मतदाता जो न कराए सो कम है...कुत्ता, कमीना, पापी, नंगा-भूखा और क्या बचा ...?

मतदाता जो न कराए सो कम है...कुत्ता, कमीना, पापी, नंगा-भूखा और क्या बचा ...?

मीडियावाला.इन।

मध्य प्रदेश में होने वाले 28 विधानसभा उपचुनाव में नेताओं ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी है। मतदाताओं के सामने विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए जहाँ उन्हें कई स्तरहीन संज्ञाएँ दी गई तो मतदाताओं को रिझाने और ख़ुद को वफादार साबित करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तो ख़ुद ही कुत्ता बनना स्वीकार कर लिया। इसके बावजूद विरोधियों को शांति नहीं मिली और उन्हें याद दिलाया कि एक कुत्ता उस नस्ल का होता है जो ख़ुद ही अपने मालिक को खा जाता है यानि कुत्ता भी ग़द्दार होता है। एक बात और है कि चुनाव जीतने के लिए नेता एक दूसरे को कुछ भी बोल लें और आरोप-प्रत्यारोप कर लें लेकिन उनके ख़िलाफ़ ऐसी भाषा का प्रयोग करने का दुस्साहस ख़ुद मतदाता कभी नहीं जुटा सकता। यदि गलती से भी किसी के मुँह से इस तरह के अपशब्द निकल जाएँ तो उसकी जान पर ही बन आए।पर चुनावी वेला में नेता एक-दूसरे पर इस तरह के तंज कसकर मानो शिष्टाचार और वक़्त की माँग की ही पूर्ति करते हैं। इस उपचुनाव में मर्यादा, गरिमा और शिष्टाचार के पतन की जितनी आशंका जतायी जा रही थी, नेताओं ने एक-दूसरे पर कटाक्ष करते हुए उन सभी सीमाओं को लाँघ दिया। कुत्ता, कमीना, पापी, नंगा-भूखा, पैरों की धूल नहीं, ब्लैकमेलर, ग़द्दार-वफ़ादार, बिकाऊ-टिकाऊ जैसे संबोधन भी इस उपचुनाव में कम पड़े तो दिग्गजों की पत्नियों को भी चुनावी समर में घसीटा गया। अब बात यही है कि मतदाता और सत्ता पाने की मंशा जो न कराए सो कम है। मतदाता और नेता का चुनावी दौर में आपसी संबंध प्रेमी- प्रेमिका की तरह ही हो जाता है। मतदाताओं का प्रेम पाने के लिए नेता कुछ भी बनने को तैयार रहता है। फिर भी प्रेम न  मिले तब भी मतदाता रूपी प्रेमिका को बेवफ़ा कहने की जुर्रत भी नेता नहीं जुटा पाते, क्योंकि मतदाता का दुलार पाने की ललक उन्हें बराबर बनी रहती है।अभी नही तो कभी बाद में मिलेगा, यह उम्मीद भी काफ़ी सहारा देती है।

परिणाम कुछ भी हों लेकिन प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवम्बर को मतदान करने वाले मतदाता कड़ी परीक्षा देने जा रहे हैं। अब मतदाताओं की सोच और समझ को व्यक्तिगत मेल-मिलाप के ज़रिए ही बदलने की अंतिम कोशिश की जा सकती है। मूल मुद्दा बिकाऊ-बिकाऊ-बिकाऊ ही अंत तक बना रहा। चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री या कांग्रेस की मानें तो भावी मुख्यमंत्री कमलनाथ का स्टार प्रचारक का दर्जा ऐन चुनाव प्रचार ख़त्म होने के दो दिन पहले ही छीनकर मैसेज देने की कोशिश की लेकिन अगर आयोग संज्ञान लेता तो शायद ज़्यादातर स्टार प्रचारकों की शामत आ जाती। हालाँकि कांग्रेस के विरोध के बाद ‘आइटम’ शब्द के विरोध में आक्रोशित हुईं मंत्री इमरती देवी को भी आयोग के आक्रोश का शिकार होना पड़ा।निश्चित तौर पर यह उपचुनाव प्रचार के मामले में व्यक्तिगत तौर पर कीचड़ उछालने के लिए भी विशेष तौर पर याद किए जाएंगे।जहाँ मर्यादा की सारी सीमाएं टूटती हुई साफ़ दिखाई दीं।

*भ्रम दूर करेंगे यह उपचुनाव ... *

कांग्रेस ने भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आरोपपत्र पेश किया तो भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा फैलाया जाने वाला भ्रम बताया।और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पत्रकार वार्ता के ज़रिए कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर आरोपों की झड़ी लगा दी। यदि इसे यह कहा जाए कि भ्रम का जवाब देने के लिए भ्रम का ही सहारा लिया गया, तो ठीक ही है। क्योंकि अक्सर ही हर चुनाव के पहले राजनैतिक दल एक दूसरे पर जिस तरह आरोपों की बौछार करते हैं, सरकार किसी की भी बने लेकिन बाद में कार्रवाई के नाम पर ढाक के तीन पात ही निकलते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ एक सपा प्रत्याशी से बात करने का ऑडियो जारी हुआ तो भाजपा ने ख़रीद फ़रोख़्त का आरोप कांग्रेस पर लगाकर पासा पलटने की कोशिश की लेकिन जवाबी हमले में पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ही 50 करोड़ व मंत्री बनाने का ऑफ़र देने की बात कह ख़रीद फ़रोख़्त का गंभीर आरोप जड़ दिया। नंगे- भूखे, पैरों की धूल नहीं, आइटम, ग़द्दार, कमरनाथ,बंटाढार आदि जुमलों सहित सरकार और व्यक्तिगत तौर पर घोटालों के आरोपों की झड़ी लगाने में दोनों ही दलों के नेताओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी।अब क़यास लगाए जा रहे हैं और दावे किए जा रहे हैं। तीन नवंबर को मतदान के बाद एक बार फिर अलग अलग सर्वे यह दावा करेंगे कि किस दल को कितनी सीटें मिलने जा रही है लेकिन मतदाता मौन है। राजनैतिक दल, प्रत्याशी और उनके समर्थक मुखर है।

*अपने-अपने दावे -*

28 में से 25 विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के इस्तीफ़ा देकर भाजपा से चुनाव लड़ने का दृश्य दिखा रहे हैं। कांग्रेस का चुनावी एजेंडा मुख्य रूप से इसके इर्द-गिर्द ही केंद्रित है। यहीं से मतदाताओं को बिकाऊ-टिकाऊ और ग़द्दार-वफ़ादार का संदेश देने की कोशिश कांग्रेस ने की है।कांग्रेस ने इसके अलावा 15 महीने के कामों और भाजपा पर लगाए गए घोटालों के आरोप को अपना मूल आधार बनाया है। साथ ही भाजपा सरकार के पिछले 15 साल और वर्तमान सात महीने के कामों पर सीधा निशाना साधकर मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।
तो भारतीय जनता पार्टी ने 15 महीने की कांग्रेस सरकार में हुई गड़बड़ियों और सात महीने के भाजपा सरकार के कामों के साथ ही कांग्रेस कार्यकाल में हुए घोटालों, किसानों,गरीबों के मामले में कांग्रेस की ग़लत सोच और असफलता, बल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बनाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मतदाताओं का मन भाजपा के पाले में लाने की कोशिश की है।

*मतदाता की कड़ी परीक्षा -*

ख़ैर तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों और स्टार प्रचारकों द्वारा उड़नखटोलों में उड़-उड़कर मतदाताओं को रिझाने का समय अब ख़त्म हो चुका है। रंगमंच पर स्टार प्रचारकों के अभिनय का दौर ख़त्म हो चुका है। मतदाताओं ने भी सभी अभिनेताओं की भूमिकाओं को क़रीब से देखा है। कम अवधि और दीर्घावधि की फ़िल्मों पर तालियां भी ख़ूब बजायी हैं लेकिन मतदाता अब यह बताने जा रहे हैं कि किस फ़िल्म की स्क्रिप्ट बेहतर है और किसकी फ़्लॉप हैं। मतदाताओं का फ़ैसला जहाँ राजनैतिक दलों के भ्रम को दूर करेगा लेकिन बटन दबाने तक मतदाताओं को भी कड़ी अग्नि परीक्षा के दौर से गुज़रना होगा। कमलनाथ की आँखों के सामने मुख्यमंत्री की कुर्सी है तो शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मतदाताओं को सिंधिया घराने का ही वास्ता दे दिया है तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उमा भारती, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, अजय सिंह, अरुण यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा सहित दर्जनों नेताओं ने भी मतदाताओं को मोहने के लिए कड़ा परिश्रम किया है। पर अब यह तय हो चुका है कि प्रदेश के आने वाले चुनावों में शाब्दिक और व्यक्तिगत मर्यादा नाम की चिड़िया आसमान में ही उड़ती नज़र आएगी। नेता कुत्ता, कमीना, पापी वग़ैरह वग़ैरह संज्ञाओं के साथ व्यक्तिगत आरोपों और घोटालों की माला पहनकर ज़मीन पर विचरण करते रहेंगे।सत्ता के सिंहासन तक पहुँचने के लिए ज़ोर-आज़माइश का सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के जाने-माने पत्रकार हैं। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में लंबा अनुभव है। फिलहाल एसीएन भारत के स्टेट हेड हैं। इससे पहले स्वराज एक्सप्रेस (नेशनल चैनल) में विशेष संवाददाता, ईटीवी में संवाददाता,न्यूज 360 में पॉलिटिकल एडीटर, पत्रिका में राजनैतिक संवाददाता, दैनिक भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ, एलएन स्टार में विशेष संवाददाता के बतौर कार्य कर चुके हैं। इनके अलावा भी नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित विभिन्न समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन किया है।

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