चिड़िया का घर बनी ई-बाइक: 25 दिन तक वाहन नहीं चलाया, चूजों के उड़ते ही पूरी हुई किसान की प्रतीक्षा  

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चिड़िया का घर बनी ई-बाइक: 25 दिन तक वाहन नहीं चलाया, चूजों के उड़ते ही पूरी हुई किसान की प्रतीक्षा

खरगोन : आज के दौर में जहां इंसान अपनी सुविधा के लिए प्रकृति से लगातार समझौते करता जा रहा है, वहीं खरगोन जिले के कसरावद में एक किसान ने संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व और पशु-पक्षी प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।

अरिहंतनगर निवासी किसान सत्येंद्र यादव की ई-बाइक पिछले 25 दिनों तक सड़क पर नहीं, बल्कि एक चिड़िया के परिवार की सुरक्षा के लिए खड़ी रही। दरअसल, करीब 25 दिन पहले एक काली चिड़िया ने उनकी ई-बाइक के अगले हिस्से को सुरक्षित समझकर वहां तिनके जोड़कर घोंसला बनाना शुरू किया। कुछ ही दिनों में उसने दो अंडे दिए और उन्हें सेने लगी।

सत्येंद्र यादव ने जब यह देखा तो उन्होंने अपनी जरूरतों से पहले उस नन्हे जीवन को महत्व दिया। उन्होंने ई-बाइक का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया ताकि अंडों और बाद में निकलने वाले चूजों को किसी प्रकार का खतरा न हो। लगभग 12 दिन बाद अंडों से दो नन्हे चूजे बाहर आए। इसके बाद चिड़िया का जोड़ा दिनभर बाइक के आसपास मंडराता रहता और बारी-बारी से दाना लाकर बच्चों को खिलाता रहता ।

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इस दौरान ई-बाइक एक जगह खड़ी रही और उस पर धूल की परत तक जम गई, लेकिन यादव ने उसे हटाना भी उचित नहीं समझा। खेती-बाड़ी और अन्य जरूरी कामों के लिए उन्होंने दूसरी पेट्रोल बाइक की व्यवस्था की, ताकि चिड़िया का बसेरा सुरक्षित बना रहे।

शुक्रवार को जब दोनों चूजे अपने पंखों के सहारे उड़ान भरने में सक्षम हो गए और घोंसला छोड़कर खुले आसमान की ओर निकल पड़े, तब जाकर सत्येंद्र यादव ने अपनी ई-बाइक का उपयोग शुरू किया। उनकी 25 दिन की प्रतीक्षा और ममता भरी निगरानी सफल हुई।

सत्येंद्र यादव कहते हैं कि मनुष्य प्रकृति से आवश्यकता से अधिक ले रहा है, जबकि पशु-पक्षी केवल अपनी जरूरत भर का उपयोग करते हैं। पेड़ों की लगातार कटाई के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास कम होते जा रहे हैं, इसलिए वे रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षित स्थान तलाशने को मजबूर हैं।

कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी स्कूटी को चिड़िया के घर में बदलते और एक व्यक्ति को उसके लिए अपनी सुविधा त्यागते देखा है। यह घटना केवल पक्षी प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संवेदनशील सह-अस्तित्व का प्रेरक संदेश भी है।