Small Denomination Currency Crisis Deepens : रतलाम में छोटे नोटों का संकट गहराया, खुल्ले रुपए के लिए व्यापारी, आमजन परेशान!

बैंकों में भी छुट्टे का टोटा, नए नोटों की कालाबाजारी के आरोप! बैंककर्मियों के वर्ताव से परेशान छोटे व्यवसायी! छोटे नोटों की किल्लत पर रमेश सोनी की खास खबर!

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Small Denomination Currency Crisis Deepens : रतलाम में छोटे नोटों का संकट गहराया, खुल्ले रुपए के लिए व्यापारी, आमजन परेशान!

Ratlam : देशभर में छोटे नोटों और खुले पैसों की किल्लत की चर्चाओं के बीच अब रतलाम शहर भी इस समस्या से अछूता नहीं रहा है। शहर के बाजारों में ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के छोटे नोट लगभग गायब होते जा रहें हैं। इसका सीधा असर रोजमर्रा के व्यापार, ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा हैं। स्थिति यह हैं कि दुकानदारों को ग्राहकों को खुले पैसे लौटाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं आम नागरिक भी छुट्टे पैसों के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में छोटे नोटों की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। कई दुकानदार ग्राहकों को चॉकलेट, टॉफी या अन्य सामान देकर हिसाब बराबर करने पर मजबूर हैं। खासकर सब्जी विक्रेता, किराना दुकानदार, पेट्रोल पंप संचालक, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

बैंकों में भी नहीं मिल रहें खुले नोट!

शहर के कई राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में भी खुले नोटों की भारी कमी बताई जा रही है। बैंक शाखाओं में पहुंचने वाले ग्राहकों को “छोटे नोट उपलब्ध नहीं हैं” कहकर वापस लौटाया जा रहा है। कई लोगों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी आम नागरिकों से ठीक व्यवहार नहीं करते और खुले नोट मांगने पर टालमटोल करते हैं।

कुछ व्यापारियों का कहना है कि बैंक अधिकारियों और चुनिंदा व्यापारियों की मिलीभगत से छोटे नोटों की जमाखोरी की जा रही है। आरोप है कि खुले नोट जरूरतमंद आम लोगों तक पहुंचने के बजाय चुनिंदा लोगों को कमीशन या अतिरिक्त राशि लेकर उपलब्ध कराए जा रहें हैं।

नए नोटों की कालाबाजारी के आरोप!

रतलाम में नए नोटों की कालाबाजारी की चर्चाएं भी तेजी से फैल रही हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ लोग ₹100, ₹200 और ₹500 के नए नोट बंडलों में उपलब्ध कराने के नाम पर अतिरिक्त पैसे वसूल रहे हैं। बताया जा रहा है कि बाजार में नए नोटों की सप्लाई सीमित होने के कारण कुछ लोग इसका अनुचित लाभ उठा रहें हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बाजार व्यवस्था और प्रभावित हो सकती है। शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों के चलते छोटे नोटों की मांग और बढ़ गई है, लेकिन आपूर्ति बेहद कम है।

आमजनों में बढ़ रहा आक्रोश!

आम नागरिकों का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद छोटे नोटों की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग, छोटे दुकानदार और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग आज भी नकद लेनदेन पर निर्भर हैं। ऐसे में खुले पैसों की कमी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। कई उपभोक्ताओं ने प्रशासन और रिजर्व बैंक से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि बैंकों में छोटे नोटों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और यदि कालाबाजारी हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

प्रशासन से कार्रवाई की उठी मांग!

शहर के व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, बैंक प्रबंधन और संबंधित विभागों से मांग की है कि छोटे नोटों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही बैंक कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार और नोटों की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की भी मांग उठने लगी है।

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रतलाम के बाजारों में इन दिनों खुले पैसों का संकट सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाला बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती हैं!

क्या कहते हैं व्यापारी!

खुल्ले रुपए का संकट गहराता जा रहा हैं बाजार में व्यापारियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी परेशान होते देखा जा रहा हैं। बैंक अधिकारियों से बात करते हैं तो वह कहते हैं कि उपर से छोटे नोट नहीं आ रहें हैं तो हम क्या करें, जिला प्रशासन को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए, ताकि नोटों संबंधित क्राइसिस कम हो सकें।

आनन्द त्रिलोकचंदानी

सर्वानंद बाजार!

हमार रिटेल काउंटर हैं और हर खरीदारी में ग्राहकों द्वारा दिए जाने वाले नोटों के बदले में रेजगारी के अभाव में हमे परेशान होना पड़ता हैं बैंक अधिकारियों द्वारा सही ढंग से वर्ताव नहीं किया जाता हैं समूचे शहर के व्यापारी और ग्राहकों को परेशान होना पड़ रहा हैं प्रशासन को ऐसे में सहयोग करने की दरकार हैं!

रतिन व्या!

व्यापारी!

हमारी किराने की दुकान है और हमें प्रतिदिन छुट्टे रुपयों के फेर में ग्राहकी छोड़ना पड़ रही हैं यह समस्या विकराल रूप ले चुकी हैं जिला प्रशासन को इस समस्या को हल करना चाहिए!

विरेन्द्र सिंह राजपूत!