दलित दूल्हा दुल्हन को मंदिर प्रवेश न करने देने को लेकर विवाद, पंचायत के फैसले पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप

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दलित दूल्हा दुल्हन को मंदिर प्रवेश न करने देने को लेकर विवाद, पंचायत के फैसले पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप

खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के गोगावां थाना क्षेत्र के पाडल्या गवली गांव में एक नवविवाहित दलित दंपति ने आरोप लगाया है कि उन्हें स्थानीय हनुमान मंदिर में प्रवेश से रोका गया और बाद में पंचायत के फैसले के तहत उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया।

किसान और ढोलक बजाने वाले निर्मल कनाडे ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में आरोप लगाया कि वह अपने विवाह के बाद शुक्रवार को अपनी पत्नी और परिजनों के साथ मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे। लेकिन समिति ने मंदिर के गेट बंद कर दिए गए और उन्हें बाहर ही पूजा करने के लिए कहा गया। इसके बाद डायल 112 पर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची और मंदिर खुलवाकर दंपति को पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी गई।

खरगोन के एसपी रवींद्र वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही अहीरखेड़ा पुलिस चौकी प्रभारी को मौके पर भेजा गया था और मंदिर खुलवा कर दूल्हा दुल्हन और परिजनों को दर्शन व पूजा पाठ करवा दिए गए थे।

वहीं, मंदिर खुलने के बाद विवाद और बढ़ गया। गोगावां थाना प्रभारी दीपक यादव के अनुसार, दूसरे पक्षों ने आपत्ति जताई कि निर्धारित समय के बाद मंदिर खुलवाया गया और विशेष व्यवस्था कर दर्शन कराए गए।

पटेल, बंजारा, गवली सहित अन्य समाज के वरिष्ठ लोगों ने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि मंदिर के दर्शन का समय समाप्त हो गया था, इसलिए गेट बंद किए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दंपति व उसके परिजन चप्पल पहनकर मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे। साथ ही, स्थानीय परंपरा के अनुसार हनुमान प्रतिमा के पास महिलाओं के जाने पर रोक थी, इसीलिए उन्हें अनुमति नहीं दी गई थी। उन्होंने इन आरोपों को गलत बताया कि उक्त निजी मंदिर में दलितों का प्रवेश वर्जित है। उन्होंने कहा कि दलित समाज के अधिकांश शादी शुदा जोड़े आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में आते हैं, और दो दिन पूर्व भी ऐसा हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, दर्शन के बाद दलित समाज के कुछ लोगों द्वारा अन्य समुदायों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद गांव में पंचायत बुलाई गई। थाना प्रभारी के अनुसार पंचायत में कुछ परिवारों को काम पर न रखने और सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

बहिष्कार के निर्णय के बाद दूल्हे के समाज जनों ने तीन अलग-अलग दुकानों पर सामान न दिए जाने के वीडियो भी रिकॉर्ड किए हैं। परिवार का कहना है कि दुकानदारों ने पंचायत के निर्णय का हवाला देते हुए चायपत्ती और दूध तक देने से इनकार कर दिया। कुछ दुकानदारों ने कहा कि यदि वे सामान देंगे तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ेगा।

एसपी रवींद्र वर्मा ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की बैठक कराई है। शनिवार शाम को हुई बैठक में दोनों पक्षों को अलग-अलग समझाइश दी गई। पुलिस का कहना है कि दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य बनाने के प्रयास कल रात सफल हो गया और सभी लोग आपसी सौहार्द से रहने के लिए मान गए।