिलालेख और स्थापत्य सामग्री मिलने का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि वर्तमान ढांचे में पूर्ववर्ती संरचनाओं के हिस्सों का उपयोग हुआ। सर्वे के दौरान वैज्ञानिक तकनीकों, खुदाई और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार का उपयोग किया गया।

एएसआई रिपोर्ट के प्रमुख  बिंदु
  • परिसर में परमारकालीन विशाल संरचना होने के संकेत।
  • 106 स्तंभ और 82 पिलास्टर मंदिर संरचनाओं से जुड़े बताए गए।
  • संस्कृत और प्राकृत शिलालेख अरबी-फारसी अभिलेखों से पुराने बताए गए।
  • कई मूर्तियों और आकृतियों को क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलने का उल्लेख।
  • रिपोर्ट में कहा गया कि बाद की संरचना जल्दबाजी में बनाई गई प्रतीत होती है।