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मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट, मुख्यमंत्री निवास पर हुई प्रदेश भाजपा के नेताओं की अहम बैठक

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मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट, मुख्यमंत्री निवास पर हुई प्रदेश भाजपा के नेताओं की अहम बैठक

भोपाल. डॉ. मोहन यादव कैबिनेट के पहले फेरबदल को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें प्रदेश भाजपा संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने विचार विमर्श किया। इस बैठक में मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह मौजूद थे। हालांकि तीनों ही नेता किसी दूसरी बैठक के नाम पर यहां जुटे थे, लेकिन उस बैठक के बाद तीनों के बीच एक बैठक और हुई, जिसे मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़ कर देखा जा रहा है।

वीसी के बाद हुई गोपनीय चर्चा

तीनों नेताओं के बीच अलग से हुई बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, हेमंत खंडेलवाल और महेंद्र सिंह ने नगर निगम महापौरों और नगर पालिकाओं के अध्यक्षों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संवाद किया था। इस बैठक का उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर पार्टी द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की तैयारी और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद, मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी के बीच हुई लंबी बैठक हुई। इस बैठक के बाद मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है।

केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी निगाहें

हालांकि, राज्य स्तर पर कयासों का दौर जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि फेरबदल पर अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही लेगा। मुख्यमंत्री और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई इस चर्चा को केंद्रीय आलाकमान को भेजने के लिए होमवर्क के रूप में देखा जा रहा है।

कई मंत्रियों पर लटकी तलवार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा टर्म पूरा कर चुके हैं, इस दौरान उन्होंने दो बार अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के काम काज की समीक्षा भी की। अब इन दोनों समीक्षाओं का सार मंत्रिमंडल फेरबदल में दिखाई दे सकता है। जो मंत्री अच्छा परफॉमेंस दे रहें हैं वे मंत्रिमंडल में बने रह सकते हैं, जबकि जिनका प्रदर्शन बेहतर नहीं है, उनकी छुट्टी हो सकती है। ऐसे में चार से पांच मंत्रियों पर तलवार लटकी हुई मानी जा रही है। वहीं एक या दो मंत्री केंद्रीय संगठन में जा सकते हैं, ऐसा हुआ तो वे भी मंत्रिमंडल से बाहर होंगे। वहीं डॉ. यादव की कैबिनेट में अभी चार पद खाली हैं, ऐसे में कुछ विधायक इन खाली पदों पर भी एडजस्ट कर मंत्री बनाए जा सकते हैं।