Saturday, December 14, 2019
वक़्त और पैसे की बर्बादी का 'मलाल'

वक़्त और पैसे की बर्बादी का 'मलाल'

मीडियावाला.इन।

इस शुक्रवार कुछ नया नहीं घटा। न निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट में, न बॉक्स ऑफिस में। बजट 90 के दशक का है और फ़िल्म भी। संजय लीला भंसाली की भानजी और जावेद जाफरी के बेटे को लेकर गुलशन कुमार के भाई किशन कुमार ने 15 साल पुरानी तमिल फिल्म '7जी रेनबो कॉलोनी' का जो रीमेक बनाया है उसे देखना न देखना बराबर है।

 

'मलाल' संजय लीला भंसाली की फिल्म तो है लेकिन उस भंसाली की नहीं जो देवदास, हम दिल दे चुके सनम, खामोशी, पद्मावत और बाजीराव मस्तानी जैसी फिल्में बना चुके हैं।  इस फिल्म का निर्देशन किया है मंगेश हड़ावले ने। मंगेश की 12 साल पहले आई मराठी फिल्म 'टिंग्या' पसंद की गई थी। मलाल प्रेम में पगी हुई कहानी पर है, जिसका अंत अनपेक्षित होता है। तमिल और हिन्दी फिल्मों की पृष्ठभूमि अलग है। 

 

मलाल की पृष्ठभूमि  मुंबई की अंबेवाड़ी चाल है। मराठीभाषी लड़का अपने दोस्तों के साथ आवारागर्दी करता है और फिर इश्क में पड़ जाता है। उसे उत्तर भारतीयों से नफरत है, पूरी  हिन्दी पट्टी के लोग पसंद नहीं हैं, लेकिन पड़ोसन आस्था त्रिपाठी से मिलने के बाद उसका ख्याल बदल जाता है। दोनों में चाहत की दरकार, तकरार, इकरार, इंकार, इसरार...न जाने क्या-क्या होता है और अंत  प्रेम के अनेक रास्तों से गुजरती हुई फिल्म अनपेक्षित मोड़ पर खत्म हो जाती है। जावेद जाफरी का बेटा मीज़ान मेहनती है, भंसानी की भानजी शर्मिन मामा के भरोसे है, इस फिल्मी बाज़ार में टिक नहीं पाएगी।

 

'मलाल' देखें, या न देखें - कुछ मिस नहीं करेंगे।

 

 

 

0 comments      

Add Comment


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।