
World Poha Day: विश्व पोहा दिवस पर इंदौर लेखिका संघ ने दी अनूठी प्रस्तुतियां
इंदौर: इंदौर में विश्व पोहा दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है .इंदौर लेखिका संघ में भी रविवार को विश्व पोहा दिवस पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।यह दिन भारत के सबसे पसंदीदा और पौष्टिक नाश्ते—पोहे—की लोकप्रियता, विविधता और सांस्कृतिक महत्व का जश्न मनाने के लिए समर्पित हुआ .पोहा केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश (विशेष रूप से इंदौर और मालवा) और महाराष्ट्र के खानपान का अभिन्न अंग है.इंदौर में पोहे का सेवन सिर्फ नाश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की जीवनशैली और संस्कृति का प्रतीक है。कहते हैं कि पोहा इंदौर का दिल है, तो सेव उसकी धड़कन।”इंदौर लेखिका संघ ने भी इन्दोरी पोहे का जश्न अपनी रचनाओं के माध्यम से मनाया .आइये पढ़ते हैं कुछ रचनाएँ -डॉ. रूचि बागड़देव
1.हल्दी की सुनहरी आभा वाला इंदौरी पोहे

डॉ. प्रतीक्षा शर्मा
मालवा की महकी धरती का,
अनुपम यह उपहार है,
इंदौरी पोहा केवल भोजन नहीं,
दिलों का स्वागत सत्कार है।
भोर हुई तो चौक-चौराहे,
खुशबू से भर जाते हैं,
गरम कढ़ाई में पोहे के मोती, हँसते-गुनगुनाते हैं।
हल्दी की सुनहरी आभा में,
जैसे सूरज मुस्काता है,
सेव,अनार और हरे धनिया से,
हर कण सज-धज जाता है।
नींबू की हल्की खटास मिले,
बारीक प्याज ,जीरावन का
जादू हो,
पहला कौर जिह्वा पर आते
ही,मन पर रहे ना काबू हो।
संग जलेबी की मधुर मिठास,
रस का अद्भुत मेल रचे,
तीखे-मीठे स्वादों का यह,
अनुपम सुंदर खेल रचे।
रेल रुके या राहगीर आए,
सबका इससे नाता है,
इंदौर शहर की पहचान यही,
हर दिल को यह भाता है।
दादी की रसोई की स्मृतियाँ,
इसमें महक-सी जाती हैं,
माँ के स्नेहिल हाथों जैसी,
गरमाहट भी दे जाती है।
नहीं महलों के व्यंजन जैसा,
फिर भी इसका मान बड़ा,
सादगी में सौंदर्य छिपा है,
इसका गौरव ,स्थान बड़ा।
मालवा की महक व अपनापन,
पोहे के गौरव गान में है।
इंदौरी पोहे का किस्सा तो,
विदेशियों तक की जबान पर है।
आओ मिलकर स्वाद चखें हम,
प्रेम-सुगंधित इस थाल का,
जय-जय इंदौरी पोहे की,
गौरव है यह मालवा प्रांत का।
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2.पोहे का आनंदमयी स्वाद

वन्दिता श्रीवास्तव
इन्दौर
मे
भोर की
सूर्य किरण
ठिये मे
पोहे की
महक
बढते कदम
परिवार
संग
मुंह मे
पीत
पोहे का
आनंदमयी
स्वाद,
दोने मे
उसल
के लिए
पोहा
जगह
बना रहा
सेव नीबू मिर्च
ठिठोली
कर रहे
ठेले मे
रखी
जलेबी
मुसका
रही
है
परिवार
जनो के
चेहरे
खिल गये
परिवार
संग
इन्दौर
संडे
आनंद
कर
रहा है
पोहा
दिवस
मना
रहा है।।
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3.आओ आओ पोहे खाओ
.आशा जकड़
आओ आओ गरमा गरम पोहे खाओ ।
तड़के वाला खाओ, प्याज वाला खाओ।
मटर वाला खाओ, ऊसल पोहे खाओ ।
धनिया मिर्ची डाल, सेब डालकर खाओ।
सुबह-सुबह का नाश्ता पोहे मिल जाए ।
साथ में जलेबी और चाय मिल जाए।
सुबह के मौसम में और रंगत आजाए।
दिन भर के लिए खूब ऊर्जा मिल जाए।
दोस्तों पोहे सुबह खाओ या फिर शाम।
तन- मन को मिलता बहुत आराम।
बर्थडे पार्टी हो या फिर कोई त्यौहार
पोहे खाकर लगता किया जाए कुछ विश्राम।।
4. धीरे धीरे तुम पोहे को धोना
प्राची शर्मा पांडे
बड़े जतन से रखना ध्यान
टूटे ना एक कोना।
हौले हौले धीरे धीरे
तुम पोहे को धोना।।
रख देना कुछ देर
उसे फुला नहीं सामने दो।
मै इंदौर की शान हु
इस बात पर इठलाने दो।।

प्याज नींबू मिर्ची धनिया
थोड़ा लेना कड़ी पत्ता।
स्वाद नहीं आया ठीक तो
कट जाएगा तुम्हारा भत्ता।।
एक कढ़ाव भर पानी का
झट से आँच पर चढ़वा दो।
इंदौरी पोहा बन रहा
कोई कसर न रहने दो।।
झटपट तड़का लगा लो भैया
गर्म जलेबी आती है।
चम्मच छन छन बज रहे
भूख सभी को खाती है।।
दो जलेबी, प्लेट में पोहा
ऊपर से नुक्ति सेव वाली।
थोड़ा ज़ीरावन छिड़क देना
फिर देना हाथ में थाली।।
शुरू हुआ दिन भरे पेट से
खा स्वादिष्ट पोहा।
तुलसी जी नाई लिख डाला
देखो मैने दोहा।।
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5. बच्चे बूढ़े सभी के मन को
भाता है
मनोरमा जोशी
पोहा हमारे इन्दौर की शान ,
साथ में इसके रस भरी जलेबी का
की भी एक अलग पहचान ।
सुबह सुबह घर आये मेहमान तो
पोहा जलेबी ऊसल का नाश्ता
होता है । पोहे के साथ जीरावन
कटे बारिक प्याज ,नींबू हरा धनिया
से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है
संडे को तो हर घर में इसी का नाश्ता
होता है बच्चे बूढ़े सभी के मन को
भाता है झटपट बनकर तैयार हो
जाता है हर चौराहे पर इसके ढेले
लगते हैं सब बड़े चाव से आनंद लेते हैं
पोहा हमारे देश में नहीं बल्कि
विदेशी लोग भी यहां आते बहुत ,
पसंद करते हैं पोहे जलेबी की जोड़ी
है यह हमारे इन्दौर की शान है ।
6.पोहे-जलेबी ने दिया, इंदौर को सम्मान
सुषमा शुक्ला

इंदौरी पोहे की महक, जग में जिसकी शान।
संग जलेबी मुस्करा, बढ़ाए स्वाद महान॥
सेव, नींबू, जीरावन, पोहे की पहचान।
जलेबी की मधुरास से, खिल उठता इंसान॥
सुबह-सुबह हर चौक पर, पोहे की भरमार।
जलेबी संग मिल जाए तो, बन जाए त्योहार॥
मालवा की मिट्टी कहे, आओ लो यह स्वाद।
पोहे-जलेबी ने दिया, इंदौर को सम्मान॥
पीले-पीले पोहों में, स्नेह भरा हर कौर।
जलेबी की मिठास से, महके नगर इंदौर॥
देश-विदेश से लोग सब, आते लेकर चाह।
पोहे-जलेबी का मिले, अनुपम मधुर प्रवाह॥
सराफा हो या राजवाड़ा, गूंजे एक ही नाम।
पोहे-जलेबी की वजह, ऊँचा इंदौर धाम॥
सादा जीवन सा लगे, पोहे का व्यवहार।
जलेबी जैसी मधुरता, रखिए हर परिवार॥
पोहा देता ताजगी, जलेबी दे उल्लास।
दोनों मिलकर बाँटते, खुशियों का मधुमास॥
पोहा दिवस पर आज हम, करें नगर का मान।
इंदौरी पोहा-जलेबी, भारत की पहचान॥ 🍽️✨
7.पोहे से ही इंदौरियो की पहचान
मनोरमा जोशी
पोहा हमारे इन्दौर की शान ,
साथ में इसके रस भरी जलेबी का
की भी एक अलग पहचान ।
सुबह सुबह घर आये मेहमान तो
पोहा जलेबी ऊसल का नाश्ता
होता है । पोहे के साथ जीरावन
कटे बारिक प्याज ,नींबू हरा धनिया
से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है
संडे को तो हर घर में इसी का नाश्ता
होता है बच्चे बूढ़े सभी के मन को
भाता है झटपट बनकर तैयार हो
जाता है हर चौराहे पर इसके ढेले
लगते हैं सब बड़े चाव से आनंद लेते हैं
पोहा हमारे देश में नहीं बल्कि
विदेशी लोग भी यहां आते बहुत ,
पसंद करते हैं पोहे जलेबी की जोड़ी
है यह हमारे इन्दौर की शान है ।

8.भारत की शान हूं
निर्मला मूंदडा
हां मैं इंदौर हूं,
भारत की शान हूं।
स्वच्छता में नंबर वन,
का लेता पुरस्कार हूं।
भारत मां का लाल हूं ,
भारत मां की शान हूं ।
बीच हृदय मैं बैठा हूं ,
मैं भारत मां की जान हूं।
खाता हूं मैं गरम जलेबी,
पोहा उसल खाता हूं।
जगह-जगह चौराहे पर पोहा,
जलेबी खाने वालों का जलवा है
गर्म कचोरी ,गरम समोसा,
यह मेरी पहचान है ।
मीठे से ही, पोहे से ही,
इंदौरियो की पहचान है ।
खाना पीना शौक है मेरा ,
मालवा की आन हूं ।
दाल बाटी और चूरमा ,
इंदौरियो की शान है ।
खाने-पीने के शौकीन हैं,
इंदौरी मेरी जान है ।
देवी अहिल्या का गौरव हूं ,
करता उनका गुणगान हूं।
बीच हृदय बना राजवाड़ा ,
माता अहिल्या की शान है ।
देवी अहिल्या के गौरव का,
करता सदा गुणगान हूं ।
देवी मां को नमन करके,
इंदौरीयों को नमन है ।
हां मैं इंदौर हूं ,हां मैं इंदौर हूं ,
इंदौर मेरा नाम है ।
8. मेरे पिया तुमको बहुत ही जतन से बनाते
डॉ.अंजलि मिश्रा
पोहा मुझे तुम बहुत हो प्यारे
क्यो की तुम मेरे पिया दिल को हो लुभाते
इतना प्यार मेरे पिया तुमसे करते
सुबह, शाम जब देखो मेरे पिया है तुमको भजते
मुझको रोज रोज सिखाते
पोहा को ऐसे धोना चाहिए
होले, होले पोहा की ब्यूटी
नही बिगड़नी चाहिए
जब कभी भी मै थक जाती
मेरे पिया तुमको बहुत ही जतन से बनाते
थोड़ा प्याज थोड़े से आलू
थोड़े से दाने
थोड़ी सी हरि मिर्च
थोड़ी सी शुगर
थोड़ा सा नमक
डाल कर धीमी आंच मे पकाते
फिर जब बन जाता पोहा
थोड़ी सी बारीक धनिया
थोड़ी सी रतलामी सेव
थोड़ा सा जिरावन छिड़क
कर सुंदर सी प्लेट मे सजाकर
मुझको रिझाकर मुझे मनाकर
मुझे प्यार से खिलाते
और मेरे प्यारे पिया का प्यार से बनाया हुआ पोहा मुझे है बहुत भाता
===
9.नाश्ते में याद आता पोहा
— प्रभा तिवारी
इन्दौरी पोहा
जैसे रतलामी सेव स्पेशल,
वैसा हमारा स्पेशल इन्दौरी पोहा।
बाहर जब इन्दौरी व्यक्ति घूमने जाता,
नाश्ते में याद आता पोहा।
बाहर पोहे के गुण गा-गा कर न थकता,
पूरी विधि बताता कैसे बनता पोहा।
कोई डालता पोहे में अनार के दाने,
कोई डालता मूँगफली के दाने।
तड़के में मीठी नीम की पत्ती,
सौंफ, जीरा, हरी मिर्च।
मीठी नीम की पत्तियों के बिना न आए स्वाद।
बनने के बाद सेव, धनिया पत्ती,
खोप्रे का बुरादा,
और नींबू से सजाते पोहा।
ठंड में इसके बड़े निराले ठाठ,
गर्मागर्म जलेबी के साथ।
क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग — सब होते दीवाने,
बड़े आनंद से खाते पोहे।
पोहे कई राज्यों में अलग नाम से बोले जाते,
पर इन्दौरी पोहे से प्रसिद्ध है हमारा इन्दौर।
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World Poha Day: विश्व पोहा दिवस पर इंदौर लेखिका संघ ने दी अनूठी प्रस्तुतियां- भाग 2 पोहे के किस्से कहानियाँ





