VIT विश्वविद्यालय के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकार आयोग ने फिर दिया नोटिस

दो सप्ताह में जवाब नहीं देने पर आयोग करेगा दंडात्मक कार्रवाई

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VIT विश्वविद्यालय के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिकार आयोग ने फिर दिया नोटिस

भोपाल: भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन द्वारा वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (VIT) भोपाल के नाम और कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में दर्ज कराई गई शिकायत पर आयोग ने एक बार फिर यूजीसी और मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर शिकायतों में लगाए गए आरोपो की जांच कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए है

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (VIT) भोपाल के नाम और कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। 30 मार्च को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चैयरमैन और मप्र शासन उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी पर कार्यवाही कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे लेकिन जवाब ना मिलने पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पुन: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग को दोबारा नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट दो सप्ताह में आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो वह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 के तहत अपनी दंडात्मक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए बाध्य होगा।
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि वीआईटी विश्वविद्यालय अपने नाम में भोपाल शब्द का उपयोग कर प्रदेश एवं देशभर के छात्रों तथा अभिभावकों को भ्रमित कर रहा है, जबकि विश्वविद्यालय वास्तव में भोपाल से लगभग 100 किलोमीटर दूर सीहोर जिले में स्थित है। इस संबंध में छात्रों की शिकायतों और अन्य अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

परमार ने बताया कि आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए पहले ही यूजीसी और मध्यप्रदेश शासन को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए आयोग ने अब पुन: अनुस्मारक जारी किया है और चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यह छात्रों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की लड़ाई है। एनएसयूआई लगातार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी किसी भी प्रकार की शैक्षणिक अनियमितता को उजागर करने का कार्य जारी रखेगी।