Satyabrata Kumar: 2037 में होना था रिटायर, माल्या से महादेव ऐप तक जांच करने वाले अफसर ने 11 साल पहले ले लिया VRS

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Satyabrata Kumar: 2037 में होना था रिटायर, माल्या से महादेव ऐप तक जांच करने वाले अफसर ने 11 साल पहले ले लिया VRS

नई दिल्ली. Satybrata Kumar: सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर कैडर के 2004 बैच के 48 वर्षीय अफसर सत्यब्रत कुमार को 2037 में रिटायर होना था लेकिन उन्होंने अभी से वोVRS ले लिया है। माल्या से महादेव ऐप तक जांच करने वाले इस अफसर ने अपने सेवाकाल पूर्ण होने के 11 साल पहले ही VRS ले लिया।

नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप जैसे कई बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच का नेतृत्व कर चुके प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वरिष्ठ अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है. सूत्रों के अनुसार, सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर कैडर के 2004 बैच के 48 वर्षीय इस अधिकारी ने अप्रैल में VRS के लिए आवेदन दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने औपचारिक मंजूरी दे दी है.

अभी 48 वर्षीय अधिकारी के पास सेवा में 11 साल बाकी थे, लेकिन उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर व्यक्तिगत कार्यों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

सत्यब्रत कुमार ने प्रवर्तन निदेशालय में लगभग 12 सालों तक अपनी सेवाएं दी थीं. इस लंबे कार्यकाल की वजह से वह इस जांच एजेंसी में प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले सबसे लंबे वक्त तक सेवा देने वाले अधिकारियों में से एक बन गए थे. एक साल पहले उन्हें ED से वापस भेजा गया था और पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर तैनात किया गया था.

PNB घोटाले में कुर्क की संपत्ति नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़े 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पीएनबी (PNB) बैंक धोखाधड़ी मामले में सत्यब्रत कुमार की बहुत बड़ी भूमिका रही. उन्होंने अपराध की कमाई से बनाई गई विदेशों में स्थित करोड़ों रुपये की संपत्तियों को कुर्क करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इसके अलावा उनके नेतृत्व में ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय ने चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले की भी गहन जांच शुरू की थी. इस जांच के दौरान छत्तीसगढ़ के कई दिग्गज राजनेताओं और बड़े व्यापारियों के साथ इस सिंडिकेट के सीधे संबंध उजागर हुए थे.

*2037 में होना था रिटायर*

अधिकारियों के मुताबिक, 48 वर्षीय कुमार का नियमित सरकारी कार्यकाल साल 2037 तक निर्धारित था. 60 वर्ष की सुपरएनुएशन उम्र तक पहुंचने से पहले ही उनके पास सेवा के करीब 11 साल बचे थे, लेकिन उन्होंने पहले ही पद छोड़ दिया. एक साल से भी कम समय में ये दूसरा मौका है, जब किसी बड़े अधिकारी ने ईडी से हटने के तुरंत बाद सरकारी सेवा को छोड़ दिया है. इससे पहले जुलाई 2025 में पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने भी अपने रिटायरमेंट से 15 साल पहले इस्तीफा दे दिया था. कपिल ने झारखंड के CM हेमंत सोरेन और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुड़े मामलों की जांच की थी.