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Film Review : अल्फा या अल्फी? सेजवान नूडल्स में दही लेंगे या आम का रस?

Film Review : अल्फा या अल्फी? सेजवान नूडल्स में दही लेंगे या आम का रस?

 – डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

यशराज फिल्म्स का नया स्पाई यूनिवर्स चैप्टर। आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की जोड़ी, बॉबी देओल खलनायक, अनिल कपूर रॉ चीफ और हृतिक रोशन का कैमियो—सब कुछ है, लेकिन… लेकिन तर्क नहीं।

द रेलवे मेन का डायरेक्टर इसका भी डायरेक्टर है। वह शिव रवैल हैं। सेजवान नूडल्स में दही डाल दें या आम का रस, मर्जी है उनकी। अब तक जिस यूनिवर्स में सलमान खान, ऋतिक रोशन और शाहरुख खान पिस्तौलें चमकाते दिखते थे, इस बार वह कमान पूरी तरह दो हीरोइनों के हाथ में सौंप दी गई है—आलिया भट्ट और शरवरी वाघ।

आलिया भट्ट तो गज़ब की अभिनेत्री हैं ही। उन्होंने फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ ‘गंगूबाई’ या ‘राज़ी’ की सहमी हुई जासूस नहीं हैं। इस फिल्म में उनका बिल्कुल अलग, एक्शन से भरपूर अवतार है।

छरहरी काया वाले चेहरे पर मासूमियत और आँखों में कातिलाना गुस्सा। ऊपर से कुछ भारी-भरकम डायलॉग्स भी। इंटेंसिटी और क्रूरता का कमाल का मिश्रण। आलिया जब ‘किलर मोड’ में आती हैं, तो आँखों की वह खूंखार चमक रोंगटे खड़े कर देती है। बर्थडे सीन या क्लाइमैक्स फाइट में उनकी इमोशनल डेप्थ और रॉ एंगर बहुत असरदार है।

फिल्म यशराज फिल्म्स के उसी जाने-पहचाने सीक्रेट एजेंट वाले ढर्रे पर चलती है, लेकिन इस बार इसमें दो महिला जासूसों के रिश्ते में भावनात्मक एंगल जोड़ा गया है। फिल्म में आलिया भट्ट एक बेहद शार्प, थोड़ी-सी जिद्दी और मिशन को अंजाम देने के लिए किसी भी हद तक जाने वाली ‘अल्फा’ एजेंट की भूमिका में हैं। उनके साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं शरवरी वाघ, जो उनकी पार्टनर-इन-क्राइम और एक तरह से उनकी शैडो नज़र आती हैं।

‘स्पाई यूनिवर्स’ की अन्य फिल्मों की तरह इस फिल्म की कहानी भी काफी हद तक प्रेडिक्टेबल (अनुमानित) है। आप आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि देश का गद्दार कौन है या अगला मिशन कहाँ होने वाला है।

कुछ जगहों पर देशभक्ति का जज़्बा ज़रूरत से ज़्यादा लाउड हो जाता है, जिससे फिल्म थोड़ी-सी मेलोड्रामैटिक लगने लगती है। यदि आप कहानी में किसी बड़े सस्पेंस या अप्रत्याशित ट्विस्ट की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद आपको थोड़ी निराशा हो।

दर्शकों के लिए स्पेन, कश्मीर और लद्दाख की वादियाँ हैं। गाने गाती, नदी में कूदती और नहाती दो-दो हीरोइनें भी हैं। ‘राज़ी’ में इंटेलिजेंस थी, ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन’ में इंटेंसिटी थी, अब ‘अल्फा’ में आलिया एक्शन क्वीन बनकर आई हैं।

आलिया का फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन नज़र आता है। सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि बॉडी लैंग्वेज में भी वे पूरी तरह बदल गई हैं। हर मूवमेंट फ्लूइड, हर लुक कैलकुलेटेड। लगता है, वे सचमुच एक ट्रेन्ड असैसिन हैं। फिल्म के एक्शन सीन्स को बहुत ही सलीके और रियलिस्टिक तरीके से डिज़ाइन किया गया है। यहाँ सिर्फ हवा में गाड़ियाँ नहीं उड़ रही हैं, बल्कि हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और गन-फाइट को भी बहुत क्रिस्प रखा गया है।

आलिया और शरवरी, दोनों की बॉडी लैंग्वेज बहुत स्मूथ है। वे मार्शल आर्ट्स, गन फाइट्स और चेज़ सीन्स में भी नाचती-सी लगती हैं। बिना भारी-भरकम मसल्स के ही फुर्ती से काम चला लेती हैं। ‘अल्फा’ के फाइट सीन्स में वे घूमती हैं, लात मारती हैं, छलांग लगाती हैं। सब कुछ इतना गरिमामय कि लगता है, जैसे कोई डांस परफॉर्मेंस चल रही हो, लेकिन खून-खराबा भी पूरा हो रहा है!

आलिया को हॉलीवुड के मशहूर एक्शन कोच जेसन नोविलो ने चार महीने तक ट्रेनिंग दी। उन्होंने ही कीनू रीव्स को ‘जॉन विक’ के लिए और ब्रैड पिट को ‘बुलेट ट्रेन’ के लिए ट्रेन किया था।

आलिया ने ‘अल्फा’ को पूरी शिद्दत से जिया है, लेकिन अफ़सोस कि पटकथा कई जगह ‘बीटा वर्ज़न’ जैसी लगती है। कलाकार ‘अल्फा’ हैं, लेकिन कहानी अभी भी अपडेट का इंतज़ार कर रही है।

देखनीय – एक्शन के शौकीनों के लिए!

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