Monday, January 27, 2020

Blog

नीलिमा चोहान

दिल्ली विश्वविध्यालय में कार्यरत रही ,कविता लिखती है 

अब कैसे पढूँगी कविता ' गुलाबी चूड़ियाँ '

अब कैसे पढूँगी कविता ' गुलाबी चूड़ियाँ '

मीडियावाला.इन। सात साल की बच्ची के पिता के वात्सल्य की कविता एक यौन उत्पीड़क कवि की कलम से लिखी जानकर ----------------------------------------------------------- कुछ रोज़ पहले की बात है एक दोस्त को मैं Neruda की कविता सुना रही थी कविता के...

कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी कोई फर्क नहीं पड़ता

मीडियावाला.इन। मुझे तुम्हारी गालियों से डर नहीं लगता तुम्हारे तमगे पहनकर निकलने से भी डरना बंद दिया है मैंने कुल्टा ,कलंकिनी , कुलछिनी या रंडी कोई फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी गढ़ी ये गालियां अब अर्थ नहीं पैदा करतीं कोई...