बोहरा समाज का महाकुंभ इंदौर में मुझे याद आ रहा था 52वें धर्मगुरु के स्पर्श वाला रुमाल

बोहरा समाज का महाकुंभ इंदौर में मुझे याद आ रहा था 52वें धर्मगुरु के स्पर्श वाला रुमाल

इसे बोहरा समाज का महाकुंभ कहना ज्यादा बेहतर होगा। जिन सैयदना की एक आहट सुनने को समाज बैचेन रहे वो सैयदना करीब डेढ़ पखवाड़े के लिए उज्जैन होते हुए इंदौर आए हैं।देश ही नहीं विश्व में विभिन्न जगहों पर बसे बोहराजनों की आवाजाही का केंद्र बना रहेगा इंदौर। ट्रेन से उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने मजारे नजमी में जियारत की। पहले रहे धर्मगुरुओं में से यहां कुछ की मजारें हैं।बोहरा समाज के लिए धर्मगुरु और उनके स्थानीय प्रतिनिधि आमिल सा द्वारा कही बात पत्थर की लकीर होती है।

इंदौर में करीब 25 लाख बोहरा बसे हुए हैं, सैफी नगर इनकी बसाहट का मुख्य केंद्र इसलिए भी बन गया है कि 52 वें धर्मगुरु डॉ बुरहानुद्दीन 1986 और 2002 में अशारा मुबारक वाअज के लिए आ चुके हैं। अब उनके पुत्र-समाज के 53वें धर्मगुरु डॉ सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन आए हैं। मुहर्रम के दौरान 12 से 20 सितंबर तक  मुबारक वाअज फरमाएंगे।

उनके इस्तकबाल में लोकसभा स्पीकर से लेकर सांसद कांतिलाल भूरिया, महापौर मालिनी गौड़ आदि कह रहे थे कि डॉ बुरहानुद्दीन साहब ने हमें उपहार दिए थे, वो कलम, वो शाल सहेज कर रखी है। 

मुझे भी याद आ रहा था कि जब 1986 में  एयरपोर्ट पर अगवानी के दौरान डॉ बुरहानुद्दीन के हाथ पर रुमाल रख कर उनका हाथ चूमा था तो बाद में मैंने वह रुमाल एयरपोर्ट के बाहर हजारों बोहराजनों की भीड़ में खड़ी उस वृद्धा को दे दिया था जो अपने बीमार पुत्र को उनके दीदार के लिए लेकर आई थी। दीदार से बढ़कर उसे बेतहाशा खुशी हो रही थी कि आका मौला के स्पर्श किया रुमाल उसे मिल गया। मेरे सिर पर हाथ फेरते, जाने कितने आशीर्वाद देते हुए उसकी आंखों से अविरल आंसू बह रहे थे। 

52वें धर्मगुरु की स्वागत सभा को कवर करने के बाद आज 53वें धर्मगुरु को सुनने, उनकी बात लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिला।ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा के समीप मैदान में बनाए डोम में संबोधित करते हुए धर्मगुरु डॉ सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन कौम के लोगों से कह रहे थे सब मिलजुल कर रहें। खुशहाल जिंदगी गुजारें, एक हुसैन के गम के सिवा कोई गम ना रहे। हजरत पैगंबर ने सिखाया है सफाई पसंद रहें।इंदौर शहर की तरह आप सब दिल से भी साफ रहें। हमने यहां खूब हरियाली देखी, खुदा आप सब को भी हरा-हरा रखे।

आयोजन स्थल पर समाज के वालिंटियर ने सुरक्षा, ट्रैफिक सहित अन्य व्यवस्था संभाल रखी थी।समाज के बैंड स्वागत धुन बजा रहे थे। सैयदना की अगवानी बोहरा समाज के स्थानीय आमिल शब्बीरभाई जमाली के नेतृत्व में समाज के प्रमुखजनों ने की।सैयदना ने मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का शाल पहनाकर सम्मान किया।

सैयदना साहब ने दुआईया कलेमात फरमाते हुए कहा 

कि इंसानियत की भलाई के लिए पुरजोर कोशिश करना चाहिए, कुरान में इंसानियत के लिए कुरबानी देने तक का जिक्र है। एक अरसे से आप लोग अर्ज कर रहे थे, आप सब की मुहब्बत यहां खींच लाई। 

समाज के लोगों को उन्होंने सलाह दी कि जिस भी वतन में रहो, वफादार शहरी बन कर रहो।किसी के लिए बुरा न सोचे और किसी के लिए बद्दुआ न करें।सगली कौम हिली-मिली ना रहे। चेहरो तमारो हंसतो रहे।सब के दिलों में मोहब्बत कायम रहे, हम यही पैगाम देने आए हैं।सैयदना साहेब ने प्रदेश शासन द्वारा दिये गए सहयोग की प्रशंसा करते हुए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। सैयदना साहेब के दीदार करने शहर के राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्र के वरिष्ठजन भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम  उपस्थित थे। समाजवासी मौला मौला मुफ्फद्दल मौला की सदाऐ बुलंद कर रहे थे व सैयदना साहेब की उम्र दराजी की दुआ कर रहे थे। 

सैयदना साहब के दीदार करने देवास, कुक्षी, बड़वानी, रतलाम, महु, डही, खरगोन, खंडवा, अालीराजपुर, बुरहानपुर आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजवासी इंदौर आऐ थे। डही के समाजवासी मौला डही पधारो की तख्तिया लेकर  सैयदना साहब से डही तशरीफ लाने की अर्ज कर रहे थे। सैयदना साहेब शुक्रवार को मसाकिन सोफिया की नव निर्मित मस्जिद का शुभारंभ कर जौहर व अशर की नमाज अदा कराऐंगे।

कभी पांडाल  मौला मौला तो कभी आंखों में आंसू 

लिए या हुसैन की मातमी आवाज से गूंजता रहा 

उन्होंने कौम के लोगों से कहा एक हुसैन के गम के सिवा कोई गम ना रहे तो सारा पांडाल या हुसैन-या हुसैन की मातमी आवाज से गूंज उठा। बच्चे, जवान, बूढ़ों की आंखों से आंसू थे और जोर जोर से सीने पर हाथ मारते हुए या हुसैन कह रहे थे। 

सैयदना जब मंच पर पहुंचे तो समाजजन मौला मौला मुफ्फद्दल मौला की सदाऐ बुलंद करने के साथ ही उनकी  उम्र दराजी के लिए दुआ कर रहे संचालक सहित पांडाल में मौजूद कई लोगों के आंसू बह रहे थे।सैयदना का स्वागत लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, महापौर मालिनी गौड़, सांसद कांतिलाल भूरिया, राज्य सरकार के प्रतिनिधि सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, विधायक जीतू पटवारी ने किया। सैयदना को यह भी बताया कि उनके पिता-52वें धर्मगुरु के दीदार और उनसे उपहार का भी संयोग मिला है। 

अनुशासन और सफाई का इंतजाम 

पांडाल में अनुशासन और सफाई को लेकर बेहतर इंतजाम थे। जगह जगह इंदौर सफाई में नंबर वन के पोस्टर ही नहीं लगे थे, इसका पालन भी नजर आ रहा था। मीडिया व आमंत्रित जनों को नाश्ते के पैकेट बांटने के बाद  हाथों में पोलीथिन बेग लिए वॉलिंटियर हाथों हाथ कचरा भी एकत्र करते जा रहे थे। 

महापौर मालिनी गौड़ ने सफाई में नंबर वन रहने के लिए इंदौर के नागरिकों का आभार माना। सहकारिता मंत्री ने उन्हें तलवार भेंट करने के साथ ही भोपाल आने का अनुरोध किया।

इंदौर में ट्रांसपोर्ट नगर चौराहा के समीप बने डोम में सैयदना को फूल भेंट करते बच्चे। 

आका मौला के दीदार की खुशी में आंखें छलक पड़ी। 


उज्जैन में मजारे नजमी में जियारत के बाद फोटो: काईद जौहर 

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कीर्ति राणा

क़रीब चार दशक से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा लंबे समय तक दैनिक भास्कर ग्रुप के विभिन्न संस्करणों में संपादक, दबंग दुनिया ग्रुप में लॉंचिंग एडिटर रहे हैं।

वर्तमान में दैनिक अवंतिका इंदौर के संपादक हैं। राजनीतिक मुद्दों पर निरंतर लिखते रहते हैं ।

सामाजिक मूल्यों पर आधारित कॉलम ‘पचमेल’ से भी उनकी पहचान है। सोशल साइट पर भी उतने ही सक्रिय हैं।


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