
जनसंवाद से जीता दिल: आस्था और समरसता का संदेश- दुर्गम पहाड़ियों पर स्थित खुपज देव धाम में पुलिस-जनता का अनोखा मिलन
बड़वानी। पुलिस और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जनसंवाद जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को एक भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने न केवल ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि आदिवासी आस्था और संस्कृति से जुड़े वरला क्षेत्र के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर स्थित खुपज देव मंदिर तक दुर्गम रास्तों को पार कर दर्शन भी किए।
थाना वरला अंतर्गत ग्राम रोजानीमाल में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर, एसडीओपी अजय वाघमारे सहित पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को साइबर अपराधों से बचाव तथा पुलिस विभाग के महत्वाकांक्षी “थ्री-डी अभियान” (दहेज, दारू और डीजे रहित विवाह) के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में रोजानीमाल, महानीम और चिलारिया सहित आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक द्वारा संचालित थ्री-डी अभियान की सराहना करते हुए उन्हें आदिवासी संस्कृति और आस्था के केंद्र खुपज देव मंदिर आने का निमंत्रण दिया। ग्रामीणों के आग्रह को स्वीकार करते हुए पुलिस अधीक्षक ने कठिन और दुर्गम पहाड़ी मार्ग से पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचकर दर्शन किए।
इस दौरान स्थानीय इतिहासकार डॉ. सौरभ मारू ने खुपज देव बाबा के इतिहास, आदिवासी समाज में उनकी मान्यता तथा पारंपरिक पूजा-पद्धति की जानकारी दी। बताया जाता है कि खुपज देव आदिवासी समाज के महान संत थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में समाज सेवा और जरूरतमंदों की सहायता कर लोगों के बीच विशेष स्थान बनाया। उनकी स्मृति में वर्षों पूर्व इस दुर्गम पहाड़ी पर मंदिर की स्थापना की गई थी। इसी पहाड़ी पर मुस्लिम समुदाय के श्रद्धा केंद्र ताजुद्दीन बाबा की दरगाह भी स्थित है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है।

करीब 30 से 35 वर्ष पूर्व एक श्रद्धालु द्वारा कठिन पहाड़ी रास्तों से ट्रैक्टर को मंदिर तक पहुंचाने की घटना आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। वह ट्रैक्टर आज भी मंदिर परिसर के नीचे मौजूद है और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
दर्शन के बाद पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों के साथ जमीन पर बैठकर पत्तलों में परोसे गए पारंपरिक आदिवासी भोजन—मक्के और बाजरे की रोटी, उड़द की दाल तथा आचार—का स्वाद लिया। अधिकारियों का यह सहज और आत्मीय व्यवहार ग्रामीणों के दिलों को छू गया।

पुलिस अधीक्षक ने मंदिर निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए स्वेच्छा से सहयोग राशि देने की घोषणा की। साथ ही समिति के सदस्यों द्वारा किए जा रहे सामाजिक और धार्मिक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित करने के निर्देश थाना प्रभारी नारायण रावल को दिए।
कार्यक्रम में थाना प्रभारी नारायण रावल, बीट प्रभारी रमेशचंद्र चौहान, ग्राम सरपंच हामीर आर्य, अर्जुन, ग्राम पटेल, मंदिर समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
यह आयोजन केवल जनसंवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस, समाज और आदिवासी संस्कृति के बीच विश्वास, सम्मान और समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।





