‘हिमंता’ की राह पर ‘मोहन’…

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‘हिमंता’ की राह पर ‘मोहन’…

कौशल किशोर चतुर्वेदी
एक बार फिर, यूसीसी यानि यूनिवर्सल सिविल कोड पूरे देश में चर्चा में है। दरअसल असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चुनावी वादे को पूरा करते हुए यूसीसी विधेयक पारित करवा लिया है। अब असम, सबके लिए समान कानून लागू करने वाला देश में तीसरा राज्य बनेगा। उत्तराखंड और गुजरात में यूसीसी पहले ही लागू हो चुका है।मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने सत्र के आखिरी दिन इस बिल को मंजूरी दिलाई। विपक्ष ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की थी, असम सरकार ने इसे ठुकरा दिया। और मध्य प्रदेश भी जल्द ही यूसीसी पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बनेगा। इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की राह पर आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है।
इस कानून के लागू होते ही अब राज्य में शादी, तलाक, लिव-इन और जमीन-जायदाद के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। इस कानून का मकसद सभी नागरिकों के लिए एक जैसा नियम बनाना है, लेकिन असम के आदिवासियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी संस्कृति बची रहे। नए बिल में एक से ज्यादा शादी यानी बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, पुरुषों के लिए शादी की उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल तय की गई है। अब शादी और तलाक का सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना भी जरूरी होगा और ऐसा न करने पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह कानून समाज में समानता लाएगा। इससे लोगों को कानूनी स्पष्टता मिलेगी। उनके मुताबिक शादी, तलाक, संपत्ति के मामलों में सबको एक जैसी व्यवस्था दी जाएगी। नए बिल में नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए बहुत सख्त सजा तय की गई है। अगर कोई व्यक्ति बहुविवाह (एक से ज्यादा शादी) का दोषी पाया जाता है, तो उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 82 के तहत 7 साल तक की जेल होगी। जबरदस्ती, डरा-धमकाकर या पहचान छिपाकर धोखे से शादी करने पर भी 7 साल की जेल के साथ जुर्माना लगेगा। यानि लव जिहाद से असम को आजाद कराने का माध्यम यूसीसी बनेगा।
बाल विवाह या बिना मर्जी के शादी करने पर 2 साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा, कानूनी प्रक्रिया के बिना अवैध रूप से तलाक लेने पर 3 साल की जेल तय है। दोबारा शादी करने से पहले किसी तलाकशुदा इंसान पर नाजायज शर्तें थोपने पर 3 साल की सजा के साथ 1 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। अगर कोई समाज के प्रतिबंधित रिश्तों में शादी करता है, तो उसे 6 महीने की जेल और 50 हजार रुपये का जुर्माना भुगतना होगा। इस बिल में पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं। अब लिव-इन में रहने वाले कपल को एक महीने के भीतर इसका सरकारी रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। ऐसा न करने पर 3 महीने की जेल या 10 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। लिव-इन डिक्लेरेशन में कोई भी जानकारी छुपाने या झूठे फैक्ट्स देने पर 3 महीने की जेल और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। सरकार का मानना है कि इस नियम से लिव-इन पार्टनर्स के अधिकारों को पूरी सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा, शादी या तलाक होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन न कराने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। अगर कोई रजिस्ट्रेशन के दौरान फर्जी या नकली दस्तावेज जमा करता है, तो उसे 3 महीने की जेल या 25 हजार रुपये का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है। संपत्ति के बंटवारे को भी पूरी तरह मॉडर्न बना दिया गया है। अब संपत्ति में बेटों की तरह बेटियों और माता-पिता को भी बराबरी का कानूनी हक मिलेगा। विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया है, लेकिन सरकार ने इसे सामाजिक न्याय के लिए बड़ा कदम बताया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में असम में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। राज्य में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद कैबिनेट ने 13 मई को अपनी पहली बैठक में इस बिल को लाने की मंज़ूरी दी थी। यूसीसी विधेयक की मूल बातें
154 पन्नों के इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य विवाह और तलाक़, उत्तराधिकार, लिव-इन रिश्तों से संबंधित क़ानूनों को नियंत्रित और विनियमित करना है और इससे जुड़े मामलों का संचालन करना है।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक जनवरी 2025 में लागू हुआ था, जबकि गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में यूसीसी विधेयक पारित किया है। और अब मई 2026 में असम में यूसीसी विधेयक लागू होने के बाद, मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी अंतिम चरणों में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है और आम जनता से सुझाव मांगने के लिए समान नागरिक संहिता मध्य प्रदेश नाम से एक आधिकारिक पोर्टल भी लॉन्च किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले जनता की राय जानने के लिए वेबसाइट शुरू की है। इस पोर्टल पर 15 जून तक आम नागरिक, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपने सुझाव और विचार साझा कर सकते हैं। राज्य सरकार ने अप्रैल 2026 में 6 सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई, जिन्होंने उत्तराखंड यूसीसी का भी नेतृत्व किया था, इस समिति की अध्यक्ष हैं। यह समिति शादी, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे मामलों पर अन्य राज्यों के मॉडल का 60 दिन में अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेगी। यूसीसी की रूपरेखा पर स्पष्ट किया गया है कि मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदायों के जनजीवन और उनकी विशिष्ट परंपराओं को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। यूसीसी राज्य में पारिवारिक कानूनों को एक समान बनाने, सामाजिक समानता और महिला अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर लोगों की राय जुटाने के लिए तेजी से काम कर रही है और जन परामर्श के लिए विभिन्न शहरों में बैठकें भी आयोजित कर रही है।
यूसीसी को लेकर अल्पसंख्यक और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय का
विरोध इसी बात को लेकर है कि जब सरकार आदिवासियों को इससे अलग रख रही है तो मुस्लिम समुदाय पर इसे क्यों थोपा जा रहा है? यूसीसी को आदिवासियों पर थोपने को लेकर मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। हालांकि यह बात पहले से ही तय थी कि आदिवासी समाज को इससे बाहर रखा जाएगा। फिलहाल हिमंता की राह पर मोहन हैं तो जल्दी ही भाजपा शासित करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा राज्यों में यूसीसी लागू होने की तरफ कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। और जिस तरह एसआईआर पर विपक्ष विरोध के अलावा कुछ हासिल नहीं कर पाया, ठीक उसी तरह यूसीसी भी विपक्ष को मुंह चिढ़ाते हुए पूरे देश में अपने पंख फैलाने को तैयार है। फिलहाल तो हिमंता की राह पर मोहन हैं…और मोदी-शाह की मंशा के अनुरूप मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश में चौथा राज्य बनने की तरफ अग्रसर है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।