सिंघार की गुहार…वेट ही हटा दो सरकार…

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सिंघार की गुहार…वेट ही हटा दो सरकार…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने आम-आदमी को परेशानी में डाल दिया है। तेल कंपनियों ने लगातार पांचवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी कर दी है। 18 मई 2026 को देर रात के बाद पेट्रोल के दाम 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं। नई दरें 19 मई सुबह छह बजे से लागू कर दी गई हैं। इससे चार दिन पहले 15 मई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि की गई थी। पांच दिन में दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी से वाहन चालकों में नाराजगी है। सीएनजी के दाम भी 15 मई 2026 को तीन रुपये प्रति किलो बढ़ाए गए थे। इसके बाद 18 मई 2026 को भी एक रूपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी गई। इससे सीएजनी की कीमत अब करीब 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर दैनिक कामकाजी लोगों पर पड़ेगा। इससे ऑटो, कैब चालक और ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। और इसका प्रभाव सभी आवश्यक वस्तुओं

की कीमत बढ़ने के रूप में सामने आने वाला है। और मध्य प्रदेश में वैट हटाकर पेट्रोल, डीजल की कीमत को बेअसर करने की गुहार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लगाई है।

मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पेट्रोल डीजल के बढ़े दामों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। साथ ही प्रदेश सरकार से पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स कम करने की मांग की है ताकि जनता को राहत मिल सके। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज देश के बड़े शहरों में भोपाल सबसे महंगे पेट्रोल वाले शहरों में शामिल है। दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹98.67 प्रति लीटर है, जबकि भोपाल में यही पेट्रोल 110.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। यानी मध्यप्रदेश की जनता हर लीटर पर दिल्ली से लगभग 12 रुपए ज्यादा चुका रही है। सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वर्तमान में पेट्रोल पर 29% वैट, 2.5 प्रति लीटर अतिरिक्त वैट और 1% सेस वसूल रही है। डीज़ल पर भी 19% वैट और 1.5 प्रति लीटर अतिरिक्त वैट के साथ ही 1% सेस लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पेट्रोल ₹110 प्रति लीटर है, तो अकेले मध्यप्रदेश सरकार लगभग 28–30 रुपये प्रति लीटर टैक्स के रूप में वसूल रही है। नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि महंगा पेट्रोल और डीज़ल सिर्फ वाहन चलाना महंगा नहीं करते बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। डीज़ल महंगा होगा तो ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा तो सब्जी, दूध, राशन, खेती, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की हर चीज महंगी होगी। उमंग सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार को तुरंत वैट और सेस में कटौती करनी चाहिए ताकि पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कम से कम 12–15 रुपये प्रति लीटर की राहत जनता को मिल सके। उन्होंने कहा कि जनता को भाषण नहीं, महंगाई से राहत चाहिए।

पेट्रोल डीजल की बढ़ती हुई कीमतों के हिसाब से देखा जाए तो देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम में करीब 4 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। और यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में डबल अंकों में बढ़ोतरी होनी चाहिए, तभी सरकारी तेल कंपनियां नुकसान की भरपाई कर पाएंगी। और यदि ऐसा हुआ तो आम आदमी का पूरा बजट ही गड़बड़ हो जाएगा। और ऐसे में विपक्ष और सिंघार की चिंता पर गौर कर सरकार वैट का बोझ कम कर आम आदमी को राहत दिला सकती है। हालांकि तब बजट सरकार का गड़बड़ होगा और ऐसे में यह बात तय है कि बजट तो किसी न किसी का गड़बड़ होना ही है। सरकार वैसे ही कर्ज ले लेकर परेशान है। ऐसे में सिंघार का नुस्खा सरकार की सेहत के अनुकूल नजर नहीं आ रहा है। हालांकि यह मुद्दा आम सरोकार का है तो सरकार भले ही इस पर गौर कर सकती है…।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।