सोमनाथ को साक्षी मानकर हम सब संकल्प लें कि ‘सोना’ नहीं खरीदेंगे और ‘तेल’ बचाएंगे…

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सोमनाथ को साक्षी मानकर हम सब संकल्प लें कि ‘सोना’ नहीं खरीदेंगे और ‘तेल’ बचाएंगे…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास के उद्घाटन के मौके पर देश से 24 घंटे के भीतर दूसरी बार वैश्विक संकट का जिक्र किया है। मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया लगातार अस्थिर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहले कोरोना का संकट, फिर वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, और अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव। इन सारी परिस्थितियों का असर लगातार पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।मोदी ने कहा कि मेरी देश के हर नागरिक से अपील है कि जहां तक संभव हो, पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें। मेट्रो का उपयोग करें, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करें, कार पुलिंग को बढ़ावा दें। जिनके पास कार है, वो एक गाड़ी में ज्यादा लोगों को साथ लेकर चलें। डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब इतना कुछ आसान बना दिया है कि टेक्नोलॉजी की मदद भी हमारे लिए बहुत फायदेमंद होगी। ये जरूरी है कि सरकारी और प्राइवेट दोनों ही दफ्तरों में वर्चुअल मिटिंग्स और वर्क फ्रॉम होम की प्राथमिकता दी जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इतना इशारा ही काफी है। भले ही यह आसार बहुत पहले बन गए हों, लेकिन 5 राज्यों के चुनाव के चलते लोगों में यह संदेश नहीं जाने दिया गया ताकि मतदाता भ्रमित न हो सकें। पर अब चुनाव परिणाम सामने हैं और वैश्विक परिस्थितियों के चलते सोने और डीजल-पेट्रोल को लेकर पानी सिर के ऊपर से बहने लगा है। सो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से यह अपील करने में देर नहीं की है। 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में सत्ता का महा हस्तांतरण सम्पन्न हुआ और 10 मई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हकीकत देशवासियों के सामने रख दी।उन्होंने कहा कि अगर कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, तो पश्चिम एशिया में युद्ध से बनी परिस्थितियां, इस दशक के बड़े संकटों में से एक है। जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया तो इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे। सरकार भी लगातार ये प्रयास कर रही है, कि देश के लोगों पर इसका कम से कम असर हो। पीएम ने कहा कि सोने की आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। इसलिए, मैं आप सभी से, देशवासियों से आग्रह करूंगा कि जब तक हालात सामान्य न हो, हम सोने की खरीद को टालें। आज समय की मांग है कि हम ‘वोकल फॉर लोकल’ को एक जन-आंदोलन बनाएं। विदेशी सामान की जगह, लोकल उत्पादों को अपनाएं। अपने गांव, अपने शहर, अपने देश के उद्यमियों को ताकत दें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से यह मार्मिक अपील गुजरात यात्रा के दौरान की है। यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर को भगवान सदाशिव की “दिव्य लीला” बताया और मंदिर से अपने लंबे आध्यात्मिक जुड़ाव को याद किया।मोदी सोमनाथ अमृत महोत्सव को संबोधित कर रहे थे, जो गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल में भगवान शिव को समर्पित पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 साल पूरे होने का जश्न है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 मई 2026 को सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।

सोमनाथ अमृत महोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर को भगवान सदाशिव की “दिव्य लीला” बताया और मंदिर से अपने लंबे आध्यात्मिक जुड़ाव को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भगवान महादेव की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने का उत्सव मना रहा है और सोमनाथ अमृत महोत्सव को भक्ति, संघर्ष और निरंतरता का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा, “समय भी उनकी इच्छा से चलता है। जो काल से परे हैं और जो स्वयं काल का स्वरूप हैं, आज हम उसी देवों के देव महादेव की प्रतिमा प्रतिष्ठा के 75 साल मना रहे हैं। यह पूरा ब्रह्मांड उन्हीं से बना है और अंत में उन्हीं में विलीन हो जाता है। आज हम उनके पवित्र धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जिन्होंने हलाहल पीकर नीलकंठ का रूप लिया, उन्हीं की कृपा से आज सोमनाथ अमृत महोत्सव हो रहा है।”

तो मूल बात यही है कि अब भारत के सभी नागरिकों को नीलकंठ का रूप धारण कर सोने की खरीदी पर नियंत्रण करने और तेल का कम इस्तेमाल करने का संकल्प लेना ही पड़ेगा। वरना यदि युद्ध चलता रहा, तो त्राहिमाम त्राहिमाम होना तो तय है। इससे अच्छा है कि सोमनाथ को साक्षी मानकर यह संकल्प ले लिया जाए कि ना हम सोना खरीदेंगे और न ही डीजल पेट्रोल तेल का उपयोग करेंगे। तभी हम भारत के लोग

एक बेहतर ज़िन्दगी जीने के प्रति आश्वस्त हो पाएंगे।

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।