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सामाजिक समरसता भाव से परिपूर्ण थे ब्रह्मलीन स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी गिरि – पंडित दिवाकर उपाध्याय

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सामाजिक समरसता भाव से परिपूर्ण थे ब्रह्मलीन स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी गिरि – पंडित दिवाकर उपाध्याय

पद्मभूषण, महामंडलेश्वर, भारतमाता मंदिर अधिष्ठाता स्वामी श्री सत्यमित्रानंद जी गिरि की सप्तम पुण्यतिथि मंदसौर के अपना घर में मनायी

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मन्दसौर। पूज्य स्वामी जी महाराज का व्यक्तित्व श्रेष्ठ उदाहरण है समाज में एकता और परस्पर समरसता भाव का, कमज़ोर वर्गों वनवासियों आदिवासियों सहित वाल्मीकि समाज को जोड़ने राष्ट्र विकास की मुख्य धारा में लाने हेतु जीवन पर्यन्त कार्य करते रहे कुंभ और सिंहस्थ पर्व पर स्वयं संत मंडल के साथ इन समाज को शाही स्नान करने में सहभागी बनाया यह कहा अपने संबोधन में समन्वय सेवा ट्रस्ट हरिद्वार के सदस्य एवं समन्वय परिवार गरोठ संयोजक पंडित दिवाकर उपाध्याय ” भास्कर पूजन” ने। आप गुरुवार को मंदसौर के निराश्रित बालिका गृह अपना घर में समन्वय परिवार शाखा द्वारा आयोजित सप्तम पुण्यतिथि समारोह में मुख्य वक्ता थे।

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पंडित दिवाकर उपाध्याय ने बताया कि 32 वर्ष पूज्य स्वामी जी के सानिध्य में सेवा करने का सौभाग्य मिला, वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आधुनिक भारत के विवेकानंद के रूप में जाने गए एक भारत अखण्ड भारत सशक्त भारत और आध्यात्मिक शक्ति के सम्पूर्ण भारत के पक्षधर रहे और हरिद्वार में देश के पहले भारतमाता मंदिर की स्थापना की जिसका उदघाटन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने किया।

पण्डित उपाध्याय ने अपने काव्य संग्रह बिखरते हुए की एक कविता भी प्रस्तुत की।

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इसके पूर्व पुष्पांजलि धर्म सभा को समाजसेवी कारुलाल सोनी, डॉ प्रवीण मण्डलोई, कन्हैया लाल सोनगरा, राव विजय सिंह, ब्रजेश जोशी, डॉ रवीन्द्र पाण्डेय, शिक्षाविद अजीजुल्लाह ख़ालिद, वाल्मीकि समाज संरक्षक राजाराम तंवर, डॉ दिनेश तिवारी, डॉ किशोर शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ गणमान्य जनों ने पूज्य स्वामी जी के दिव्य चरित्र और गुणों पर अपने भाव व्यक्त किए। साथ ही मंदसौर गरोठ भानपुरा अंचल में पूज्य स्वामी जी महाराज के साथ व्यतीत काल खण्ड की स्मृतियों को याद किया।

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सामूहिक प्रार्थना पण्डित राजेंद्र तिवारी ने कराई। संचालन डॉ घनश्याम बटवाल ने किया और आभार समन्वय परिवार मंदसौर शाखा सचिव दिलीप कुमार गौड़ ने माना।

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इस मौके पर बद्रीलाल तिवारी, के पी सिंह, रमेशदत्त शर्मा, गोपाल त्रिवेदी, कमल कोठारी, महेश गेहलोत, मनोहर नरानिया, कैलाश चन्द्र पुरोहित, रमेश चंद्र सैनी, इंजीनियर श्री पंवार सहित गणमान्य जनों, महिलाओं, युवाओं की उपस्थिति रही। सभी ने सामूहिक आरती पूजन अर्चना कर पूज्य स्वामी जी के पाद पूजन किया। अपना घर की बालिकाओं ने समूह भजन प्रस्तुति दी।

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समन्वय परिवार मंदसौर शाखा द्वारा पंडित दिवाकर उपाध्याय को शाल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। डॉ घनश्याम बटवाल ने दुपट्टा ओढ़ाकर आराधना पुस्तिका भेंट की। वाल्मीकि समाज संरक्षक राजाराम तंवर ने साफा बांध कर वस्त्र ओढ़ाया।

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दिलीप गौड़ ने रामचरित मानस ग्रंथ की स्वयं टंकित प्रति प्रस्तुत कर जानकारी दी। प्रथम प्रति हरिद्वार में पूज्य स्वामी जी समाधि पर रखी गई है।

अंत में जावद मनासा क्षेत्र के समाजसेवी शिष्य श्री भगवान दास मुछाल के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभी महानुभावों और महिलाओं ने अपना घर की बालिकाओं को भोजन कराया और भेट प्रदान की।