
प्राचार्य को निलंबित करने के अधिकार कलेक्टर को नहीं, हाई कोर्ट ने रद्द किया आदेश
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कलेक्टर को द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ निलंबन आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि प्राचार्य के पद पर कार्यरत अधिकारी के मामले में निलंबन केवल सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है।
मामला बस्तर जिले में पदस्थ एक प्राचार्य एवं प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता बाल सिंह मांडवी बालोद ब्लॉक गुरुर शासकीय हाई स्कूल साहपुर प्राचार्य पद पर कार्यरत है। शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप के बाद कलेक्टर ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके खिलाफ संबंधित अधिकारी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्राचार्य एक द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी हैं और उनके नियुक्तिकर्ता अथवा अधिकृत अनुशासनात्मक प्राधिकारी के अलावा कोई अन्य अधिकारी निलंबन आदेश जारी नहीं कर सकता। अदालत ने माना कि कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कानूनी सिद्धांत पहले से स्थापित है कि कलेक्टर को राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की शक्ति प्राप्त नहीं है। राज्य सरकार द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचनाओं के अनुसार ऐसे अधिकारियों के संबंध में कार्रवाई का अधिकार संभागायुक्त या अन्य सक्षम प्राधिकारी को है।
फैसले में हाई कोर्ट ने निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हो तो राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी नियमों के अनुरूप नई कार्रवाई कर सकते हैं।
यह निर्णय प्रशासनिक अधिकारों की सीमा को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है और भविष्य में राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।





