आखिर बाउंस हो गया क्रेडिट का ब्लैंक चेक… 

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आखिर बाउंस हो गया क्रेडिट का ब्लैंक चेक… 

कौशल किशोर चतुर्वेदी

यहाँ किसी को किसी भी तरह का आश्चर्य नहीं है। सत्ता पक्ष को भी यह अच्छी तरह से मालूम था कि

परिसीमन से सजा नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन बिल पारित नहीं हो पाना है। तो विपक्ष को ही मालूम था कि मोदी-शाह की अंतरात्मा की आवाज सुनने की अपील इस बार काम में आने वाली नहीं है। परिसीमन की ज्वाला इतनी तेज थी कि विपक्ष की आत्मा ने

संशोधन बिल को खारिज करवाने में ही अपनी खैरियत समझी। वैसे तो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो ही गया था। ऐसे में पांच राज्यों के चुनावों के बीच शायद संशोधन की कवायद की कोई खास अहमियत नहीं थी। और 2 अप्रैल 2026 को जब संसद का बजट सत्र

संपन्न हो रहा था तब ही सत्ता पक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति को सत्र अनिश्चितकालीन स्थगित करने की बजाय एक विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया गया था। तब भी विपक्ष ने यही सुझाव दिया था कि पांच राज्यों के चुनाव के बाद ही विशेष सत्र बुलाया जाए। पर तब सरकार ने

विपक्ष की आवाज को अनसुना कर दिया और अब विपक्ष ने संशोधन बिल पारित करने के लिए की गई सत्ता पक्ष की अपील को पूरी तरह से अनसुना कर दिया। और इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को

दिया गया क्रेडिट का ब्लैंक चेक बाउंस हो गया। आखिर यह तो होना ही था। पर यह बात भी खास है कि हार को भी उपहार में बदलने का खास जज्बा मोदी-शाह में है इस बात से विपक्ष भी इंकार नहीं कर सकता। ऐसे में आगामी एक सप्ताह में ही यह सामने आ जाएगा कि अंतरात्मा की आवाज़ पर संशोधन बिल पारित न करने का खामियाजा विपक्ष भुगतने वाला है अथवा सत्ता पक्ष को 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के अंधे मोह में पड़कर संशोधन बिल के सदन में औंधे मुँह गिरने का खामियाजा खुद ही भुगतना पड़ेगा।

मूल खबर इतनी ही है कि लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक खारिज हो गया, जिसमें महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33% आरक्षण का प्रस्ताव था। जिसके बाद अन्य दो बिलों को सरकार ने वापस ले लिया। बिल के पक्ष में 298 सदस्यों ने वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। कुल 528 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट नहीं मिल सके, जिसके कारण 54 वोटों से बिल गिर गया। प्रस्तावित संशोधन के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रावधान था। इसी तरह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जानी थीं, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। पर विपक्षी दलों के तीखे विरोध के बीच सरकार बिल को पास कराने में नाकाम रही।

तो संशोधन बिल पर 20 घंटे से ज्यादा बहस और अंतरात्मा की आवाज पर वोट की अपील भी सरकार के काम नहीं आ सकी। और लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक मतदान में 54 वोट से गिर गया है। महिला आरक्षण से जुड़े बिल पारित कराने के लिए दो तिहाई वोट का जादुई आंकड़ा छूना जरूरी था। पर इस बिल के गिर जाने के बाद सरकार ने इससे संबंधित दो अन्य बिल आगे नहीं बढ़ाए।

सरकार बड़े ही शोर-शराबे के साथ महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल लेकर आई थी। इस बिल के संसद में गिर जाने के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की महिला सांसदों ने मकर द्वार पर प्रोटेस्ट किया। पार्टी ने अब इसे लेकर 18 अप्रैल से राष्ट्रव्यापी प्रोटेस्ट का ऐलान कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने यह बिल गिरने के लिए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को क्रेडिट का ब्लैंक चेक देते हुए यह बिल पारित कराने में सहयोग की अपील की थी। पीएम मोदी ने वोटिंग से पहले एक्स पर पोस्ट कर सांसदों से अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की अपील की। यह अपील भी बेअसर साबित हुई।अमित शाह बोले कि विपक्ष को इसका खामियाजा भुगतना होगा। वहीं विपक्ष के सांसदों ने परिसीमन को विरोध का आधार बनाया। विपक्षी दलों के सदस्यों ने चर्चा के दौरान भी कहा कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन के विरोध में हैं। संविधान संशोधन बिल गिरने पर राहुल गांधी बोले कि भारत ने देख लिया इंडिया ने रोक दिया। हालांकि इन सबको मालूम है कि महिलाओं की राह में कोई भी रोड़ा नहीं बन सकता। देर- सबेर, महिलाओं को नीति और निर्णयों, में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी ही है। हालांकि यह विडम्बना ही है कि संशोधन बिल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष को दिया गया क्रेडिट का ब्लैंक चेक भी बाउंस हो गया है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।