
पन्ना टाइगर रिजर्व में नर बाघ की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद
गणेश पांडे की रिपोर्ट
भोपाल : पन्ना टाइगर रिजर्व में मंगलवार सुबह एक नर बाघ का शव मिला है। शव कंकाल की स्थिति में मिलने से बाघ की मौत लगभग 10 दिन पूर्व होने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रथम दृष्ट्या बाघ की मौत संदिग्ध परिस्थतियों में होना प्रतीत होता है।
घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत आने वाली कटरिया बीट के वन कक्ष क्रमांक पी-278 की है।
क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव एवं उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल को घटना की जानकारी लगते ही मौके पहुंचे थे। एक स्थानीय व्यक्ति ने जानकारी देते हुए बताया कि, बाघ की मौत मनौर-मझगवां (हिनौता) मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर जंगल में हुई है। मृत बाघ पूर्ण वयस्क बताया जा रहा है, जिसकी आयु लगभग 5-6 वर्ष हो सकती है।
सतत निगरानी की खुली पोल
इस घटना का सबसे चिंताजनक और विचारणीय पहलू यह है, पन्ना पार्क क्षेत्र में वन एवं वन्यजीवों की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और सतत सघन निगरानी का दावा करने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की पोल खुल गई। मेल टाइगर (नर बाघ) की संदिग्ध मौत की भनक कई दिनों तक तक प्रबंधन को नहीं लगी। मुख्य मार्ग किनारे चंद कदम की दूरी पर प्रचंड गर्मी में लगभग 10 दिन तक बाघ का शव सड़ता रहा लेकिन संबंधित बीट गार्ड, सर्किल प्रभारी और रेंजर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को इसका पता नहीं चल सका। बाघ का शव कंकाल की हालत में मिलना पार्क प्रबंधन के निगरानी व्यवस्था से जुड़े दावों को खोखला साबित करता है। जबकि पार्क के हिनौता स्थित प्रवेश द्वारा तक जाने वाले इस मार्ग से होकर पीटीआर के अधिकारी और मैदानी अमला प्रतिदिन कई बार गुजरता है लेकिन किसी को भी बाघ के सड़ते शव की दुर्गन्ध महसूस नहीं हुई।
महुआ बीनने वाले ग्रामीण ने दी जानकारी
सूत्र बताते हैं कि महुआ संग्रहण करने वाले एक ग्रामीण के द्वारा वन अमले को जंगल में टाइगर का शव मिलने की सूचना दी गई। कुछ देर बाद जैसे ही यह खबर फैली तो पन्ना टाइगर रिजर्व के नाकार और भ्रष्ट प्रबंधन में आंतरिक खलबली मच गई।





