
बरसाती पटरियों का गीत
सुषमा शुक्ला
भीगे पथ पर रेल यह, भरती नव उत्साह।
जीवन भी गतिमान हो, चाहे कितनी राह॥
बरखा की झंकार में, गाए रेल मल्हार।
पटरियों के तार पर, बजता मधुर सितार॥
नीले रंग की देह में, आशा का विस्तार।
ले जाती हर मोड़ पर, नव जीवन का द्वारl
कभी धूप तो छाँव है, जीवन का व्यवहार।
रेल सिखाती चल पड़े, लेकर दृढ़ आधार॥
भीगी मिट्टी कह रही, मत रुकना एक क्षण।
चलते रहने से मिले, हर मंज़िल का धन॥
दूर क्षितिज तक दौड़ती, आशा की यह रेल।
जोड़ रही है गाँव को, शहरों से हर मेल॥
मानव के पुरुषार्थ का, अनुपम यह प्रमाण।
रेलगाड़ी के संग जुड़ा, भारत का सम्मान॥
सुषमा शुक्ला





