मुस्लिम महिलाओं के बीच पैठ बनाने की तैयारी में कांग्रेस , प्रोजेक्ट M के जरिए साधने की कोशिश

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मुस्लिम महिलाओं के बीच पैठ बनाने की तैयारी में कांग्रेस , प्रोजेक्ट M के जरिए साधने की कोशिश

भोपाल: प्रदेश में अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस ने अब एक ऐसे वर्ग पर फोकस किया है, जो राजनीति की मुख्यधारा से लंबे समय से दूर रहा है। भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रोजेक्ट M के जरिए पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब मुस्लिम महिलाओं के बीच अपनी गहरी पैठ बनाने की तैयारी में है।

हाशिये से नेतृत्व तक की थीम पर आधारित इस पहल का सीधा मकसद मुस्लिम समाज की उन महिलाओं को आगे लाना है, जो शिक्षित हैं, जागरूक हैं और अपने दम पर समाज में बदलाव ला रही हैं।

इस बैठक में बौद्ध, जैन और सिख समाज की भी महिलाएं हैं, लेकिन इनकी संख्या उंगलियों पर गिननी वाली है।

इस अभियान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस इस बार पुराने चेहरों के बजाय अल्प संख्यक वर्ग की उन महिलाओं को तवज्जो दे रही है जिनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। पार्टी ने विशेष रूप से उन महिलाओं को चुना है जो एनजीओ चलाती हैं, छोटे-बड़े व्यापार से जुड़ी हैं या पेशेवर क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

कांग्रेस का मानना है कि ये महिलाएं समाज में एक इन्फ्लुएंसर की भूमिका निभाती हैं। पार्टी ने इन महिलाओं से सीधे तौर पर अपील की है कि वे न केवल कांग्रेस से जुड़ें, बल्कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर समाज की अन्य मुस्लिम महिलाओं को भी पार्टी की विचारधारा और मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ने की कड़ी बनें।

कार्यक्रम का अंदाज भी किसी पारंपरिक राजनीतिक बैठक जैसा नहीं है, बल्कि आधुनिक और कॉपोर्रेट स्टाइल का है। राउंड टेबल सेटअप के जरिए महिलाओं को एक ऐसा मंच दिया गया जहां वे बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुद इन महिलाओं के बीच बैठकर चर्चा कर रहे हैं और उन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि आज की राजनीति में उनके नेतृत्व की कितनी जरूरत है। कांग्रेस ने हाशिये से नेतृत्व तक के लिए गूगल फार्म से आवेदन बुलाए थे, कुल 86 आवेदन मिले, जिसमें से 56 महिलाओं को इसके लिए चुना गया।

*दो दशक से शून्य रही भागीदारी* 

दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस में मुस्लिम महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पिछले दो दशकों से लगभग शून्य रही है। साल 2003 के बाद से पार्टी ने किसी भी मुस्लिम महिला को विधानसभा के चुनावी मैदान में नहीं उतारा है। वर्ष 2003 में कांग्रेस ने विदिशा जिले की सिरोंज से डॉ. मसर्रत शाहिद को टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सकी थी।