
Big Medical Achievement: 70 वर्षीय बुजुर्ग के कटे हाथ को दोबारा जोड़ा, Aims डॉक्टरों को मिली सफलता
रायपुर : Big Medical Achievement: रायपुर के ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के डॉक्टरों ने 70 वर्षीय बुजुर्ग के कटे हाथ को दोबारा जोड़ कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज रायपुर के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट विशेषज्ञता का परिचय देते हुए एक 70 वर्षीय बुजुर्ग के कटे हुए हाथ को सफलतापूर्वक दोबारा जोड़कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह जटिल सर्जरी न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीक की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि समय पर सही उपचार की अहमियत को भी उजागर करती है।मिली जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग का बायां हाथ धान की भूसी निकालने वाली मशीन की चलती बेल्ट में फंस गया था। हादसा इतना गंभीर था कि हाथ कोहनी के पास से शरीर से पूरी तरह अलग हो गया।
बताया गया है कि घटना के तुरंत बाद परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए कटे हुए हाथ को बर्फ से ढके एक सुरक्षित कंटेनर में रखा और मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया। यह कदम सर्जरी की सफलता में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
हादसे के करीब दो घंटे के भीतर मरीज को एम्स रायपुर लाया गया, जहां उसे स्थिर कर तत्काल इमरजेंसी सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. जितेन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में करीब आठ घंटे तक चली यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि हाथ में गंभीर एवल्शन इंजरी के चलते हड्डियां, नसें और मांसपेशियां कई स्तरों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं।हड्डियों का जुड़ाव: ऑर्थोपेडिक टीम ने डॉ. संदीप नेमा के नेतृत्व में हड्डियों को छोटा कर उन्हें सफलतापूर्वक फिक्स किया।
नसों की माइक्रो-सर्जरी: प्लास्टिक सर्जरी टीम (डॉ. शमेंद्र आनंद साहू, डॉ. जलाज, डॉ. अविजित, डॉ. धरणी और डॉ. संजना) ने सूक्ष्म तकनीक के माध्यम से धमनियों और नसों को जोड़कर हाथ में रक्त संचार बहाल किया।
ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखने में एनेस्थीसिया टीम की अहम भूमिका रही।
रिकवरी की राह पर मरीज सर्जरी के बाद मरीज को लगातार निगरानी में रखा गया। लगभग एक महीने तक अस्पताल में उपचार के बाद अब दोबारा जोड़े गए हाथ में रक्त प्रवाह सामान्य पाया गया है और घाव लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, आने वाले दो महीनों में हड्डियां पूरी तरह जुड़ने की उम्मीद है, जबकि हाथ की कार्यक्षमता को बहाल करने के लिए लंबे समय तक फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों ने ऐसे मामलों में शुरुआती छह घंटे को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि कटा हुआ अंग छह घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच जाए और उसे सीधे बर्फ में रखने के बजाय किसी साफ, सूखी थैली में बंद कर बर्फ के संपर्क में (ठंडा) रखा जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने की संभावना काफी बढ़ जाती है।यह सफल ऑपरेशन न केवल एम्स रायपुर की चिकित्सा दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में समय पर उठाए गए सही कदम किसी की जिंदगी बदल सकते हैं।





