MP में 2 विधानसभा क्षेत्रों में हो सकते हैं उपचुनाव, जून और जुलाई में होने वाली सुनवाई पर नजर

26

MP में 2 विधानसभा क्षेत्रों में हो सकते हैं उपचुनाव, जून और जुलाई में होने वाली सुनवाई पर नजर

भोपाल: मध्यप्रदेश के दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की आहट तेज होती दिख रही है। एक सीट पर चुनाव कब करवाना है यह फिलहाल निर्वाचन आयोग के हाथ में हैं। जबकि एक अन्य सीट पर अंतिम निर्णय अदालत का फैसला आने के बाद ही होगा, लेकिन भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्तर पर उपचुनाव की संभावनाओं को मानते हुए तैयारी और रणनीति में जुट गए हैं।

सबसे अहम मामला बीना विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दायर याचिका में उन्हें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना बताया गया है। पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई अंतिम दौर में मानी जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 जून को तय है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि वे उनकी सदस्यता बरकरार रहती है या दल बदल के फेर में उनकी विधायकी जा सकती है। अदालत के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के सामने भी यह मामला लंबित है। हाईकोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाइन से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में संभव है कि विधानसभा अध्यक्ष ही इस मामले में कोई निर्णय ले सकते हैं।

दूसरी ओर दतिया विधानसभा सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है। यहां 2023 में कांग्रेस के टिकट पर जीते राजेंद्र भारती की सदस्यता एक आपराधिक मामले में सजा सुनाई जाने के बाद समाप्त कर दी गई है। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है, जहां से अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट दिल्ली में 29 जुलाई को अगली सुनवाई को होना है। फिलहाल यह सीट खाली हुए लगभग एक महीना हो चुका है और उपचुनाव कराने का अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग को लेना है।

वहीं विजयपुर सीट का मामला भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। यहां से कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शून्य घोषित कर भाजपा के रामनिवास रावत को विजेता ठहराया था। हालांकि मल्होत्रा ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से स्टे हासिल कर लिया। ऐसे में इस सीट पर फिलहाल स्थिति यथावत बनी हुई है।

कुल मिलाकर प्रदेश में तीन सीटों की तस्वीर अदालतों के फैसलों से जुड़ी हुई है। बीना और दतिया सीट पर उपचुनाव की संभावनाएं सबसे प्रबल मानी जा रही हैं, जबकि विजयपुर सीट का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। आने वाले महीनों में न्यायालयों के फैसले न केवल इन सीटों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे, बल्कि प्रदेश की सियासी दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।