भाजपा टाइटैनिक या आई एन एस विक्रांत ?

भाजपा टाइटैनिक या आई एन एस विक्रांत ?

मीडियावाला.इन।

देश की राजनीति में जब जिस दल का कद बढ़ा होता है,उससे अपेक्षाएं भी इतनी ज्यादा होती है और शिकायतें भी । भाजपा के साथ इन दिनों वैसा ही सब कुछ घटित हो रहा है। उसे छींक भी आती है तो देश भर का सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं से भर जाता है।भारतीय राजनीति के इस सबसे बड़े कुनबे में इन दिनों बर्तनों की खड़खड कुछ ज्यादा ही हो रही है। जिससे यह माना जाने लगा है कि 2024 का आम चुनाव भाजपा के लिए 2019 जितना आसान नहीं रहने वाला । वैसे तो तब भी उसकी राह मुश्किल मानी जा रही थी,किन्तु उसने नए कीर्तिमान कायम करते हुए दोबारा सत्ता हासिल कर ली थी। फिर भी इस बार स्थितियां अलग हैं और भाजपा ने मुगालते पाले तो विपरीत परिणाम रुक नहीं पाएंगे। मप्र,बंगाल और उप्र के हालात से मिल रहे संकेत भाजपा नेतृत्व के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। इसमें एक तरफ विपक्ष के तेज हमले और असहयोग का मसला है तो दूसरी तरफ आंतरिक अनुशासन को बनाए रखने वाली भाजपा में सब पहले जैसा नहीं रह जाना भी सिरदर्द बन रहा है।
     देखा जाए तो 2021 की शुरुआत से ही भाजपा का चौघड़िया कुछ ठीक नहीं चल रहा है। बमुश्किल दो महीने बीते थे कि  मार्च के शुरु होते ही कोरोना  की दूसरी लहर ने कहर मचाना प्रारंभ कर दिया था। उधर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव की नैया बीच धार में आ चुकी थी । ऐसे हालात सत्तारूढ़ दल के लिए इधर खाई,उधर पहाड़ जैसे हो गए। अंततः अप्रैल में संक्रमण में आए उफान ने सरकार और भाजपा को चारों तरफ से घेर लिया। उससे जैसे,तैसे निपटे ही थे कि राज्यों में भाजपा के अंदर से और विपक्ष द्वारा भी बैचेनी पैदा की जाने लगी है।
     इन दिनों मप्र और उप्र भाजपा से जो संदेश केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच रहे हैं वे राख के नीचे चिंगारी की आशंका जता रहे हैं। इसकी शुरुआत जून के आरंभ से हुई।चौथी बार मप्र के मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान एक साल बीत जाने के बावजूद पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो पाए हैं। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव एकतरफा उनके साथ नहीं है। रही,सही कसर दमोह उप चुनाव के नतीजे ने कर दी,जिसमें कांग्रेस से आए व्यक्ति को भाजपा का टिकट देने से पहले नाराजी उपजी,फिर बुरी तरह हार हो गई। इससे उबरे भी नहीं थे कि भोपाल में भाजपा के नेताओं की मेल,मुलाकातों ने नौतपा जैसी गर्माहट घोल दी। करीब छह साल से राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर पहले हरियाणा,फिर पश्चिम बंगाल भेजे गए कैलाश विजयवर्गीय तीन दिन भोपाल क्या रहे,जैसे भाजपा के अंदरखाने हलचल मच गई। अरसे बाद अपने गृह प्रदेश लौटे विजयवर्गीय ने शिवराज के साथ,,साथ नरोत्तम मिश्रा,संगठन महामंत्री सुहास भगत,प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा आदि से मुलाकात की और चल पड़ा अनेक तरह की अटकलों का सिलसिला।भोपाल से वे दिल्ली पहुंचे तो केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल,नरेंद्र सिंह तोमर वगैरह से भी जब मिले तो अटकलों को नए आयाम मिल गए। इधर भोपाल में प्रदेश संगठन प्रभारी शिवप्रकाश का आना और उनका मिलना,जुलना भी चर्चा में रहा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा भी इस बीच भोपाल आकर नेताओं से मिले। वैसे मेल,मुलाकात करने वाले नेताओं की ओर से बयान आए हैं कि शिवराज मुख्यमंत्री थे,हैं और रहेंगे। बाकी भविष्य की गर्त में है।
     उधर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की राजनीति में भी काफी खदबदाहट हो रही है। वहां पहले अप्रैल, मई में फैले कोरोना से हुई मौतों और लाशों को गंगा आदि नदियों में बहने का हल्ला मचा । उसी दौरान हुए पंचायत चुनाव में भाजपा को मिली शिकस्त ने जैसे आग में घी का काम किया। भाजपा के भीतर ही जो लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पसंद नहीं करते थे,वे मुखर होने लगे। योगी ने भी आलाकमान को तेवर दिखाने शुरू कर दिए,ऐसे संकेत आने लगे। जैसे, कुछ अरसा पहले केंद्र से सेवा निवृत्ति लेकर आई ए एस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा को लखनऊ भेजा गया था,ताकि वे वहां राजनीतिक जिम्मेदारी संभालते हुए एक तरफ नौकरशाही को नियंत्रित करें तो दूसरी तरफ ब्राहमण वोट बैंक को साधे। इस पहल से योगी की नाराजी रही और उन्होंने सीधे तौर पर शर्मा की उपेक्षा कर दी । संभावना थी कि उन्हें उप मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा,वह तो धरा रह गया, होगी ने उन्हें वह शासकीय आवास तक नहीं दिया,जिसे शर्मा ने मांगा था। इसे सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से टकराव माना गया।
    उप्र में भाजपा के बीच मची हलचल अब तो सतह पर दिखाई देने लगी है।  हाल ही में उप्र सरकार ने कुछ विज्ञापन जारी किए तो उनमें मोदी के फोटो गायब रहे। इसने योगी,मोदी टकराहट को हवा ही दी। इतना ही नहीं तो योगी के मुख्यमंत्री बनने के पहले दिन से खफा रहे उप्र भाजपा के दमदार नेता स्वतंत्र देव सिंह उन विज्ञापनों में नजर आए,जिनमें मोदी नहीं थे। इसी बीच 9 जून को उप्र के कांग्रेस नेता नितिन प्रसाद ने दिल्ली जाकर भाजपा की सदस्यता ले ली। वे उप्र के ब्राहमण नेता हैं और उनके पिता जितेन्द्र प्रसाद आजीवन कांग्रेस नेता रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे। उप्र की राजनीति यादव,दलित,ठाकुर और ब्राहमण के इर्द,गिर्द घूमती है।
    पश्चिम बंगाल भी भाजपा और मोदीजी को चैन नहीं लेने दे रहा है। पहले तो वहां नतीजे आने के साथ ही तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं,समर्थकों को चुन,चुन कर मारा,लूटा,आगजनी की ।इसे रोकने के लिए ममता बनर्जी ने लॉक डाउन लगा दिया,ताकि समर्थक थोड़ा रुक जाएं और भाजपा को भी तात्कालिक राहत रहे। फिर उसने भाजपा नेताओं के खिलाफ पुलिस प्रकरण का सिलसिला प्रारंभ कर दिया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हरा चुके सुवेंदू अधिकारी और उनके भाई सौमेंदू के खिलाफ राहत सामग्री चुराने के आरोप में एफ आई आर हो चुकी है तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और अर्जुन सिंह के खिलाफ क्रमशः 65 और 70 प्रकरण लंबित होने की बात पुलिस कह चुकी है।जाहिर सी बात है कि तलवार लटका दी गई है। जब ममता की मर्जी होगी,वह गिरा दी जाएगी। इसी तरह से चुनाव पूर्व तृणमूल से भाजपा में आए कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के घर वापसी की अटकलें भी चल पड़ी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नाम मुकुल रॉय का है,जो इस समय भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उनके साथ शमिक भट्टाचार्य और राजीव बैनर्जी के नाम भी लिए जा रहे हैं। इसी बीच भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाएं भी चल पड़ी है,जिनमें मुकुल रॉय को शरीक करना बताया जा रहा है। दरअसल ये चर्चाएं प्रारंभ हुई ममता के भतीजे अभिषेक के मुकुल रॉय की पत्नी को अस्पताल में देखने जाने के बाद।वे करीब एक माह से भर्ती हैं,लेकिन तब तक कोई भाजपा नेता उन्हें देखने नहीं गया था।जैसे ही अभिषेक पहुंचे तो पीछे,पीछे सारे काम छोड़कर दिलीप घोष भी पहुंचे,लेकिन तब तक काफी दर हो चुकी थी।
   इस तरह से भाजपा का जहाज तूफान में फंसता नजर आ रहा है। बंगाल की लड़ाई लंबी है। उप्र में फरवरी ,मार्च में विधानसभा चुनाव हैं,जहां अहम का टकराहट गहरा गड्ढा कर सकता है। मप्र में भी सियासी हलचल वातावरण को अशांत तो कर ही चुकी है। इन सारी उठापटक के बीच दिल्ली में 3 दिन तक  राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बैठक हुई। इस तरह की बैठकों से राजनीतिक तकाजों का कभी जिक्र बाहर नहीं आता,किन्तु माना तो यही जा रहा है कि उसमें उप्र के चुनाव को लेकर अहम फैसले लिए गए। जिसमें यह भी है कि वहां चुनाव तक तो योगी का चेहरा ही सामने रहेगा।
    कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 2024 के आम चुनाव तक भाजपा को बाहरी और भीतरी हमलों का खतरा बना रहेगा। ऐसे में भाजपा का जहाज टाइटैनिक बनेगा या विक्रांत की तरह तूफान से टक्कर लेकर भी सलामत रहेगा?
#raman#bjp

रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

स्थानीय संपादक - पीपुल्स समाचार,इंदौर                               

संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                            

प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

शहर संपादक - नईदुनिया, इंदौर

समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर 

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।



 


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