
CBSE Exam: परीक्षा में फेल सरकार: आईना दिखा रहे देश के बच्चे
रंजन श्रीवास्तव
कुछ समय पहले ही क्रिकेट के मैदान में बिहार के समस्तीपुर से आया हुआ एक 15 वर्षीय बच्चा- वैभव सूर्यवंशी- क्रिकेट के मैदान में विश्वप्रसिद्ध गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह, जोश हेजलवुड, पैट कमिंस, मोहम्मद सिराज, कगिसो रबाडा, जेसन होल्डर, भुवनेश्वर कुमार और अन्य कई गेंदबाजों के छक्के छुड़ा रहा था. उसी समय कुछ और बच्चे सरकार को यह बता रहे थे कि वे सरकार की कमियों के चलते अपने भविष्य को बर्बाद होता हुआ नहीं देख सकते. ये बच्चे बुद्धिमान हैं, स्मार्ट हैं, नए जमाने के बच्चे हैं, सिस्टम की कमियों और लापरवाही से बेहद निराश हैं और अपने तथा देश में लाखों अन्य बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं.
पहले नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई धांधली को लेकर और अब सीबीएसई (CBSE) परीक्षा की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर विपक्ष भले ही सरकार पर तीखे हमले कर रहा हो, पर देश के तीन बच्चों ने परीक्षा की कमियों को तथ्यों के साथ जिस तरह से उजागर किया, वह समूचा विपक्ष भी नहीं कर सका.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने जिस तरह से इस बार परीक्षा में विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया, वह लाखों बच्चों के लिए निराशाजनक था.
देश में सीबीएसई के मूल्यांकन में गड़बड़ियों पर हो रही चर्चा के बीच एक छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने पुनः मूल्यांकन के लिए अनुरोध किया. साधारण सी दिखने वाली इस मांग के कारण बोर्ड के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की कमियां तथा बोर्ड की जो धांधली सामने आई वह पूरे देश के लिए शर्मनाक तथा स्तब्ध करने वाला है.
सत्रह वर्षीय वेदांत ने हैंडराइटिंग के आधार पर दावा किया कि सीबीएसई ने फिजिक्स की जिस उत्तर पुस्तिका को अपलोड किया, वह उसकी थी ही नहीं. यानी बोर्ड ने भौतिकी के जिस उत्तर पुस्तिका की इवैल्यूएशन के बाद वेदांत को मार्क्स दिए वह उत्तर पुस्तिका वेदांत की थी ही नहीं.
पर बोर्ड की एक और बड़ी धांधली अभी सामने आना बाकी थी.
एक अन्य सत्रह वर्षीय विद्यार्थी सार्थक सिद्धांत ने तथ्यों के साथ यह प्रमाणित किया कि सीबीएसई ने ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली के लिए जिस हैदराबाद की कंपनी को चुना था, उसके लिए नियमों में बार-बार फेरबदल किया गया जिससे उस कंपनी को मूल्यांकन का काम दिया जा सके.
अब यह जांच का विषय है कि इस कंपनी को लाभ पहुंचाने में सीबीएसई के अधिकारीयों ने सिर्फ अपने स्तर पर निर्णय लिया या ऐसा उन्होंने ऊपर से आये किसी निर्देश के तहत किया.
उन्नीस वर्षीय निसर्ग अधिकारी, जो अपने आपको एथिकल हैकर भी कहते हैं, उन्होंने सीबीएसई के मूल्यांकन प्रणाली वाले पोर्टल को हैक करके बता दिया कि कोई भी व्यक्ति सीबीएसई के सिस्टम को हैक करके मूल्यांकन में फेरबदल कर सकता था. यानी ¸ की मूल्यांकन प्रणाली फुलप्रूफ नहीं थी.
वास्तव में निसर्ग ने परीक्षा के दौरान ही मूल्यांकन प्रणाली की कमियों को उजागर कर दिया था तथा सीबीएसई को चेताया था, पर सीबीएसई के अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने, जैसा कि उन्होंने 2024 में नीट-यूजी के पेपर लीक के बाद किया था, सीबीएसई में हुई गड़बड़ियों के लिए अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है.
पर आजकल नैतिक जिम्मेदारी लेने का अभिप्राय यह होता है कि कितनी भी बड़ी गड़बड़ी हो, मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे और ना प्रधानमंत्री ही जिम्मेदार मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई लेंगे.
यह कहना गलत नहीं होगा कि यह परीक्षा सरकार के तंत्र की भी थी, जिसमें वह फेल हो गई.
यह संयोग हो सकता है कि जब इन बच्चों ने सरकार के सिस्टम की कमियों को उजागर किया, तब देश के कुछ युवा भी देशव्यापी चर्चा के केंद्रबिंदु में हैं.
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे अभिजीत दिपके ने देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान एक टिप्पणी से आहत होकर ऑनलाइन मीम के तौर पर “कॉकरोच जनता पार्टी” बना डाली तो सोशल मीडिया पर उसका मजाक उड़ाया गया. इस पार्टी का ट्विटर हैंडल बंद करा दिया गया.
एक अन्य युवा और फ्रीलांस पत्रकार सौरभ दास न्यायपालिका के निर्णयों पर लगातार लिखते हुए देश में चर्चा के केंद्रबिंदु में हैं.
इसी तरह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, तिरुचिरापल्ली के अंतिम वर्ष के छात्र ए. ऋषि कुमार ने “द सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ह्रैज़ नो स्पाइन” शीर्षक से लेख लिखकर देश में एक अन्य चर्चा को जन्म दे दिया. न्यायपालिका के आदेश का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय ने ए. ऋषि कुमार को अपने लेख को इंटरनेट से वापस लेने का अनुरोध किया, पर उन्होंने संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए लेख को हटाने से मना कर दिया.
दुर्भाग्य यह है कि देश के युवा जब भी सरकार के तंत्र की किसी कमी को उजागर करते हैं या इन कमियों से व्यथित होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तो एक समूचा तंत्र उन्हें देश विरोधी बताने में जुट जाता है.
यहां तक कि 17 वर्षीय वेदांत श्रीवास्तव पर एक राष्ट्रीय टीवी चैनल के वरिष्ठ पत्रकार ने पाकिस्तानी होने का ठप्पा लगा दिया.
देखना यह है कि क्या सरकार इन छात्रों और युवाओं को सुनेगी और अगर सुनती है तो व्यवस्था में क्या सुधार लाती है.
यह भी प्रश्न है कि क्या इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी, जो आने वाले समय के लिए नजीर बन सके या कार्रवाई के नाम पर कुछ गिने चुने अधिकारियों के तबादले जैसी दिखावे की रस्म अदायगी होती रहेगी.





