Bandhavgarh Tiger Reserve in Dispute Again: नियम ताक पर रख वनराज ‘बजरंग’ की घेराबंदी कर फोटोग्राफी की, वायरल तस्वीरों से मचा हड़कंप!

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Bandhavgarh Tiger Reserve in Dispute Again: नियम ताक पर रख वनराज ‘बजरंग’ की घेराबंदी कर फोटोग्राफी की, वायरल तस्वीरों से मचा हड़कंप!

वन्यजीवियों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

गणेश पांडे की खास रिपोर्ट

भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय ख्यात प्राप्त बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला जंगल के राजा कहे जाने वाले नर बाघ “बजरंग” की कथित घेराबंदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इन तस्वीरों को लेकर वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि 6 जून 2026 को ताला जोन के पर्यटन क्षेत्र में बाघ बजरंग को कई जिप्सी वाहनों ने चारों ओर से घेर लिया। वायरल तस्वीरों में बाघ के दोनों ओर वाहन दिखाई दे रहे हैं, जबकि सामने फेंसिंग होने से उसकी आवाजाही सीमित नजर आ रही है। बाघ वाहनों से बेहद कम दूरी पर विचलित अवस्था में घूमता दिखाई देता है और पर्यटक मोबाइल फोन से लगातार फोटो व वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगातार नियमों की अनदेखी हो रही है। इसे अधिकारियों की लापरवाही माना जा रहा है।

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वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी जंगली जानवर, विशेषकर बाघ, को चारों तरफ से घेरना उसके प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप माना जाता है। इससे जानवर तनावग्रस्त हो सकता है और अप्रत्याशित प्रतिक्रिया दे सकता है। यदि ऐसी स्थिति में बाघ आक्रामक हो जाए तो बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

मोबाइल संदेशों से जुटा वाहन काफिला

सूत्रों के अनुसार ताला जोन के ए-रूट स्थित कबीर आश्रम क्षेत्र में, जहां बाघ द्वारा शिकार किए जाने की सूचना थी, वहां जिप्सी चालकों और कुछ वैकल्पिक गाइडों के बीच मोबाइल संदेशों के माध्यम से सूचना तेजी से प्रसारित हुई। इसके बाद कई वाहन एक साथ मौके पर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लगभग दस से बारह जिप्सियां क्षेत्र में मौजूद थीं, जिनमें कुछ शासकीय वाहन भी शामिल बताए जा रहे हैं।

बाघ शांत रहा, लेकिन सवाल बड़े हैं

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इतनी संख्या में वाहन एक ही स्थान पर कैसे एकत्रित हो गए? क्या मौके पर मौजूद जिम्मेदार अमले ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया? यदि बाघ ने भय या तनाव में कोई प्रतिक्रिया दी होती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यह केवल एक तस्वीर या वीडियो का मामला नहीं है, बल्कि यह बाघों की सुरक्षा, पर्यटन अनुशासन और रिजर्व क्षेत्र में नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।

निगरानी व्यवस्था कटघरे में

घटना के सामने आने के बाद बांधवगढ़ प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था और मैदानी स्तर की जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या पर्यटन क्षेत्र में नियमों का पालन प्रभावी ढंग से कराया जा रहा है या नहीं।

कार्रवाई की मांग

वायरल तस्वीरों के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित वाहन चालकों, गाइडों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

जांच एजेंसी पर नजर

बांधवगढ़ में सामने आई यह घटना केवल एक बाघ की घेराबंदी का मामला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा है, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में वन्यजीवों की सुरक्षा का दावा करती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिम्मेदार एजेंसियां इस पूरे प्रकरण पर क्या कार्रवाई करती हैं।

इनका कहना

इस प्रकार की घटना की जानकारी मेरे संज्ञान में आई है। हम दिखवाते हैं।
अनुपम सहाय
फील्ड डायरेक्टर, बांधवगढ़