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Cheque Bounce Accused : रतलाम में चेक बाउंस मामले का आरोपी उमेश कटारिया बरी, जानिए क्या है पूरा प्रकरण!

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Cheque Bounce Accused : रतलाम में चेक बाउंस मामले का आरोपी उमेश कटारिया बरी, जानिए क्या है पूरा प्रकरण!

Ratlam : महिला से अपनी आवश्यकता अनुरुप 50 हजार रुपए उधार लेकर दिया गया चेक बाउंस होने के मामले में अपील न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोष मुक्त कर दिया है। बता दें कि हाटीराम दरवाजा निवासी मनीषा पिता मांगीलाल गांधी ने एक परिवारपत्र अंतर्गत धारा 138 अधिनियम के तहत आरोपी उमेश पिता पारसमल कटारिया निवासी रणजीत विलास पैलस के विरुद्ध पेश किया था कि आरोपी द्वारा अपनी व्यावसायिक आवश्यकता होना बताकर परिवादी से 25- सितम्बर- 2013 को 50 हजार रुपए उधार लिए थे और उसकी अदायगी के लिए आरोपी ने उसके बैंक खाते बैंक का चेक 10- नवम्बर- 2017 का 50 हजार रुपए का अपने हस्ताक्षर करके दिया था।

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लेकिन जब उक्त चेक को परिवादी मनीषा ने बैंक में प्रस्तुत किया गया था तब चेक आराेपी के बैंक खाते में अपर्याप्त निधि की वजह से बाउंस हो गया था। जिस पर परिवादी द्वारा न्यायालय में आरोपी के विरुद्ध परिवाद पत्र दायर किया था। जहां ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी के विरुद्ध 24- जुलाई- 2025 को फैसला सुनाते हुए 1 वर्ष के सश्रम कारावास और 85 हजार रुपए प्रतिकर तथा प्रतिकर अदा नहीं किए जाने पर अलग से 3 माह सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके बाद ट्रायल कोर्ट के निर्णय से व्यथित होकर आरोपी ने अपील की थी जिसमें आरोपी के अभिभाषक द्वारा बताया गया था कि परिवादी द्वारा जो राशि आरोपी को देना बताई हैं। वह राशि दी जाना प्रमाणित ही नहीं हुई हैं तथा कोई वैध वसूली योग्य ऋण ही नहीं हैं तो इसी स्थिति में आरोपी के विरुद्ध ट्रायल न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय भी स्थिर रखे जाने योग्य नहीं हैं तथा प्रकरण में उपलब्ध दस्तावेज तथा गवाह से भी परिवादी अपना प्रकरण प्रमाणित नहीं कर सकी तथा जो गवाह हुई हैं वह किसी भी प्रकार से विश्वसनीय नहीं हैं तथा सम्पूर्ण लेनदेन संदेहास्पद होकर परिवादिया के कथनों में अत्यधिक विरोधाभास है।

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आरोपी की और से उसके अभिभाषक द्वारा दिए गए तर्कों एवं बताए गए आधारों से सहमत होकर तथा अभिलेख पर उपलब्ध संपूर्ण मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर न्यायालय द्वारा यह माना गया कि विधि अनुसार परिवादी प्रकरण में उसके प्रारंभिक दायित्व को सिद्ध नहीं कर सकी हैं तथा उसके कथनों में विरोधाभास परिलक्षित होते हैं। ऐसी स्थिति में ट्रायल कोर्ट द्वारा अपीलार्थी/आरोपी को दण्डित करने में त्रुटि की हे। अतः आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है। आरोपी की और से पैरवी एडवोकेट हितेष कुमार दख ने की!