
कूनो नेशनल पार्क में KGP12 के चारों शावकों की मौत,चीता परियोजना पर फिर उठे सवाल!
गणेश पांडे की विशेष रिपोर्ट
भोपाल। मप्र में वन्य प्राणियों की मौत का सिलसिला थम ही नहीं है। इसी कड़ी में मंगलवार को कूनो नेशनल पार्क में से आई बुरी खबर आई है।
12 मई की सुबह मादा चीता KGP12 के चारों शावकों की मौत से चीता परियोजना पर फिर सवाल उठ गए हैं।
वन विभाग के मुताबिक सोमवार शाम तक चारों शावक पूरी तरह सुरक्षित और सक्रिय नजर आए थे। मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे गश्ती टीम जब नियमित मॉनिटरिंग के लिए पहुंची, तब मांद के आसपास शावकों के शव पड़े मिले।
घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को सील कर जांच शुरू कर दी गई। राहत की बात यह है कि मादा चीता KGP12 पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ बताई जा रही है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की असली वजह साफ हो सकेगी।
इस घटना ने देश में चल रहे चीता पुनर्वास अभियान को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं, क्योंकि हाल के महीनों में कूनो में कई चीतों और शावकों की मौतें सामने आ चुकी हैं।
*जंगली जानवरों के हमले की आशंका*
11 अप्रैल को जन्मे ये शावक मांद के पास आंशिक रूप से खाए हुए मिले, जिससे किसी अन्य वन्यजीव के हमले की आशंका है, हालांकि मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा। प्रथम दृष्टया यह किसी अन्य हिंसक जानवर (संभवतः तेंदुए) द्वारा किया गया शिकार प्रतीत होता है। मादा चीता सुरक्षित है। शावकों की उम्र चारों शावक लगभग एक महीने की थी। मौत की सटीक वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच की जा रही है।
मादा चीता: मां (KGP12) सुरक्षित और स्वस्थ है, लेकिन अधिकारी उसके व्यवहार पर नजर रखे हुए हैं।





