
Jhabua’s Administrative Landscape set to Change : जनता के हिसाब से बनेंगी तहसील-सीमाएं: आयोग अध्यक्ष एसएन मिश्रा!
राजेश सोनी की रिपोर्ट!
झाबुआ : मध्य प्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग ने झाबुआ में डेरा डाल दिया है। कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में तय हुआ कि जिले की तहसील, उपखंड और जनपद की सीमाएं अब “फाइल से नहीं, जनता की जरूरत से” तय होंगी। आयोग अध्यक्ष एस.एन. मिश्रा ने कहा- हमें सुगम और जनोन्मुखी प्रशासन चाहिए। आदमी को काम के लिए 50 km भटकना न पड़े।
इसे लेकर 4 बड़े टार्गेट तय किए गए हैं।
जनता की अपेक्षा के हिसाब से जिला-तहसील का पुनर्गठन, आगे नई इकाई बने तो उसके वैज्ञानिक नियम, हर ऑफिस में काम के हिसाब से स्टाफ, आयोग खुद जमीनी हकीकत देखने जिले-जिले जाएगा।
नई तहसील कहां बनेगी?
आयोग सदस्य मुकेश शुक्ला ने अधिकारियों को गाइडलाइन दी। इसमें मुख्यत दूरी कितनी है, सड़क कैसी है, जनसंख्या कितनी है, स्कूल- अस्पताल- पानी- बिजली है या नहीं, खेती-व्यापार-जंगल की क्या स्थिति है।
मतलब अब राजनीतिक नहीं, वैज्ञानिक आधार पर फैसला तय!
डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि झाबुआ आदिवासी जिला है, तो यहां अलग सोच चाहिए जहां ग्राम सभा और पंचायत आपस में उलझें नहीं, साथ काम करें, आदिवासी क्षेत्रों के लिए अलग से प्रोजेक्ट मोड में विकास, कागज में सेवा अटकती है, वो सिस्टम खत्म हो, गुजरात- राजस्थान सीमा वाले गांव के लोग भी सुविधा से वंचित न रहें।
पुलिस-राजस्व ने भी मांगा अपना हिस्सा!
राजस्व का कहना था गांव ज्यादा हो गए तो नई तहसील बना दो। पुलिस के अनुसार साइबर ठगी बढ़ रही है, साइबर थाने की जरूरत है। नए थाना-सेक्शन भी चाहिए। आयोग ने वेब पोर्टल पर फॉर्म डाला है। सरपंच से लेकर आम नागरिक तक- सब अपने इलाके की समस्या-जरूरत लिखकर भेज सकते हैं। फाइनल प्रस्ताव कलेक्टर चेक करके आयोग भेजेंगे। बैठक में आयोग अध्यक्ष एसएन मिश्रा, सदस्य मुकेश शुक्ला, सचिव अक्षय सिंह, कलेक्टर डॉ. भरसट, SP देवेंद्र पाटीदार, CEO जितेंद्र सिंह चौहान और सभी एसडीएम, तहसीलदार मौजूद थे!





